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CII Partnership Summit: 'US में ट्रंप प्रशासन का आना व्यापारिक नजरिए से महत्वपूर्ण', विदेश मंत्री जयशंकर बोले

Mon, 02 Dec 2024 06:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 02 Dec 2024 06:10 PM IST
सार

CII Partnership Summit: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग समय के साथ और गहरा हुआ है। दोनों देशों ने एक ऐसा माहौल बनाया है, जिसमें अधिक सहयोग की संभावनाओं की तलाश की जा सकती है।

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EAM S Jaishankar at CII Partnership Summit Indian economy trade with US  trump administration
एस जयशंकर - फोटो : वीडियो ग्रैब/एक्स/एएनआई

विस्तार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के भागीदारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका में दूसरी बार ट्रंप प्रशासन का आना व्यापार के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण बदलाव है और इस पर चर्चा होना भी स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अगल-अलग देशों की पहले की सरकार के अनुभवों से ही अगली सरकार के बारे में नीति तैयार की जाती है। 

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जयशंकर ने कहा, 'भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग समय के साथ और गहरा हुआ है। दोनों देशों ने एक ऐसा माहौल बनाया है, जिसमें अधिक सहयोग की संभावनाओं की तलाश की जा सकती है।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंध में हमेशा कुछ न कुछ समझौते होंगे और यह जरूरी है कि दोनों देशों के लिए लाभकारी समझौते बनाए जाएं।  
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'पड़ोसी देशों से मजबूत हुए आर्थिक और सामाजिक संबंध'
विदेश मंत्री ने यह भी कहा, 'भारत जितना अधिक योगदान देगा, उतने ही हमारे संबंध मजबूत होंगे।' उन्होंने क्षेत्रीय बदलावों के बारे में भी चर्चा की और कहा कि भारत के पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक और सामाजिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गए हैं।  इसके अलावा, दुनिया की अर्थव्यवस्था में अब महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है।
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'यूक्रेन युद्ध ने पैदा किया खाद्य, ईंधन और उर्वरक संकट'
उन्होंने आगे कहा, 'अमेरिका और चीन के बीच तनाव इस हद तक बढ़ गया कि जिसकी कुछ साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। यूक्रेन युद्ध ने खाद्य, ईंधन और उर्वरक की सुरक्षा का संकट खड़ा कर दिया है। वैश्विक दक्षिण भी महंगाई, कर्ज, मुद्रा की कमी और व्यापार में उतार-चढ़ाव का सामना कर रहा है। कुल मिलाकर दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गई है और ऐसी कठिन परिस्थितियों में हमें अधिक मित्रों और साझेदारों की जरूरत है।'


'नवाचार और कौशल से आकर्षक साझेदार बनेगा भारत'
जयशंकर ने कहा, 'जितनी ज्यादा हमारी क्षमताएं होंगी, हमारी ताकत उतनी ही बढ़ेगी। जितना हमारे पास नवाचार और अच्छा कौशल होगा, हम उतने ही आकर्षक साझेदार बनेंगे। जैसा कि इस सम्मेलन में बताया जाएगा, आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम अपने उत्पादन को इतना बड़ा और प्रभावी बनाएं कि हम विदेश में एक भरोसेमंद साझेदार बन सकें। सरकार ने इसमें मदद करते हुए बुनियादी ढांचे और अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं को हल किया है।' 

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