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बड़ा खुलासा: 'क्रिप्टो टोकन, रियल वर्ल्ड एसेट' में डेरिवेटिव ट्रेडिंग, बिना अनुमति के सीमा-पार वित्तीय लेनदेन
Fri, 06 Nov 2026 10:56 PM IST
पवन पांडेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Fri, 06 Nov 2026 10:56 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय ने फेमा उल्लंघन के आरोप में 4 और 5 नवंबर को बंगलूरू में कॉइनडीसीएक्स और डेल्टा एक्सचेंज से जुड़े तीन ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में आरोप है कि दोनों प्लेटफॉर्म भारतीय ग्राहकों के रुपये को यूएसडीटी में बदलकर बाइनेंस, कूकॉइन और बायबिट जैसे विदेशी क्रिप्टो एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग के लिए भेज रहे थे। ईडी के मुताबिक, ऐसे सीमा-पार लेनदेन का कुल कारोबार हजारों करोड़ रुपये का है।
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ईडी की जांच में बड़ा खुलासा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बंगलूरू जोनल कार्यालय ने फेमा, 1999 की धारा 37 के तहत 4 और 5 नवंबर को बंगलूरू में तीन जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 'कॉइनडीसीएक्स' क्रिप्टो एक्सचेंज और 'डेल्टा एक्सचेंज' से जुड़ी है। इन पर क्रिप्टो टोकन और 'रियल वर्ल्ड एसेट' टोकन में डेरिवेटिव ट्रेडिंग के जरिए बिना अनुमति के सीमा-पार वित्तीय लेनदेन करने का आरोप है। ईडी ने यह जांच तब शुरू की, जब उसे 'मेसर्स नेब्लियो टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' (जो 'कॉइनडीसीएक्स' प्लेटफॉर्म चलाती है) और 'मेसर्स एक्सेलियम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' (जो 'डेल्टा एक्सचेंज' प्लेटफॉर्म चलाती है) द्वारा बड़े पैमाने पर फेमा नियमों के उल्लंघन की जानकारी मिली। ये प्लेटफॉर्म डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्रिप्टो टोकन (जैसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस) और आरडब्लूए टोकन में ट्रेडिंग की सुविधा दे रहे थे। इन प्लेटफॉर्म्स के पास विदेशी कंपनियों के 'टोकनाइज्ड स्टॉक' में ट्रेडिंग कराने की अनुमति नहीं थी, फिर भी वे खुलेआम इसका विज्ञापन कर रहे थे।
प्रवर्तन निदेशालय की खुफिया जांच और जुटाई गई खुफिया जानकारी से पता चला है कि ये प्लेटफॉर्म डेरिवेटिव ट्रेडिंग और टोकनाइज्ड स्टॉक ट्रेडिंग के लिए यूएसडीटी जैसे 'स्टेबल कॉइन' का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके जरिए वे बाइनेंस, कूकॉइन, गेट.आईओ, बायबिट जैसे विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेडिंग कर रहे थे।
इस तरह का विज्ञापन दिया गया
विदेशी कंपनियों के टोकेनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग
तलाशी अभियान से पता चला कि 'कॉइनडीसीएक्स' और डेल्टा एक्सचेंज, दोनों ही ग्राहकों को स्पॉट ट्रेडिंग, क्रिप्टो टोकन पर आधारित डेरिवेटिव्स (यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस) में ट्रेडिंग, और टोकेनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रहे थे। 'कॉइनडीसीएक्स' प्लेटफॉर्म क्रिप्टो में स्पॉट ट्रेडिंग, क्रिप्टो टोकन में फ्यूचर्स, ऑप्शंस ट्रेडिंग और विदेशी कंपनियों के टोकेनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रहा है। प्लेटफॉर्म के इन प्रोडक्ट्स में फेमा, 1999 का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया है।
