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Online Betting: 23000 करोड़ के ऑनलाइन सट्टेबाजी फिनटेक नेटवर्क में हेराफेरी, 177 शेल कंपनियां; ईडी की नजर

Thu, 26 Mar 2026 10:11 PM IST
Rahul Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 26 Mar 2026 10:11 PM IST
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ED Fraud Uncovered in rs 23000 Cr Online Betting Fintech Network 177 Shell Companies
ED - फोटो : Adobe Stock

23000 करोड़ रुपये के ऑनलाइन सट्टेबाजी-फिनटेक नेटवर्क की जांच का दायरा बढ़ सकता है। अभी तक इस मामले की जांच जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) द्वारा की जा रही है। इसके अलावा केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) भी इस केस की गहन छानबीन कर रहा है। लिहाजा, इस मामले की जांच में 177 शेल कंपनियों/वित्तीय संस्थानों का पता चला है, ऐसे में अब ईडी भी इस केस की जांच कर सकती है। फिनटेक कंपनियों में शामिल वेगोफिन डिजिटल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, ईडी के रडार पर है। इसके चलते जल्द ही आधिकारिक तौर पर ईडी इस केस की जांच में शामिल हो सकती है। 

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धन के असली स्त्रोत को छिपाया गया 
अभी तक इस की जांच कर रहे 'डीजीजीआई' का मानना है कि यह केस 30000 करोड़ रुपये से आगे जा सकता है। इस मामले में नई कंपनियों का नाम सामने आ रहा है। ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग प्लेटफॉर्म के द्वारा धन की जो हेराफेरी की गई है, उसमें सैंकड़ों कंपनियां शामिल हैं। फिलहाल,  177 फर्जी कंपनियों का नाम सामने आया है। इन शेल कंपनियों के इस्तेमाल से धन के असली स्त्रोत को छिपाया गया। साथ ही वास्तविक आय को कम दिखाने के लिए भी शेल कंपनियों की मदद ली गई। ये सब इसलिए भी किया गया, ताकि टैक्स से बचा जा सके। 'डीजीजीआई' ने वेगोफिन के निदेशकों पर शिकंजा कस दिया है। 
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दुबई से फिनटेक कंपनियों के नेटवर्क का संचालन 
फिनटेक कंपनियों की जांच में वेगोफिन डिजिटल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल है। जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, कंपनी के संस्थापक निदेशक यारस सुरेश बाबू, वाईएस प्रभु कुमार और राजा शेखर रेड्डी का उक्त नेटवर्क में कथित हाथ बताया जा रहा है। इनके अलावा जांच एजेंसी ने एक ऐसे व्यक्ति का भी पता लगाया है, जिसने दुबई से कथित तौर इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाई है। इस व्यक्ति पर फिनटेक नेटवर्क के संचालन और विदेशों से धन का समन्वय करने का आरोप है। 
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फिनो पेमेंट्स बैंक के खिलाफ कार्रवाई 
इस मामले की जांच के दौरान बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई की गई है। फिनो पेमेंट्स बैंक के खिलाफ हुई कार्रवाई में इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी ऋषि गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने बैंकिंग चैनलों के माध्यम से संदिग्ध सट्टेबाजी और इससे जुड़े लेनदेन का रास्ता साफ किया है। उन्होंने जमानत के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। 

फिनटेक प्रोग्राम प्रबंधकों को भुगतान प्लेटफार्म किसने मुहैया कराया है, 'डीजीजीआई' द्वारा इसकी जांच की जा रही है। इस बाबत कई वित्तीय संस्थान जांच के रडार पर आ गए हैं। फिनटेक नेटवर्क में सीधे तौर पर शामिल कंपनियों की जांच प्रारंभ कर दी गई है। एसबीएम बैंक इंडिया भी कथित तौर पर उक्त वित्तीय संस्थानों में शामिल बताया गया है। तय नियमों में अगर बैंक प्रबंधन की तरफ से कोई गंभीर चूक सामने आती है तो दूसरे संस्थानों की तरह यहां भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। 
 
जीएसटी वसूली और संपत्तियां होंगी कुर्क 
23000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के ऑनलाइन सट्टेबाजी-फिनटेक नेटवर्क में धन की हेराफेरी मामले में अब जीएसटी वसूली होगी। जीएसटी खुफिया महानिदेशालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) इस बाबत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जीएसटी वसूली के अलावा इस मामले में शामिल वित्तीय संस्थानों और उनके पदाधिकारियों के खिलाफ भी केस दर्ज होंगे। जिन लोगों ने उक्त केस में आपराधिक संपत्ति एकत्रित की है, उनकी संपत्ति कुर्क होगी। इसके अलावा बकाया टैक्स भी वसूल किया जाएगा। अगर ईडी की जांच में मनी लॉंड्रिंग का मामला सामने आता है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ जाएगा।

 
300 वेबसाइट और एप ब्लॉक 
केंद्र सरकार ने पिछले दिनों ऑनलाइन अवैध सट्टेबाजी पर कठोर कार्रवाई की है। इस तरह के प्लेटफार्म का संचालन करने वाली 300 वेबसाइटों और एप को ब्लॉक कर दिया है। ये वेबसाइट और एप, ऑनलाइन स्पोर्ट्स बैटिंग प्लेटफार्म मुहैया कराती हैं। जिन वेबसाइट और एप पर गाज गिरी है, उनमें  स्पोर्ट्स सट्टेबाजी प्लेटफार्म के अलावा ऑनलाइन कैसीनो भी शामिल हैं। सरकार द्वारा ऑनलाइन अवैध सट्टेबाजी के खिलाफ अपने कठोर अभियान को जारी रखते हुए अभी तक 8400 वेबसाइट ब्लॉक की गई हैं। ऑनलाइन गेमिंग एक्ट पास होने के बाद इस तरह की वेबसाइट व ऐप ब्लॉक करने के मामलों में तेजी आई है। एक्ट पास होने के बाद 4900 वेबसाइट ब्लॉक कर दी गई हैं। 

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