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ईडी की कार्रवाई: फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए करोड़ों की हेराफेरी का आरोप, अविनाश राठौड़ को किया गिरफ्तार

Thu, 05 Nov 2026 05:51 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 05 Nov 2026 05:51 PM IST
सार

प्रवर्तन निदेशालय ने मुंबई में दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है और 157 करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले में अविनाश राठौड़ को गिरफ्तार किया है। पटनी पर संपत्ति हड़पने के लिए धमकी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप है। आखिर निवेशकों की रकम कहां गई? दुबई कनेक्शन की जांच में क्या सामने आएगा? आइए, विस्तार से मामले को जानते हैं...

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ED Arrests Avinash Rathod Over Alleged Money Laundering Through Fraudulent Investment Schemes
ईडी की बड़ी कार्रवाई - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मुंबई में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। पहले मामले में एजेंसी ने असलम अब्दुल रहमान पटनी और अन्य आरोपियों से जुड़ी करीब 4 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त की हैं। इनमें बैंक खातों में जमा रकम और एक अचल संपत्ति शामिल है। वहीं, दूसरे मामले में ईडी ने एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी के नाम पर कथित निवेश घोटाले और पैसों की हेराफेरी के मामले में अविनाश अर्जुन राठौड़ को गिरफ्तार किया है। इस मामले में करीब 587 निवेशकों के 157 करोड़ रुपये लगाने की बात सामने आई है।
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ईडी की दोनों कार्रवाइयां धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई हैं। हालांकि, ये दोनों अलग-अलग मामले हैं। पटनी से जुड़े मामले में एजेंसी ने कथित जबरन वसूली और फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति हासिल करने की जांच के आधार पर संपत्ति जब्त की है। वहीं, राठौड़ के मामले में फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों से पैसा जुटाने, उसे अलग-अलग बैंक खातों में भेजने और कथित तौर पर उसका इस्तेमाल करने की जांच चल रही है।
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पटनी के मामले में ईडी ने कौन-सी संपत्ति जब्त की?
ईडी के मुंबई जोनल कार्यालय ने असलम अब्दुल रहमान पटनी और अन्य लोगों के मामले में करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की है। इसमें बैंक खातों में मौजूद रकम जैसी चल संपत्तियां और एक अचल संपत्ति शामिल है। यह कार्रवाई दादर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई जांच के बाद की गई। इस मामले की जांच मुंबई पुलिस की एंटी-एक्सटॉर्शन सेल, क्राइम ब्रांच ने भी की थी। प्राथमिकी में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल जैसे आरोप शामिल हैं।
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लांबट बिल्डिंग पर कब्जे के लिए क्या तरीका अपनाने का आरोप है?
ईडी की जांच के मुताबिक, आरोपियों ने मूल मालिक की पहचान का गलत इस्तेमाल कर लांबट बिल्डिंग नाम की संपत्ति हासिल करने की कथित साजिश रची। इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। जांच में सामने आया कि असलम अब्दुल रहमान पटनी ने 2019 में लांबट बिल्डिंग की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की थी। आरोप है कि यह हिस्सा मोहम्मद अहमद और दिवंगत शहजादा जंगरेज खान का था। ईडी के अनुसार, उनसे दाऊद इब्राहिम और सलीम इकबाल कुरैशी उर्फ सलीम फ्रूट के नाम पर धमकाकर और दबाव बनाकर हिस्सेदारी ली गई। इस प्रक्रिया में शब्बीर अहमद हसन करोलिया और यूसुफ अहमद हसन करोलिया समेत अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

संपत्ति सलीम फ्रूट की पत्नी के नाम कैसे पहुंची?
जांच में आरोप है कि मूल मालिकों को उनकी हिस्सेदारी के बदले कोई भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद संपत्ति असलम पटनी से शाजिया सलीम इकबाल कुरैशी के नाम स्थानांतरित कर दी गई। शाजिया, सलीम फ्रूट की पत्नी हैं। ईडी का कहना है कि लगातार किए गए लेनदेन के जरिए संपत्ति के हस्तांतरण को वैध दिखाने की कोशिश की गई। एजेंसी ने फिलहाल लांबट बिल्डिंग को शाजिया के नाम पर दर्ज होने के आधार पर जब्त किया है। इसके साथ ही असलम पटनी और अन्य आरोपियों के बैंक खातों में मौजूद रकम भी कार्रवाई के दायरे में आई है।

अविनाश राठौड़ पर निवेशकों से 157 करोड़ रुपये जुटाने का आरोप क्या है?
दूसरे मामले में ईडी ने अविनाश अर्जुन राठौड़ को 2 नवंबर 2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। यह जांच एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी और उससे जुड़ी अन्य संस्थाओं के नाम पर चलाई गई कथित फर्जी निवेश योजनाओं से संबंधित है। ईडी के अनुसार, निवेशकों को हर महीने करीब 5 प्रतिशत मुनाफा और 20 महीने में मूल रकम का 5 प्रतिशत भुगतान करने का वादा किया गया था। इस भरोसे पर लोगों से पैसा जुटाया गया। अब तक की जांच में करीब 587 निवेशकों के लगभग 157 करोड़ रुपये निवेश करने की जानकारी सामने आई है। इसमें से करीब 89 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं किए जाने का आरोप है।

राठौड़ की कंपनी और बैंक खातों को लेकर जांच में क्या सामने आया?
ईडी के मुताबिक, अविनाश राठौड़ एपीएस वेल्थ वेंचर्स एलएलपी में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता था। वह कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज और वित्तीय फैसलों को नियंत्रित करता था। जांच में आरोप है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं के कई बैंक खातों में भेजी गई। इनमें एपीएस स्मार्ट गेन एलएलपी के खाते भी शामिल हैं। बैंक रिकॉर्ड में अलग-अलग खातों के बीच बड़ी रकम के लेनदेन का पता चला है। एजेंसी ने राठौड़ के निजी बैंक खातों में पैसे भेजे जाने और प्रतिभूतियों में निवेश किए जाने की जानकारी भी जुटाई है। इन पैसों का अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ और इससे किन लोगों को लाभ मिला, इसकी जांच जारी है।


दुबई में निवेश और गिरफ्तारी के बाद अब क्या करेगी ईडी?
जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि अविनाश राठौड़ और उसकी पत्नी अप्रैल 2023 में भारत छोड़कर दुबई चले गए थे। वहां राठौड़ के स्वामित्व वाली वेल्थप्रो इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट एलएलसी के नाम पर निवेशकों को इसी तरह के रिटर्न का भरोसा दिया गया था। ईडी इस पहलू की भी जांच कर रही है। राठौड़ को गिरफ्तार करने के बाद मुंबई की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए उसे 4 नवंबर 2026 तक ईडी की हिरासत में भेजा था। एजेंसी अब पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने, अपराध से अर्जित रकम के लाभार्थियों की पहचान करने और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। दोनों मामलों में ईडी की जांच जारी है।

 
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