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मिजोरम-मणिपुर में ईडी की बड़ी कार्रवाई: ड्रग्स तस्करी से जुड़े 1,424 बैंक खाते फ्रीज, 26 करोड़ की संपत्ति जब्त

Sun, 25 Oct 2026 02:17 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Sun, 25 Oct 2026 02:17 PM IST
सार

प्रवर्तन निदेशालय ने मिजोरम और मणिपुर में नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े कथित हवाला नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की है। जांच में म्यांमार से आने वाली हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन की बिक्री से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों और मनी ट्रांसफर केंद्रों के जरिए स्थानांतरित किए जाने का पता चला।

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म्यांमार से ड्रग्स तस्करी और हवाला नेटवर्क का खुलासा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आइजोल और इंफाल उप-क्षेत्रीय कार्यालयों ने 23 अक्तूबर को 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002' (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत आइजोल, चम्फाई, लॉन्गत्लाई (मिजोरम) और चुराचांदपुर (मणिपुर) में कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की।
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यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के तीन मामलों से जुड़ी है, जो म्यांमार से हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन टैबलेट की तस्करी और नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली रकम के हवाला के जरिए लेन-देन से संबंधित हैं। यह अभियान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और मिजोरम पुलिस के साथ मिलकर चलाया गया। 
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ईडी ने अब तक जब्त की कितनी संपत्ति?
इस कार्रवाई के दौरान, ईडी ने मिजोरम और मणिपुर में नार्को-ट्रेड और नार्को-हवाला ऑपरेटरों से जुड़े 1424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। साथ ही, मिजोरम स्थित नार्को-हवाला ऑपरेटरों की 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया गया। इससे पहले भी ईडी ने बैंक खातों को फ्रीज करके 8.19 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी, जिससे कुल जब्त की गई संपत्ति का मूल्य 26 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
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छापेमारी के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें तीन मिजोरम से और तीन मणिपुर से हैं। इसके अलावा, नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में पहले से ही न्यायिक हिरासत में बंद चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए मिजोरम की विशेष अदालत में आवेदन प्रक्रियाधीन हैं। 

म्यांमार से हो रही थी तस्करी
एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने तीन मामलों में जांच शुरू की। ईसीआईआर/एजेडएसजेडओ/05/2025 (कृषिव एंटरप्राइज मामला, मिजोरम) 14.03.2025 को चम्फाई की जोखावथर पुलिस द्वारा 4.722 किलोग्राम हेरोइन (साबुन की 440 टिकिया) जब्त किए जाने से जुड़ा है। इसे म्यांमार के एक सप्लायर के लिए जोखावथर से आइजोल ले जाया जा रहा था।

ईसीआईआर/एजेडएसजेडओ/01/2026 (जबरुल हक मामला, मिजोरम) 21.08.2025 को मिजोरम के सेलिंग के पास एनएच-06ए पर एनसीबी, अगरतला द्वारा वाहनों के एक काफिले से 49.101 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट और 40 ग्राम हेरोइन जब्त किए जाने से जुड़ा है। यह खेप म्यांमार के चिंटुआंग से आई थी। इसे दमचेरा-कानहमून बॉर्डर पर पहुंचाया जाना था। 

ईसीआईआर/आईएमएसजेडओ/12/2026 (ज़ेंगैहनिआंग उर्फ तानियांग मामला, मणिपुर) 02.07.2026 को मणिपुर की चुराचांदपुर पुलिस द्वारा 2.413 किलोग्राम ब्राउन शुगर और 31.43 लाख रुपये नकद जब्त किए जाने से जुड़ा है। यह नकदी म्यांमार से सप्लाई किए गए नशीले पदार्थों की बिक्री से मिली थी, जिसे सप्लायर्स को भेजने के लिए चुराचांदपुर में इकट्ठा किया गया था। तीन मामलों की जांच से एक आपस में जुड़े 'नार्को-हवाला' (नशीले पदार्थों और हवाला से जुड़ा) तंत्र का खुलासा हुआ है।

