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Supreme Court: 'SIR के दौरान EC को नागरिकता की स्थिति की सीमित जांच का अधिकार', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Wed, 27 May 2026 08:42 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 27 May 2026 08:42 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची बनाते या संशोधित करते समय नागरिकता की सीमित जांच कर सकता है, लेकिन किसी की नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। कोर्ट ने क्या कहा, पढ़िए रिपोर्ट-

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EC empowered to conduct limited scrutiny of citizenship status during SIR: SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसीआई) मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने के दौरान नागरिकता की स्थिति की सीमित जांच कर सकता है। हालांकि, शीर्ष कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आयोग किसी की नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं कर सकता। किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों के पास है।
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सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
नागरिकता को लेकर यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस अहम फैसले में की, जिसमें निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और संशोधन करने का अधिकार सही माना गया। पीठ ने कहा, निर्वाचन आयोग को केवल इस सीमित उद्देश्य के लिए नागरिकता की जांच करने का अधिकार है कि कोई व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने के योग्य है या नहीं। 
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आयोग की जांच सिर्फ मतदाता सूची तक सीमित
फैसले में कहा गया, जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 16 के तहत कानूनी आवश्यकता को देखते हुए, मतदाता सूची तैयार करने या संशोधित करने के दौरान आयोग को नागरिकता से जुड़े सवालों की जांच करने का अधिकार है। हालांकि, यह जांच केवल इस उद्देश्य से की जा सकती है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाए या हटाया जाए। साथ ही, ऐसे मतदाता के पक्ष में मौजूद कानूनी धारणा का भी ध्यान रखना होगा, जिसका नाम पहले से सूची में दर्ज है।
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फैसले में कहा गया, इसी सीमित कानूनी दायरे में आयोग उसके सामने मौजूद सामग्री की जांच कर चुनाव संबंधी उद्देश्य से फैसला लेता है। पीठ ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच कानून के मुताबिक और निष्पक्ष तरीके से की गई है। 


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मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्या कहा?
कोर्ट ने यह भी कहा कि मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने का मतलब यह नहीं है कि कानूनी रूप से उसे गैर-नागरिक घोषित कर दिया गया है। मतदाता सूची में नाम होने से नागरिकता की एक कानूनी धारणा बनती है। लेकिन उचित जांच के जरिये उसे चुनौती दी जा सकती है। लोगों को मतदान अधिकार से वंचित होने से बचाने के लिए कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से कहा कि नागरिकता के आधार पर जिन लोगों के नाम हटाए जाएं, उनके सभी मामलों को चार हफ्ते के भीतर नागरिकता कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाए।
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