अर्निंग संग लर्निंग: अब मजदूर कमाई के साथ कर सकेंगे पढ़ाई, श्रमिकों को मिलेगी मोबाइल से भुगतान की ट्रेनिंग
श्रम और रोजगार मंत्रालय की विशेष सचिव अनुराधा प्रसाद ने कहा कि मजदूरों को एटीएम नहीं पेटीएम भी प्रयेाग करना आना चाहिए। आज सरकार की सभी महत्वपूर्ण योजनाओं के एप बने हुए हैं। अधिकांश योजनाओं का लाभ ऑनलाइन तरीके से ही लिया जा सकता है...
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देश के गांव, तहसील और शहरों में काम करने वाले संगठित, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए अच्छी खबर हैं। अब वे दिनभर के कामकाज के साथ साथ पढ़ाई भी कर राष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय से प्रमाण पत्र भी हासिल कर सकेंगे। दरअसल, श्रम और रोजगार मंत्रालय के अधीन वाला दत्तोपंत ठेंगड़ी श्रमिक शिक्षा और विकास बोर्ड श्रमिकों की स्किल को बढ़ाने के लिए लर्निंग के जरिए अर्निंग योजना शुरू करने जा रहा है। इसमें मजदूरों को उनके गांवों और शहरों में ही उनकी योग्यता के मुताबिक शॉर्ट टर्म कोर्स करवाएं जाएंगे। इसके लिए बोर्ड इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के साथ एक एमओयू भी साइन करने जा रहा है।
गुरुवार को महाराष्ट्र सदन में दत्तोपंत ठेंगड़ी श्रमिक शिक्षा व विकास बोर्ड का 63वां स्थापना दिवस समारोह मनाया गया। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बोर्ड के अध्यक्ष विरजेश उपाध्याय ने कहा, कोरोना महामारी के बाद पूरे विश्व में लोगों के सोचने का तरीका बदला है। ऐसे में बोर्ड भी अपने काम करने के तरीकों को उसके अनुसार बदल रहा है। इंडस्ट्री 4.0 के मुताबिक बदलते हुए तकनीक के साथ कोई भी एक विशेष स्किल किसी को हमेशा के लिए रोजगार दे यह संभव नहीं है।
इस समस्या को देखते हुए बोर्ड ने पहल की है कि एक श्रमिक अपने कार्य जीवन में रोजगारपरक रह सके, इसके लिए काम के साथ साथ शिक्षा की व्यवस्था हो इस पर काम कर रहे हैं। बोर्ड कोशिश कर रहा है कि श्रमिक बदलती तकनीक के साथ अपने स्किल को भी उसके अनुसार बेहतर कर सकें। इसके लिए लर्निंग के साथ साथ अर्निंग कार्यक्रम भी श्रमिकों के शुरू करने जा रहे हैं। इसके लिए इग्नू सहित अन्य शिक्षण संस्थाओं के साथ भी एमओयू साइन करने जा रहे हैं। साथ ही, श्रमिकों को डिजिटली कैसे साक्षर किया जा सके इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहे हैं, बोर्ड श्रमिकों को डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया के बारे भी जल्द ट्रेनिंग देगा।
विरजेश उपाध्याय ने आगे कहा कि आजादी के बाद सैकड़ो योजनाएं बनीं, लेकिन देखा जाता है कि उनके बजटीय आवंटन भी खर्च नहीं हो पाते हैं। ऐसा नहीं कि लोगों को इसकी आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं है कि क्या योजना है और कैसे उसका लाभ ले सकते हैं इसलिये बोर्ड ने यह निर्णय लिया कि वह जरूरतमंदों को सरकार की योजनाओं से जोड़ने का भी काम करेंगे। आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि एक लेबर कोड ऐसा आया है जो असंगठित और ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों को भी समाहित करता है। इसके तहत जो सुविधाएं और अधिकार कामगारों को मिले हैं वह सब तक पहुंचे इसकी व्यवस्था भी बोर्ड करेगा।
नए श्रम कानून श्रमिकों के लिए एतिहासिक कदम: यादव
कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम व रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव के भाषण का वाचन भी किया गया। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि महान विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी हमेशा समाज के वंचित और श्रमिक हितों की बात करते थे। आज श्रमिक कल्याण का जो रास्ता ठेंगडी जी ने दिखाया है उस पर चलते हुए हमें श्रमिक उत्थान के लिए काम करते रहना है। आज पीएम मोदी के नेतृत्व में ऐसी सरकार कार्य कर रही है जो श्रमिकों और गरीबों के हितों के लिए प्रतिबद्ध व संवेशनशील है।
यादव ने कहा, पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने श्रमिक हितों में अति आवश्यक श्रम सुधार लाने का अभूतपूर्व कार्य किया जो कि 74 वर्षों में नहीं किया गया। नए लेबर कोड के जरिए हमने अपने श्रमिकों के लिए बहुत से एतिहासिक कदम उठाए हैं। जैसे कि इन कोड्स के लागू होने के बाद देश के सभी 50 करोड़ श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का कानूनी अधिकारी प्राप्त होगा।