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यह है तरीका
स्पॉट ट्रेडिंग - 'डबल हॉप' ट्रांजैक्शंस
तलाशी के दौरान मिले सबूतों से पता चला कि ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करने के लिए, प्लेटफॉर्म उनके पैसों को यूएसडीटी में बदलकर विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे बाइनेंस, कूकॉइन व गेट.आईओ आदि) पर भेजता है।
यूं होता है इन ट्रांजैक्शंस का फ्लो
फ्यूचर्स और ऑप्शंस
जांच से पता चला है कि कॉइनडीसीएक्स द्वारा पेश किए जाने वाले 'फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस' ट्रेडिंग प्रोडक्ट्स, असल में बाइनेंस, बायबिट, कूकॉइन, गेट.आईओ जैसे विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर किए जा रहे हैं।
कुछ ऐसा रहा है इनका तरीका
टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग
तलाशी अभियान से पता चला है कि कॉइनडीसीएक्स एप्पल, गूगल और टेस्ला जैसी विदेशी कंपनियों के टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रही है। तलाशी के दौरान मिले सबूतों से पता चला है कि इस तरह की ट्रेडिंग असल में 'हाइपरलिक्विड' पर टोकनाइज्ड स्टॉक्स में की जाने वाली 'डेरिवेटिव ट्रेडिंग' है। हाइपरलिक्विड एक विदेशी 'डिसेंट्रलाइज्ड' (विकेंद्रीकृत) क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है।
सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान
तलाशी अभियान से पता चला है कि कॉइनडीसीएक्स के पास विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर 'एंटरप्राइज ट्रेडिंग अकाउंट' हैं। इन अकाउंट्स में क्रिप्टो एसेट्स रखे गए हैं, जो फेमा के नियमों का उल्लंघन है। कॉइनडीसीएक्स विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को ट्रांजैक्शन फीस के तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है, जो कि उनका बिजनेस खर्च है। हालांकि, यह ट्रांजैक्शन फीस यूएसडीटी जैसे स्टेबलकॉइन्स के जरिए दी जाती है, जो फेमा, 1999 के तहत तय किए गए नियमों का उल्लंघन है।
डेल्टा एक्सचेंज इंडिया
यह प्लेटफॉर्म 'एक्ससेलियम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा चलाया जा रहा है। डेल्टा एक्सचेंज इंडिया अपने ग्राहकों को क्रिप्टो टोकन्स में स्पॉट ट्रेडिंग, फ्यूचर्स और ऑप्शन्स, तथा विदेशी कंपनियों के टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा देता है। समूह से जुड़े दो परिसरों में की गई तलाशी में कई बातें सामने आई हैं।
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प्रवर्तन निदेशालय की खुफिया जांच और जुटाई गई खुफिया जानकारी से पता चला है कि ये प्लेटफॉर्म डेरिवेटिव ट्रेडिंग और टोकनाइज्ड स्टॉक ट्रेडिंग के लिए यूएसडीटी जैसे 'स्टेबल कॉइन' का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके जरिए वे बाइनेंस, कूकॉइन, गेट.आईओ, बायबिट जैसे विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेडिंग कर रहे थे।
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इस तरह का विज्ञापन दिया गया
विदेशी कंपनियों के टोकेनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग
तलाशी अभियान से पता चला कि 'कॉइनडीसीएक्स' और डेल्टा एक्सचेंज, दोनों ही ग्राहकों को स्पॉट ट्रेडिंग, क्रिप्टो टोकन पर आधारित डेरिवेटिव्स (यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस) में ट्रेडिंग, और टोकेनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रहे थे। 'कॉइनडीसीएक्स' प्लेटफॉर्म क्रिप्टो में स्पॉट ट्रेडिंग, क्रिप्टो टोकन में फ्यूचर्स, ऑप्शंस ट्रेडिंग और विदेशी कंपनियों के टोकेनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रहा है। प्लेटफॉर्म के इन प्रोडक्ट्स में फेमा, 1999 का बड़े पैमाने पर उल्लंघन किया गया है।
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यह है तरीका
स्पॉट ट्रेडिंग - 'डबल हॉप' ट्रांजैक्शंस
तलाशी के दौरान मिले सबूतों से पता चला कि ग्राहकों के ऑर्डर पूरे करने के लिए, प्लेटफॉर्म उनके पैसों को यूएसडीटी में बदलकर विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे बाइनेंस, कूकॉइन व गेट.आईओ आदि) पर भेजता है।
यूं होता है इन ट्रांजैक्शंस का फ्लो
- यूजर भारतीय रुपया जमा करता है।
- यूजर स्पॉट ट्रेडिंग के लिए ऑर्डर देता है।
- आईएनआर को स्टेबल कॉइन, यानी यूएसडीटी में बदल दिया जाता है।
- ऑर्डर पूरा करने के लिए इस स्टेबल कॉइन (यूएसडीटी) को
- बाइनेंस, कूकॉइन व गेट.आईओ आदि पर भेज दिया जाता है।
- बाइनेंस, कूकॉइन व गेट.आईओ को फंड्स का यह ट्रांसफर, क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर के नियमों को दरकिनार करके किया जा रहा है।
- सबूतों से पता चला है कि ये ट्रांजैक्शंस विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर कोस्टा रिका की एक इकाई के नाम से खोले गए खाते के जरिए किए जा रहे हैं, जो असल में सिर्फ कागजों पर मौजूद एक इकाई है।
- वास्तव में, ये ट्रांजैक्शंस सीधे कॉइनडीसीएक्स से, एप्लिकेशन प्रोग्राम इंटरफेस के जरिए किए जा रहे हैं।
- सबूतों से पता चलता है कि इस तरह के क्रॉस-बॉर्डर स्पॉट ट्रेडिंग ट्रांजैक्शंस का वॉल्यूम हजारों करोड़ रुपये तक है।
फ्यूचर्स और ऑप्शंस
जांच से पता चला है कि कॉइनडीसीएक्स द्वारा पेश किए जाने वाले 'फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस' ट्रेडिंग प्रोडक्ट्स, असल में बाइनेंस, बायबिट, कूकॉइन, गेट.आईओ जैसे विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर किए जा रहे हैं।
कुछ ऐसा रहा है इनका तरीका
- यूजर कॉइनडीसीएक्स में भारतीय रुपये जमा करता है।
- यूजर 'फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस' में पोजिशन खोलने के लिए ऑर्डर देता है।
- कॉइनडीसीएक्स, कोस्टा रिका स्थित एक ग्रुप एंटिटी (इकाई) के नाम पर खोले गए अपने अकाउंट के जरिए, बाइनेंस, कूकॉइन, बायबिट या गेट.आईओ पर यूजर के ऑर्डर के बराबर (1:1) पोजिशन खोलता है।
- पता चला है कि यह एक 'पेपर एंटिटी' (केवल कागजों पर मौजूद इकाई) है।
- असल में, ये ट्रांजैक्शन सीधे कॉइनडीसीएक्स द्वारा 'एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस' के जरिए किए जा रहे हैं।
- जब यूजर अपनी पोजिशन बंद करता है, तो इन विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर सेटलमेंट होता है, क्योंकि वहां खोली गई संबंधित पोजिशन भी बंद कर दी जाती है।
- जुटाए गए सबूतों से पता चलता है कि इस तरह के क्रॉस-बॉर्डर 'फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस' ट्रांजैक्शन का वॉल्यूम हजारों करोड़ रुपये का है।
टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग
