{"_id":"64111342fba3183f660f7784","slug":"ed-arrests-four-in-andhra-pradesh-siemens-project-money-laundering-case-2023-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमेंस प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने चार को किया गिरफ्तार, शेल कंपनियों से पैसों की हेराफरी का आरोप","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सीमेंस प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग केस: ED ने चार को किया गिरफ्तार, शेल कंपनियों से पैसों की हेराफरी का आरोप
Wed, 15 Mar 2023 06:07 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Wed, 15 Mar 2023 06:07 AM IST
सार
ईडी की जांच में पता चला है कि स्किलर एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने हेराफरी और शेल कंपनियों का जाल बनाकर इस सरकारी पैसे को डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया। इसके लिए बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी बिल बनाए गए।
विज्ञापन
प्रवर्तन निदेशालय।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उन्नत सॉफ्टवेयर का उपयोग कर युवाओं को कुशल बनाने की आंध्र प्रदेश सरकार की योजना के 241 करोड़ रुपये की हेराफरी कर मनी लॉन्ड्रिंग किए जाने की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
विज्ञापन
इनमें सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईएसडब्ल्यू) के पूर्व प्रबंध निदेशक (एमडी) सौम्याद्री शेखर बोस उर्फ सुमन बोस, डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी विकास विनायक खानवेलकर, पूर्व वित्तीय सलाहकार और स्किलर एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता मुकुल चंद्र अग्रवाल लिमिटेड और चार्टर्ड एकाउंटेंट सुरेश गोयल शामिल हैं। सभी को विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत ने ईडी की हिरासत में भेज दिया है। मामले की जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी कर रही है।
विज्ञापन
फर्जी बिल बनाकर शेल कंपनियों को ट्रांसफर किया गया पैसा
जांच में पता चला है कि स्किलर एंटरप्राइजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने हेराफरी और शेल कंपनियों का जाल बनाकर इस सरकारी पैसे को डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया। इसके लिए बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर, सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी बिल बनाए गए। ईडी ने अब तक करीब 70 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पता लगा लिया है।
विज्ञापन