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ED: भतीजे और ड्राइवर के नाम पर खोली कंपनी, धोखाधड़ी से लिया ऋण, 22.3 करोड़ का एनपीए, बेनामी स्वामित्व का खेल

Sat, 22 Nov 2025 03:30 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 22 Nov 2025 03:30 PM IST
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ED: Company opened in the name of nephew and driver loan taken fraudulently NPA of Rs 22.3 crore
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोच्चि जोनल कार्यालय द्वारा 21 नवंबर को पीवी अनवर और अन्य लोगों से जुड़े कई परिसरों में छापेमारी की गई तो कई खुलासे हुए। संदिग्ध बेनामी स्वामित्व का खेल पता चला। जांच एजेंसियों को इस खेल की भनक न लग सके, इसके लिए 'भतीजे' और 'ड्राइवर' के नाम पर कंपनी खोली गई। उसके बाद केरल फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (केएफसी) द्वारा धोखाधड़ी से ऋण स्वीकृत किए गए। पैसा किसी दूसरे काम में लगा दिया गया। नतीजा, 22.3 करोड़ का एनपीए हो गया। 

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ईडी की यह जांच मेसर्स मलमकुलम कंस्ट्रक्शन को दिए गए 7.5 करोड़ रुपये और 3.05 करोड़ रुपये व 1.5 लाख रुपये के ऋण से जुड़ी है। मेसर्स पीवी आर डेवलपर्स को 1.56 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई, जिसे उन्हीं संपार्श्विक संपत्तियों का उपयोग करके थोड़े समय के अंतराल में स्वीकृत किया गया। इसके परिणामस्वरूप कुल एनपीए लगभग 22.3 करोड़ रुपये हो गया। प्रारंभिक साक्ष्य स्वीकृत धनराशि के दुरुपयोग, नाममात्र के शेयरधारकों और निदेशकों के उपयोग एवं संपत्तियों के संदिग्ध बेनामी स्वामित्व का संकेत देते हैं। इसके चलते धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 17 के तहत पीवी अनवर और अन्य लोगों से जुड़े कई परिसरों में ईडी ने विस्तृत तलाशी अभियान प्रारंभ किया।  
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यह तलाशी 2015 में केरल फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (केएफसी) द्वारा धोखाधड़ी से ऋण स्वीकृत किए जाने से उत्पन्न धन शोधन जांच के संबंध में थी। यह तलाशी मेसर्स मलमकुलम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स पी वी आर डेवलपर्स, मेसर्स बिस मंजेरी एलएलपी, मेसर्स केरल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (मलप्पुरम शाखा) से जुड़े आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत परिसरों और इसमें शामिल प्रमुख व्यक्तियों के आवासों पर की गई। 
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तलाशी के दौरान, पीवी अनवर ने मेसर्स मलमकुलम कंस्ट्रक्शन्स के वास्तविक लाभकारी मालिक होने की बात स्वीकार की। बावजूद इसके कि कंपनी उनके भतीजों और ड्राइवर के नाम पर थी। उन्होंने यह पुष्टि की है कि ऋण का उपयोग बड़े टाउनशिप प्रोजेक्ट पीवी आर मेट्रो विलेज के लिए किया गया।

वह 2015-20 के दौरान नकारात्मक आय घोषित करने के बावजूद, अपनी संपत्ति में 14.38 करोड़ रुपये (2016) से 64.14 करोड़ रुपये (2021) तक की उल्लेखनीय वृद्धि के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। उनके सहयोगियों के बयानों से पता चला कि उनके निर्देश पर दस्तावेजों पर नियमित रूप से हस्ताक्षर किए जाते थे। धनराशि को संबद्ध संस्थाओं में डायवर्ट किया जाता था। कुछ नकद संग्रह नियमित लेखा चैनलों के बाहर संभाले जाते थे। यह भी पाया गया है कि स्थानीय/नियामक निकाय से उचित अनुमोदन के बिना मेसर्स मलमकुलम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पीवीआर मेट्रो विलेज में कुछ इमारतों का निर्माण किया गया था

ईडी के मुताबिक, मेसर्स बिस मंजेरी एलएलपी और पीवीआर मेट्रो विलेज के परिसरों की तलाशी में स्कूल, मनोरंजन पार्क, रिसॉर्ट, विला परियोजनाओं और अपार्टमेंट ब्लॉकों सहित व्यापक निर्माण और व्यावसायिक गतिविधि का संकेत मिला। एकत्र किए गए साक्ष्य संबंधित संस्थाओं के बीच ऋण आय के हस्तांतरण और स्वीकृत गतिविधियों से असंबंधित उद्देश्यों के लिए उपयोग का संकेत देते हैं। तलाशी के दौरान, बिक्री समझौतों, वित्तीय दस्तावेजों और संपत्ति के कागजात, कई रिकॉर्ड और डिजिटल उपकरणों से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। 


जांच एजेंसी के ऑपरेशन के दौरान दर्ज किए गए केएफसी अधिकारियों के बयानों में प्रक्रियात्मक खामियां, पूर्व बंधकों का सत्यापन न करना और बाद के ऋणों के लिए उसी संपार्श्विक का पुन: उपयोग करने का खुलासा हुआ। तकनीकी अधिकारी ने स्वीकार किया कि मूल्यांकन रिपोर्टों का नए सिरे से निरीक्षण किए बिना पुन: उपयोग किया गया था। तलाशी के दौरान, विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर रखे गए 15 बैंक खातों की पहचान की गई, जो कथित तौर पर बेनामी हैं। इनसे संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। जब्त की गई सामग्री की जांच 'अपराध की आय' की पहचान करने, ऋण राशि के हेर-फेर की मात्रा निर्धारित करने, लेयरिंग तंत्र स्थापित करने और बेनामी होल्डिंग्स की सीमा निर्धारित करने के लिए की जा रही है।

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