इसमें चम्फाई, आइजोल और लॉन्गत्लाई के कुछ बैंक खातों का इस्तेमाल होता है, जिनमें मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा से आया ड्रग्स का पैसा जमा किया जाता है। फिर उससे म्यांमार के सप्लायरों को भुगतान किया जाता है। पूर्वोत्तर भारत, जिसकी म्यांमार के साथ 1,643 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। 

क्या है गोल्डन ट्रायंगल?
यहीं पर 'गोल्डन ट्रायंगल' नशीले पदार्थों के लिए मुख्य जमीनी रास्ता बन गया है। मिजोरम और मणिपुर में आने वाली हेरोइन और मेथामफेटामाइन गोलियां स्थानीय स्तर पर खप जाती हैं, या फिर असम के रास्ते भारत के बाकी हिस्सों और बांग्लादेश भेज दी जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया से मिलने वाला पैसा वापस मिजोरम के सीमावर्ती शहरों में आता है, जहां से म्यांमार के सप्लायरों को भुगतान किया जाता है। यह तस्करी का रास्ता मिजोरम के चम्फाई-ज़ोखावथर सेक्टर से होकर गुज़रता है और दोनों तरफ काम करता है। एक तरफ, नशीले पदार्थ बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायन (प्रीकर्सर और कटिंग केमिकल्स) भारत से म्यांमार भेजे जाते हैं। उदाहरण के लिए, मार्च से नवंबर 2024 के बीच 'मैसर्स कृषिव एंटरप्राइजेज' ने नियमित ई-वे बिल और जीएसटी इनवॉइस का इस्तेमाल करके लगभग 32 टन 'कैफीन एनहाइड्रस' और 10 टन 'एल्युमिनियम क्लोराइड एनहाइड्रस' भेजा। 

यह सामान आइजोल और मिजोरम के सीमावर्ती इलाकों की छोटी रिटेल फार्मेसियों और जनरल स्टोरों को भेजा गया, जिनके पास अपनी कोई मैन्युफैक्चरिंग या प्रोसेसिंग यूनिट नहीं है। इन दुकानों के ज़रिए, ये रसायन सीमा पार करके म्यांमार की उन इकाइयों तक पहुंचाए जाते हैं, जहां गोलियां बनाई जाती हैं। वहां 'कैफीन एनहाइड्रस' का इस्तेमाल मेथामफेटामाइन की मात्रा बढ़ाने और उसे 'याबा' गोलियों में बदलने के लिए किया जाता है। दूसरी तरफ, म्यांमार में तैयार की गई हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन गोलियां ज़ोखावथर (जो म्यांमार के खावमावी के सामने है) में तियाउ नदी पार करके भारत लाई जाती हैं। इन्हें पहले चम्फाई लाया जाता है, और फिर चम्फाई-आइजोल सड़क और एनएच-06ए के ज़रिए आइजोल, वैरेन्गटे और असम-त्रिपुरा की सीमाओं तक पहुंचाया जाता है। 

म्यांमार स्थित आयोजक, जैसे कि रुनथानचुंगी (उर्फ़ नू सुंगी) और चिंटुआंग, ज़ोखावथार और चम्फाई में स्थानीय लोगों को सामान ढोने के लिए काम पर रखते हैं। वे साबुन के डिब्बों, टैक्सियों, मोटरसाइकिलों और ट्रकों के काफिलों (जिनके साथ एस्कॉर्ट गाड़ियाँ भी होती हैं) में छिपाकर माल भेजते हैं। इसके बदले उन्हें चम्फाई के उन्हीं हवाला खातों के ज़रिए भुगतान किया जाता है, जिनमें पूरे पूर्वोत्तर से नशीले पदार्थों की बिक्री का पैसा आता है। इस तरह, रसायनों की आपूर्ति, नशीले पदार्थों की तस्करी और पैसों का लेन-देन—ये सब चम्फाई-ज़ोखावथार कॉरिडोर पर आकर मिल जाते हैं।

