फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   EC officials Voter List SIR in most states any document not needed for More than half of electorate hindi news

EC: 'अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण के वक्त दस्तावेजों की जरूरत ही नहीं', एसआईआर को लेकर बड़ा दावा

Wed, 17 Sep 2025 01:43 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 17 Sep 2025 01:43 PM IST
सार

चुनाव आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बीते कुछ महीने से लगातार चर्चा में बना हुआ है। ताजा घटनाक्रम में आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण के वक्त दस्तावेजों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अधिकारियों ने कारण भी बताए हैं। जानिए क्या है मतदाता सूची एसआईआर को लेकर यह बड़ा दावा

विज्ञापन
EC officials Voter List SIR in most states any document not needed for More than half of electorate hindi news
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर बड़ा दावा किया (सांकेतिक) - फोटो : एएनआई

विस्तार

बीते लगभग दो महीने में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। बिहार से उपजा यह मामला इतना गंभीर हो चुका है कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हुआ और अदालत को सख्त टिप्पणी में कहना पड़ा कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो कोर्ट पूरी एसआईआर प्रक्रिया को निरस्त कर देगा। अब ताजा घटनाक्रम में एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बड़ा दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण के वक्त दस्तावेजों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अधिकारियों ने इस दावे के समर्थन में तर्क भी दिए हैं। जानिए अधिकारियों ने और क्या कहा...

विज्ञापन


दस्तावेज और मतदाताओं का ब्योरा पहले से ही मौजूद
बुधवार को चुनाव आयोग (EC) के अधिकारियों ने कहा, देश के अधिकांश राज्यों में आधे से अधिक मतदाताओं को आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। इसका कारण है कि दस्तावेज और मतदाताओं का ब्योरा पहले से ही उन राज्यों की पिछली गहन पुनरीक्षण सूची के दौरान दर्ज हो चुके हैं।
विज्ञापन


दस्तावेजों की जरूरत क्यों नहीं? इस उदाहरण से समझिए
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश राज्यों में पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2002 से 2004 के बीच हुआ था। उसी वर्ष की मतदाता सूची के आधार पर आगामी एसआईआर कराई जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिहार में 2003 की मतदाता सूची का उपयोग इस साल के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया। दिल्ली में पिछला SIR 2008 और उत्तराखंड में 2006 में हुआ था। इन राज्यों की उस समय की मतदाता सूचियां संबंधित CEO (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Indians In Georgia: 'खाना-शौचालय कुछ नहीं, जॉर्जिया में मवेशी सा बर्ताव'; पर्यटक ने बताया 56 भारतीयों का दर्द

मतदाताओं के लिए प्रावधान
बिहार में जारी निर्देशों के अनुसार, 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण में सूचीबद्ध लगभग 4.96 करोड़ मतदाताओं (कुल वोटर्स का 60%) को जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें केवल उसी सूची का संबंधित हिस्सा दिखाना होगा। हालांकि, लगभग 3 करोड़ मतदाताओं (40%) के लिए जन्मस्थान या जन्मतिथि साबित करने के लिए 12 निर्धारित दस्तावेजों में से एक देना अनिवार्य होगा।


ये भी पढ़ें- Khalistanis In Canada: वैंकूवर दूतावास घेरने की खालिस्तानी साजिश, भारतीय उच्चायुक्त की आपत्तिजनक फोटो भी बनाई

नया घोषणा प्रपत्र
एसआईआर को लेकर जारी गहमागहमी के बीच निर्वाचन आयोग ने एक अतिरिक्त घोषणा प्रपत्र (declaration form) भी लागू किया है। यह उन आवेदकों के लिए है जो पहली बार मतदाता बनना चाहते हैं या किसी अन्य राज्य से पता बदलकर आए हैं। इसमें उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ था। ऐसे मतदाता भी अपने जन्म से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। अगर किसी शख्स का जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ हो, तो ऐसे मामले में उन्हें अपने माता-पिता के जन्म संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।

एसआईआर पर विवाद और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
गौरतलब है कि बिहार में हो रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विरोध कर रहे दलों की दलील है कि चुनाव से चंद महीने पहले जल्दबाजी में कराए जा रहे SIR को लेकर आयोग की टाइमिंग संदिग्ध है। ऐसा करने के कारण करोड़ों योग्य नागरिकों मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed