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ED: 2000+ घर खरीदारों से वसूले 1100 करोड़, 17 साल बाद फ्लैट मिला न प्लॉट; 681.54 करोड़ की अचल संपत्तियां कुर्क

Sat, 12 Jul 2025 06:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 12 Jul 2025 06:01 PM IST
सार

ईडी ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), नई दिल्ली और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की थी। यह जांच मेसर्स आरपीडीपीएल और इसके प्रमोटरों अरविंद वालिया, बलवंत चौधरी सिंह और संदीप यादव के खिलाफ कई घर खरीदारों की शिकायतों पर आधारित थी।

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ED: 1100 crores recovered home buyers neither flat nor plot received after 17 year immovable properties seized
ईडी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने कई परियोजनाओं में विभिन्न घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी के एक मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत मेसर्स रामप्रस्थ प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (आरपीडीपीएल) और उसकी समूह कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इन कंपनियों की 681.54 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। कुर्क की गई संपत्तियों में गुरुग्राम के सेक्टर 37डी, सेक्टर 92 और 95 में स्थित रामप्रस्थ सिटी की लगभग 226 एकड़ की दो प्लॉटेड कॉलोनियाँ और गुरुग्राम, हरियाणा के गाँव बसई, गाडोली कलां, हयातपुर और वजीपुर में स्थित लगभग 1700 एकड़ के भूखंड शामिल हैं।

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ईडी ने आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), नई दिल्ली और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की थी। यह जांच मेसर्स आरपीडीपीएल और इसके प्रमोटरों अरविंद वालिया, बलवंत चौधरी सिंह और संदीप यादव के खिलाफ कई घर खरीदारों की शिकायतों पर आधारित थी। घर खरीदारों को  समय सीमा के भीतर फ्लैट या प्लॉट देने का वादा किया गया था। आरोप है कि कंपनी ने अपना वादा पूरा नहीं किया। 
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ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स आरपीडीपीएल की विभिन्न परियोजनाएं जैसे प्रोजेक्ट एज, प्रोजेक्ट स्काईज, प्रोजेक्ट राइज और रामप्रस्थ सिटी (प्लॉटेड कॉलोनी परियोजना) सेक्टर 37डी, 92 और 95 गुरुग्राम में स्थित हैं, जिन्हें 2008-2011 में लॉन्च किया गया था। 14-17 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी फ्लैटों या प्लॉट की जमीनों का कब्जा नहीं दिया गया है। जांच से पता चला है कि मेसर्स आरपीडीपीएल ने गुरुग्राम, हरियाणा में उक्त परियोजनाओं के लिए 2000 से अधिक घर खरीदारों से लगभग 1100 करोड़ रुपये एकत्र किए। 
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जांच से यह भी पता चला है कि मेसर्स आरपीडीपीएल के प्रमोटर्स या निदेशकों ने घर खरीदारों से एकत्र की गई धनराशि को किसी दूसरे कार्य में लगा दिया। घर खरीदारों से वादा किया गया था कि उन्हें वादे के मुताबिक तय समय पर घर, फ्लैट या प्लाट मिल जाएगा। घरों के निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने की बजाए कंपनी ने भूमि पार्सल आदि की खरीद में पैसा लगा दिया। उस पैसे को अग्रिम के रूप में अपनी समूह कंपनियों में भेज दिया। इस कारण आज तक फ्लैट और प्लॉट वितरित नहीं किए जा सके।

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