उन्होंने आगे कहा कि देश के लगभग 38 करोड़ असंगठित क्षेत्र के श्रमिक हैं। हमारी सरकार के इन श्रमिकों का राष्ट्रीय स्तर का एक व्यापक डाटा बेस बनाने के उद्देश्य से ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत की। मेरा सुझाव है कि अगले छह माह में दत्तोपंत ठेंगड़ी श्रमिक शिक्षा और विकास बोर्ड जो भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करे, इसमें एक स्लॉट ई-श्रम पोर्टल से संबंधित जानकारी और पंजीकरण की प्रक्रिया के उल्लेख के लिए रखे।
इसके अलावा कार्यक्रम में केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री रामेश्वर तेली ने वीडियो संदेश के जरिए लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि देश की श्रम शक्ति को जागृत करने के लिए इस संगठन का बहुत ही अहम योगदान रहा है। आज इस संगठन के जरिए मजदूर वर्ग को डिजिटल माध्यमों को कैसे उपयोग करना है, ये भी सिखाया जा रहा है।
बोर्ड मजदूरों को डिजिटल तौर पर भी करे मजबूत: प्रसाद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रम और रोजगार मंत्रालय की विशेष सचिव अनुराधा प्रसाद ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी श्रमिक शिक्षा और विकास बोर्ड जमीनी स्तर पर श्रमिकों के लिए काम करता है। आज इसके जरिए ही केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं गांव के मजदूरों तक पहुंच रही हैं। सरकार में जब जब प्रश्न उठता है कि ये बोर्ड क्या काम कर रहा है। कैसा काम कर रहा है तो हम लोग बताते हैं कि ये बोर्ड ही अच्छा और महत्वपूर्ण काम कर रहा है। आज समय तेजी से बदल रहा है। मजदूरों को एटीएम नहीं पेटीएम भी प्रयेाग करना आना चाहिए। आज सरकार की सभी महत्वपूर्ण योजनाओं के एप बने हुए हैं। अधिकांश योजनाओं का लाभ ऑनलाइन तरीके से ही लिया जा सकता है। बोर्ड मजदूरों को डिजिटल तौर पर मजबूत करें ताकि श्रमिक सभी योजनाओं का फायदा उठा सके। बोर्ड एक काल सेंटर भी स्थापित करे, जिससे सभी श्रमिकों को सभी योजनाओं के साथ नए श्रम कानूनों की जानकारी भी एक प्लेटफार्म के जरिए ले सके।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की अपर सचिव तथा वित्तीय सलाहकार शिवानी स्वैन ने कहा कि बोर्ड का प्रयास बेहद सराहनीय है। आज सरकारी योजनाओं का लाभ मजदूरों को कैसे मिल सके इस दिशा में बोर्ड बहुत ही अच्छा काम कर रहा है। मजदूरों के शिक्षा उत्थान को लेकर बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। छोटे गांव और कस्बों में सरकार की योजनाओं की जानकारी श्रमिकों तक पहुंचाने में बोर्ड का बहुत ही अहम रोल रहा है। आज मंत्रालय द्वारा भी गरीब श्रमिकों के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। इसमें ई श्रमिक पोर्टल बहुत ही अहम है। ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 80 लाख से अधिक श्रमिक पंजीकरण करा चुके हैं।
श्रमिकों के लिए आयोजित होंगे ई-एजुकेशन कैंप: वैद्य
दत्तोपंत ठेंगड़ी श्रमिक शिक्षा और विकास बोर्ड के महानिदेशक हर्ष वैद्य ने कहा कि बोर्ड संगठित, असंगठित और ग्रामीण क्षेत्रों के कामगारों के बीच कार्य करता है। इसके साथ-साथ बोर्ड उन्हें प्रशिक्षित और जागरूक करने का कार्य भी करता रहा है। आज देश के हर हिस्से में बोर्ड की शाखाएं हैं और लगभग सभी विषयों पर इससे जुड़े लोग श्रमिकों के बीच काम करते हैं। बदलते समय के साथ बोर्ड ने भी खुद को परिवर्तित करने का निर्णय लिया है और डिजिटल युग में श्रमिकों को डिजिटल साक्षर करने का जिम्मा उठाया है।
वैद्य ने आगे कहा, नए लेबर कोड को लेकर अपने शिक्षा पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया है। जब भी नए श्रम कानून लागू होंगे उनके शिक्षा पदाधिकारी सभी क्षेत्रों में जा कर लोगों को इसके बारे में पूरी जानकारी देंगे। बदलते परिवेश में बोर्ड मोबाइल एप, हेल्प डेस्क और ई-एजुकेशन कैंप्स भी आयोजित करने जा रहा है। जल्द ही इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के साथ एक एमओयू भी साइन करेंगे जिसके तहत श्रमिकों के लिए पत्राचार के माध्यम से कोर्स चलाए जा सकेंगे। इससे श्रमिक शिक्षा बोर्ड की पहुंच और ज्यादा लोगों तक हो सकेगी।
गौरतलब है कि दत्तोपंत ठेंगड़ी श्रमिक शिक्षा और विकास बोर्ड की स्थापना भारत सरकार ने 16 सितंबर 1958 को एक त्रिपीक्षीय संगठन के रूप में की थी। बोर्ड की समस्त नीतियों, कार्यक्रमों और श्रमिक शिक्षा गतिविधियों के संचालन में सरकार, प्रबंधन और श्रम संघों के प्रतिनिधियों की समान भागीदारी रहती हैं। इस बोर्ड का मुख्यालय नागपुर में है। बोर्ड का अपना राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण संस्थान भारतीय श्रमिक शिक्षा संस्थान मुंबई है। ये बोर्ड अपने छह आंचलिक निदेशालयों, 50 क्षेत्रीय निदेशालयों और गतिविधियों को संचालित कर रहा हैं। बोर्ड अब तक करीब तीन लाख कार्यक्रमों के माध्यम से संगठित, असंगठित और ग्रामीण क्षेत्र के 2.80 करोड़ श्रमिकों को प्रशिक्षित कर चुका है।