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Earthquake: दो साल...400 बार भूकंप के झटके, विदेश नहीं यह भारत के एक शहर का आंकड़ा; घरों के बाहर सोते हैं लोग

Sun, 26 Feb 2023 01:29 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sun, 26 Feb 2023 01:29 PM IST
सार

400 भूकंप में 86 प्रतिशत की तीव्रता दो प्रतिशत भी कम थी, जबकि 13 प्रतिशत की तीव्रता दो से तीन के बीच थी। केवल पांच भूकंप ऐसे रहे, जो तीन के ऊपर चले गए।

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Earthquake swarm: Gujarat Amreli recorded More than 400 earthquakes in two years
भूकंप का शिकार गुजरात का अमरेली। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

तुर्किये और सीरिया में बीते दिनों आए भूकंप ने देश-दुनिया के लोगों में दहशत पैदा कर दी है। भूकंप का हल्का सा भी झटका उन्हें गंभीर तरह से डरा रह है। इस बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि गुजरात का अमरेली जिला सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित क्षेत्र है। यहां बीते दो साल में 400 भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। 

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सभी भूकंप के झटके हल्के रहे। गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सीस्मोलॉजिकल रिसर्च (आईएसआर) के कार्यवाहक महानिदेशक सुमेर चोपड़ा ने बताया, आमतौर पर ये झटके अल्पकालिक होते हैं,  लेकिन दिनों, हफ्तों या कभी-कभी महीनों तक जारी रह सकते हैं और अक्सर एक ही स्थान पर दोहराए जाते हैं।
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86 प्रतिशत भूकंप की तीव्रता दो से कम 
सुमेर चोपड़ा ने बताया, जब भूकंप बार-बार आता है, तो झटके हल्के ही होते हैं। उन्होंने बताया, 400 भूकंप में 86 प्रतिशत की तीव्रता दो प्रतिशत भी कम थी, जबकि 13 प्रतिशत की तीव्रता दो से तीन के बीच थी। केवल पांच भूकंप ऐसे रहे, जो तीन के ऊपर चले गए। उन्होंने बताया, कई भूकंप ऐसे रहे, जिन्हें लोगों ने महसूस भी नहीं किया। उन्होंने कहा, जब भूकंप श्रृंखला में आता है, तो बड़े भूकंप की संभावना कम ही होती है। 
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बार-बार भूकंप आने का क्या है कारण?
वैज्ञानिकों के मुताबिक, गुजरात के अमरेली जिले सहित सौराष्ट्र क्षेत्र का अधिकांश क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र तीन में आता है, जिसे मध्यम क्षति जोखिम क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उन्होंने बताया, अमरेली में फॉल्ट लाइन 10 किलोमीटर की है, जबकि बड़े भूकंप के लिए फॉल्ट लाइन 60 से 70 किमी से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताय, अमरेली में लगातार भूकंप आने का कारण टेक्टोनिक सेटअप और हाइड्रोलॉजिकल लोडिंग मौसमी भूकंपीय गतिविधियों के कारण हैं।

घर से बाहर सो रहे लोग 
अमरेली का मितियाला गांव सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां इन 400 में से कई भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। ऐसे में  एहतियात के तौर पर लोगों ने अपने घरों के बाहर सोना शुरू कर दिया है, जिससे किसी भी बड़ी भूकंपीय गतिविधि के मामले में वे बच सकें। बता दें, 23 फरवरी को भी अमरेली के सावरकुंडला और खंबा तालुका में 3.1 से 3.4 की तीव्रता के चार झटके दर्ज किए गए थे। 

पृथ्वी की प्लेटों में बदलाव वजह
सौराष्ट्र क्षेत्र के इस जिले में लगातार भूकंप के पीछे के कारणों के बारे में गांधीनगर स्थित भूकंप विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईएसआर) के कार्यवाहक महानिदेशक सुमेर चोपड़ा ने कहा कि इसकी मुख्य वजह टेक्टोनिक सेटअप और हाइड्रोलॉजिकल लोडिंग है। टेक्टोनिक सेटअप पृथ्वी की संरचना को संदर्भित करता है। पृथ्वी के नीचे टेक्टोनिक प्लेट हमेशा धीमी गति से चलती हैं, लेकिन घर्षण के कारण वे अपने किनारों पर फंस जाती हैं। इसकी वजह से वहां तनाव पैदा और उससे ऊर्जा पैदा होती है। वही उर्जा जब पृथ्वी की सतह की तरफ निकलती है तो भूकंप होता है और हमें झटके महसूस होते हैं। वहीं, हाइड्रोलॉजिकल लोडिंग पृथ्वी की सतह पर भार को संदर्भित करता है जो मिट्टी की नमी, बर्फ और वनस्पति में जमा पानी के द्रव्यमान पर आधारित होता है।

राजकोट में 4.3 तीव्रता का भूकंप
गुजरात के राजकोट जिले में रविवार दोपहर करीब 3:21 बजे 4.3 तीव्रता का भूकंप आया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार इसका केंद्र राजकोट से 270 किमी दूर 10 किमी की गहराई में था। जानमाल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

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