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जयशंकर ने श्रीलंका से की अपील- तमिलों के हितों की रक्षा के लिए द्विपक्षीय चर्चा जरूरी
Thu, 04 Feb 2021 05:31 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 04 Feb 2021 05:31 PM IST
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विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : twitter.com/DrSJaishankar
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को राज्यसभा में तमिलों के मुद्दे पर जानकारी देते हुए बताया कि श्रीलंका में तमिलों के हितों की रक्षा के मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए दोनों देशों को चर्चा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह श्रीलंका के हित में होगा कि वह तमिलों को न्याय दिलाने के लिए काम करे। तमिल लोगों को उनसे समानता, न्याय और शांति की अपेक्षाएं हैं।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि एकीकृत श्रीलंका में समानता, न्याय और शांति के लिए तमिल लोगों की आकांक्षाओं का पूरा होना इस द्वीपीय देश के अपने हित में है। राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में उन्होंने कहा कि अपनी वार्ता के दौरान मैंने दोहराया कि श्रीलंका में सुलह प्रक्रिया के लिए भारत का स्थाई समर्थन है जो वस्तुतः एक समावेशी राजनीतिक दृष्टिकोण के लिए है, जो जातीय सद्भाव को प्रोत्साहित करता है।
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विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने श्रीलंका में तमिलों के हितों की रक्षा से संबंधित मुद्दों पर अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सभी स्तर पर द्विपक्षीय चर्चा के दौरान श्रीलंका से लगातार आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे भविष्य के निर्माण के लिए सभी स्तरों पर श्रीलंका के साथ मिलकर कार्य कर रहा है, जिसमें कि एक एकीकृत श्रीलंका के भीतर समानता, न्याय, शांति और सम्मान से जीने की श्रीलंकाई तमिल समुदाय सहित समाज के सभी वर्गों की आकांक्षाएं पूरी हो सके।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके श्रीलंकाई समकक्ष महिंदा राजापक्षे के बीच पिछले साल सितंबर महीने में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान भी यह मुद्दा उठा था। एक अन्य सवाल के जवाब में विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि पिछले साल 74 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था और 11 नावों को जब्त किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने राजनयिक प्रयासों से सभी मछुआरों को सुरक्षित रिहा करा लिया।