कैसे होता है पैसों का लेन-देन?
पैसों का यह लेन-देन चम्फाई से काफी दूर शुरू होता है। इस कॉरिडोर से निकलने वाले ड्रग्स को मणिपुर, असम, त्रिपुरा और भारत के अन्य हिस्सों में नकद के बदले बेचा जाता है। इस नकदी को हवाला के जरिए भेजा जाता है, और बिक्री से मिली रकम को इकट्ठा करके म्यांमार में मौजूद सप्लायर्स के पास वापस भेज दिया जाता है। मणिपुर के चुराचांदपुर सेक्टर में, इस नकदी को सिंडिकेट के गुर्गों (जैसे नेन्गज़ातुआन वाल्टे उर्फ तुआनपी) द्वारा इकट्ठा किया जाता था। इसके बाद उसे ज़ेनगैहनिआंग उर्फ तानिआंग जैसे कैश हैंडलर्स को सौंप दिया जाता था। यहाँ से यह पैसा मिनी-एटीएम या कस्टमर सर्विस पॉइंट काउंटरों के जरिए बैंकिंग सिस्टम में पहुंच जाता था। 

तानिआंग हर दिन एक करोड़ रुपये तक की रकम चुराचांदपुर स्थित 'मेसर्स गो अल्फा ट्रिप' (एक मिनी-एटीएम और मनी-ट्रांसफर काउंटर) पर पहुंचाती थी। इसके साथ वह उन खातों की सूची भी देती थी, जिनमें पैसा जमा करना होता था। काउंटर पर उसे "नुनियांग" कोड नाम से दर्ज किया गया था। 2024 से जून 2026 के बीच, इस काउंटर के जरिए 2,947 बार पैसे ट्रांसफर किए गए, जिनकी कुल रकम 175.03 करोड़ रुपये थी। यह पैसा ज़ोखाव्थर, चम्फाई, लॉन्गत्लाई और आइजोल के व्यापारियों, फार्मेसियों और अन्य लोगों को भेजा गया। लेन-देन के सुराग को छिपाने के लिए, पैसे का कुछ हिस्सा चुराचांदपुर के अन्य काउंटरों और फर्जी कंपनियों (फ्रंट एंटिटीज) के जरिए घुमाकर भेजा जाता था। मिज़ोरम में जिन फार्मेसियों, जनरल स्टोरों और लोगों ने अपने खाते किराए पर दिए थे (प्रति लाख रुपये पर 500 रुपये के बदले), उन्होंने कुछ ही दिनों के भीतर RTGS, NEFT या IMPS के जरिए यह पैसा आगे भेज दिया। 

इस दौरान नकद निकासी न के बराबर थी और कोई वास्तविक व्यापार भी नहीं हुआ था। जिन सात खातों की जांच की गई, उनमें कुल 11.98 करोड़ रुपये आए थे, जिसमें से केवल 17 लाख रुपये ही नकद निकाले गए। चम्फाई की एक गृहिणी के खाते में- जिसे उसका पति (जो बैंक कर्मचारी है) चलाता था—15.48 करोड़ रुपये जमा हुए, जबकि उस परिवार की मासिक आय लगभग 27,000 रुपये ही थी। कई चरणों से गुजरने के बाद, यह पैसा आखिरकार चम्फाई में बिना लाइसेंस के काम करने वाले 'रुपया-क्यात' एक्सचेंजर्स के पास पहुंचता है। इनमें मुख्य रूप से लालरामपारी और उनके पति लाललियानसांगा (जो 'मेसर्स जेटीएस स्टोर' के मालिक हैं) शामिल हैं। उनके खातों में असम, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और दिल्ली से 125 करोड़ रुपये नकद सहित कुल 268.80 करोड़ रुपये जमा होने का रिकॉर्ड मिला है। आइजोल और चम्फाई में हवाला खातों तक पहुंचा ड्रग का पैसा सिर्फ पूर्वोत्तर से ही नहीं आया था। 

दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से भी आई हवाला की रकम
इन खातों में नई दिल्ली, कोलकाता और मुंबई से बड़ी रकम आई। इसमें हवाला ऑपरेटर लालरिंकिमा को कोलकाता स्थित शेल कंपनियों से मिले लगभग 2.14 करोड़ रुपये और तनियांग को हावड़ा की एक शेल कंपनी से मिले 10 लाख रुपये शामिल हैं। इसके अलावा, दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर में चम्फाई स्थित ऑपरेटरों के खातों में नकद जमा किया गया। इससे पता चलता है कि बड़े शहरों में बेची गई नशीली दवाओं से मिली रकम को कॉर्पोरेट और हवाला चैनलों के जरिए वापस सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाया जा रहा था। म्यांमार में बैठे लोगों के निर्देश पर, उन्होंने भारत भर के विभिन्न खातों में पैसे ट्रांसफर किए और सीमा पार सप्लायरों का बकाया भुगतान 'क्यात' (म्यांमार की मुद्रा) में किया, जिसके लिए उन्होंने प्रति लाख 250-500 रुपये का कमीशन लिया। इस रकम को रियल एस्टेट और अन्य व्यवसायों में खपाया गया। 

इसमें चम्फाई के ज़ियोन वेंग में बनी पांच मंजिला कमर्शियल इमारत 'होटल जेटीएस' भी शामिल है, जिसे हवाला खातों के जरिए आई रकम से ही बनाया गया था। चम्फाई, आइजोल, लॉन्गत्लाई और चूड़ाचांदपुर में हवाला ऑपरेटरों, 'म्यूल-अकाउंट' (दूसरों के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) धारकों, मुखौटा कंपनियों (फ्रंट बिजनेस) और मिनी-एटीएम काउंटरों के परिसरों में तलाशी ली गई। इसके अलावा, उन बैंक शाखाओं में भी तलाशी ली गई जहां मुख्य खाते मौजूद थे। इस दौरान नकद लेनदेन और ट्रांसफर के हिसाब-किताब वाले रजिस्टर, चेक बुक, डेबिट कार्ड, मोबाइल फोन और खातों को चलाने में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। 

500 रुपये के किराए पर दिए बैंक खाते
खाता धारकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने खाते संदिग्ध नार्को-हवाला ऑपरेटरों को प्रति लाख 500 रुपये के किराए पर दिए थे। चुराचांदपुर के 'गो अल्फा ट्रिप' के रजिस्टरों में दर्ज लेनदेन, आइजोल के दो मामलों में जांच के दायरे में आए मिजोरम के खातों (थांगखुआला और उनकी पत्नी - 2.22 करोड़ रुपये, जुआली ड्रग्स स्टोर - 2.67 करोड़ रुपये, फंग थान किमी - 2.05 करोड़ रुपये, लालबियाखलुना लालदुहावमा - 1.82 करोड़ रुपये और लालरामपारी) से मेल खाते हैं। इससे यह साबित होता है कि मणिपुर में नशीले पदार्थों की बिक्री से जुटाया गया पैसा उन्हीं चम्फाई हवाला खातों के जरिए सेटल किया जा रहा था, जिनका इस्तेमाल मिजोरम में हेरोइन और मेथामफेटामाइन नेटवर्क चलाने के लिए किया जाता था।


तलाशी के दौरान, मिजोरम और मणिपुर में नार्को-ट्रेड और नार्को-हवाला ऑपरेटरों के 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। इनमें उनके 'म्यूल' (बिचौलिए) खाते और लाभार्थी खाते भी शामिल हैं। ईसीआईआर/एजेडएसजेडओ/05/2025 के तहत 23.10.2026 को जारी एक अनंतिम कुर्की आदेश के जरिए, प्रवर्तन निदेशालय ने चम्फाई के ज़ियोन वेंग में स्थित 'होटल जेटीएस' को कुर्क कर लिया है। यह पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत 571.11 वर्ग मीटर जमीन पर बनी है और हवाला ऑपरेटर लालरामपारी के पति लाललियानसांगा के नाम पर है। इसकी कीमत 17.82 करोड़ रुपये आंकी गई है। नार्को-हवाला गतिविधियों से जुड़े बैंक खातों के जरिए पहले ही 8.19 करोड़ रुपये जब्त किए जा चुके हैं, जिससे इस मामले में कुल जब्त की गई संपत्ति अब 26 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
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