पूर्वोत्तर रेलवे : 134 साल पुराने पहले हिंदी प्रिंटिंग प्रेस में छपाई बंद
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अंग्रेजों के समय स्थापित 134 साल पुराने रेलवे के पहले हिंदी प्रिंटिंग प्रेस में छपाई एक अगस्त से बंद हो गई है। पूर्वोत्तर रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक 1884 में इस प्रेस की स्थापना गोरखपुर में हुई थी। इसके पहले यह प्रेस मुजफ्फरपुर (बिहार) में था। अब यहां कार्यरत 167 कर्मचारियों को समायोजित करके दूसरे विभागों में भेजने की तैयारी है।
रेलवे प्रेस के बंद होने के बाद अब रेल टिकट, ईएफटी, पास व रसीद आदि (मूल्य आधारित सामग्री) की छपाई उत्तर रेलवे के प्रेस से होगी। अन्य फार्म व कागजातों की छपाई रेलवे आउटसोर्सिंग से कराएगा।रेलवे प्रेस बंद होने का पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ, एनई रेलवे मजदूर यूनियन समेत कई संगठनों ने विरोध किया था। यहां कार्यरत कर्मचारियों की मांग है उन्हें पदोन्नति देकर ही दूसरे विभागोें में भेजा जाय।
मुख्यालय गोरखपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस में अप्रैल से ही टिकटों की छपाई बंद हो गई थी और जून में किसी भी तरह की छपाई का आर्डर लेना बंद कर दिया गया। रेल प्रशासन का कहना है कि 31 जुलाई के बाद अब छपाई बंद हो गई है।
मुजफ्फरपुर से गोरखपुर शिफ्ट हुआ था रेलवे प्रेस
ब्रिटिश हुकूमत में वर्ष 1884 में मुजफ्फरपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस को गोरखपुर में शिफ्ट किया गया और यहां से हिंदी में छपाई शुरू की गई। 31 मई 1955 तक इस प्रेस का प्रशासनिक नियंत्रण सीसीएस (मुख्य वाणिज्य अधीक्षक) के हाथ में था। एक जून 1955 को इसका नियंत्रण भंडार नियंत्रक को सौंप दिया गया। तब यह इलाका बंगाल एंड नार्थ वेस्टर्न रेलवे (बीएनडब्लूआर) एवं तिरहूत रेलवे के अधीन था। 14 अप्रैल 1952 में पूर्वोत्तर रेलवे का गठन किया गया। यहां उस वक्त करीब चार हजार कर्मचारी कार्यरत थे।
पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ संजय यादव का कहना है कि 31 जुलाई से रेलवे प्रिंटिंग प्रेस में छपाई संबंधित सभी गतिविधियां बंद हो गई हैं। इसकी सूचना रेलवे बोर्ड को भी दी जा चुकी है।
पीआरकेएस महामंत्री विनोद कुमार राय का कहना है कि प्रेस बंद न किए जाने के लिए एनएफआईआर के जरिये रेलवे बोर्ड से अनुरोध किया गया था। यह निर्णय कर्मचारी विरोधी है।