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Karnataka: मतदाता सूची में धोखाधड़ी के आरोपों पर चुनाव आयोग सख्त, दो अधिकारी निलंबित, जांच के आदेश
Fri, 25 Nov 2022 09:20 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Fri, 25 Nov 2022 09:20 PM IST
सार
चुनाव प्राधिकरण ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को 1 जनवरी, 2022 के बाद शिवाजीनगर, चिकपेट और महादेवपुरा विधानसभा सीटों की मतदाता सूची में जोड़े गए नामों और हटाए गए नामों की एक सूची सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा करने का निर्देश दिया है। जिससे कि इन दलों को दावे और आपत्तियां फाइल करने में सक्षम बनाया जा सके।
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चुनाव आयोग
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
कर्नाटक में वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) क्षेत्र में एक निजी संस्था द्वारा मतदाता धोखाधड़ी के मामले में सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने मामले में संलिप्त दो अतिरिक्त जिला चुनाव अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, निजी संस्था द्वारा मतदाता डेटा के संग्रह में धोखाधड़ी के आरोपों के क्रम में आयोग ने कर्नाटक के मुख्य सचिव और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को जांच का निर्देश दिया है।
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जानकारी के मुताबिक, ये मामला राज्य की तीन विधानसभा सीटों- 162 शिवाजीनगर, 169 चिकपेट और 174 महादेवपुरा से जुड़ा हुआ है। ये तीनो विधानसभा सीटें बीबीएमपी क्षेत्र में आती हैं। इन विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में एक निजी संस्था द्वारा नाम जोड़ने और हटाने के आरोप हैं। इसी मामले में कार्रवाई करते हुए भारतीय चुनाव आयोग ने 100 फीसदी जांच के निर्देश दिए हैं।
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चुनाव प्राधिकरण ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को 1 जनवरी, 2022 के बाद शिवाजीनगर, चिकपेट और महादेवपुरा विधानसभा सीटों की मतदाता सूची में जोड़े गए नामों और हटाए गए नामों की एक सूची सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा करने का निर्देश दिया, ताकि उन्हें दावे और आपत्तियां फाइल करने में सक्षम बनाया जा सके।
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चुनाव आयोग के ये निर्देश कांग्रेस द्वारा चुनाव प्राधिकरण में याचिका दाखिल करने के बाद आए हैं। अपनी याचिका में कांग्रेस ने कर्नाटक में मतदाता सूची में धोखाधड़ी मामले की विस्तृत जांच की मांग की थी।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इन तीनों विधानसभाओं की मतदाता सूची से 27 लाख नाम हटा दिए गए थे और 11 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए थे। कांग्रेस ने यह दावा भी किया था कि एक निजी कंपनी के कर्मचारियों ने सरकारी अधिकारियों के रूप में मतदाताओं का डेटा एकत्र किया था।
कांग्रेस के आरोपों के बाद, भारतीय चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की कवायद की देखरेख के लिए वृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के बाहर के अधिकारियों को नियुक्त किया है।