तलाशी अभियान से पता चला है कि कॉइनडीसीएक्स एप्पल, गूगल और टेस्ला जैसी विदेशी कंपनियों के टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा दे रही है। तलाशी के दौरान मिले सबूतों से पता चला है कि इस तरह की ट्रेडिंग असल में 'हाइपरलिक्विड' पर टोकनाइज्ड स्टॉक्स में की जाने वाली 'डेरिवेटिव ट्रेडिंग' है। हाइपरलिक्विड एक विदेशी 'डिसेंट्रलाइज्ड' (विकेंद्रीकृत) क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है।
- यूजर कॉइनडीसीएक्स में भारतीय रुपये जमा करता है।
- यूजर ग्लोबल फ्यूचर्स स्टॉक के लिए ऑर्डर देता है।
- कॉइनडीसीएक्स यूजर के फंड को 'स्टेबलकॉइन' (जैसे यूएसडीटी) में बदल देता है और हाइपरलिक्विड पर यूजर के ऑर्डर के लिए 1:1 की पोजिशन खोल देता है। हाइपरलिक्विड पर पोजिशन खोलने के लिए इसी यूएसडीटी का इस्तेमाल होता है।
- जब यूजर अपनी पोजिशन बंद करता है, तो हाइपरलिक्विड पर सेटलमेंट होता है, क्योंकि इन प्लेटफॉर्म्स पर खोली गई संबंधित पोजिशन भी बंद कर दी जाती हैं।
- सबूतों से पता चलता है कि टोकनाइज्ड स्टॉक्स में इस तरह के क्रॉस-बॉर्डर (सीमा-पार) लेन-देन का वॉल्यूम हजारों करोड़ रुपये का है।
सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान
तलाशी अभियान से पता चला है कि कॉइनडीसीएक्स के पास विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर 'एंटरप्राइज ट्रेडिंग अकाउंट' हैं। इन अकाउंट्स में क्रिप्टो एसेट्स रखे गए हैं, जो फेमा के नियमों का उल्लंघन है। कॉइनडीसीएक्स विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को ट्रांजैक्शन फीस के तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का भुगतान कर रही है, जो कि उनका बिजनेस खर्च है। हालांकि, यह ट्रांजैक्शन फीस यूएसडीटी जैसे स्टेबलकॉइन्स के जरिए दी जाती है, जो फेमा, 1999 के तहत तय किए गए नियमों का उल्लंघन है।
डेल्टा एक्सचेंज इंडिया
यह प्लेटफॉर्म 'एक्ससेलियम टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड' द्वारा चलाया जा रहा है। डेल्टा एक्सचेंज इंडिया अपने ग्राहकों को क्रिप्टो टोकन्स में स्पॉट ट्रेडिंग, फ्यूचर्स और ऑप्शन्स, तथा विदेशी कंपनियों के टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग की सुविधा देता है। समूह से जुड़े दो परिसरों में की गई तलाशी में कई बातें सामने आई हैं।
- डेल्टा एक्सचेंज इंडिया द्वारा किया जा रहा डेरिवेटिव ट्रेडिंग (यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग और टोकनाइज्ड स्टॉक्स में ट्रेडिंग) का एक बड़ा हिस्सा, असल में कॉइनडीसीएक्स के जरिए रूट किया जा रहा था।
- कॉइनडीसीएक्स, फेमा 1999 के नियमों का उल्लंघन करते हुए, इन लेन-देनों को बाइनेंस, कूकॉइन, गेट.आईओ, बायबिट आदि जैसे विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स पर अंजाम दे रहा था।
- इस तरह के क्रॉस-बॉर्डर (सीमा-पार) लेन-देन की कुल रकम कई हजार करोड़ रुपये होने का पता चला है।
- तलाशी के दौरान यह भी पता चला कि डेल्टा एक्सचेंज इंडिया द्वारा विदेशों में स्थित अपनी सहयोगी इकाइयों को सैकड़ों करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं, जिसकी जांच चल रही है।
- इन प्लेटफॉर्म्स द्वारा पेश किए गए फिनटेक प्रोडक्ट्स, प्रथम दृष्टया 'सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1956', 'सेबी एक्ट, 1992' और 'आरबीआई एक्ट, 1934' आदि में तय किए गए नियमों के खिलाफ हैं। इन मामलों की आगे और जांच की जा रही है।