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Jaishankar: 'नेहरू के दौर को महान मानने की सोच से बाहर निकलने की जरूरत', लोकतंत्र शिखर सम्मेलन में बोले जयशंकर
Wed, 20 Mar 2024 10:57 AM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 20 Mar 2024 10:57 AM IST
सार
विदेश मंत्री ने कहा कि 96.8 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं, 1.5 करोड़ चुनाव अधिकारियों और 12 लाख मतदान केंद्रों के साथ भारत का आगामी लोकसभा चुनाव आवाजाही के लिहाज से इस ग्रह का सबसे बड़ा निर्वाचन अभियान होगा।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर
- फोटो : एएनआई
विस्तार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के कुछ प्रमुख निर्णयों की आलोचना करते हुए बुधवार को कहा कि इस सोच से बाहर निकलने की जरूरत है कि1946 से शुरू हुआ दौर ‘महान’ था और देश ने इस दौरान शानदार प्रदर्शन किया।
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तीसरे लोकतंत्र शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि शुरुआती वर्षों में विदेश नीति काफी हद तक ‘नेहरूवादी वैचारिक बुलबुला’ थी और इसके अवशेष आज भी जारी हैं। जयशंकर ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत की भूमिका, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) को लेकर आलोचना, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने तथा वर्तमान संदर्भ और भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान संबंधों जैसे कई मुद्दों पर बात की। आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में सरकार की विदेश नीति के बारे में पूछे जाने पर जयशंकर ने कहा, आपने पाकिस्तान को गलत पाया, आपने चीन को गलत पाया, आपने अमेरिका को सही पाया और हमारी विदेश नीति बहुत अच्छी थी। इसलिए, इसे एक तरफ रख दें।
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तब नेहरू के फैसलों पर उठाए थे सवाल
विदेश मंत्री ने कहा, 1954 या 1950 पर गौर करें। मैं कहता हूं कि 1948 से 1952 के बीच जब निर्णय लिए जा रहे थे, तब कोई खड़ा होकर कह रहा था नेहरू जी, आप क्या कर रहे हैं, क्या आपने इसके सभी पहलू पर ध्यान दिया है? ये नेहरू के समकालीन थे जो नेहरू के उस समय लिए जा रहे निर्णयों पर सवाल उठा रहे थे। जयशंकर ने नेहरू-लियाकत समझौते पर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भीम राव आंबेडकर के विचारों का हवाला दिया। उन्होंने कहा, यह कोई राजनीतिक विवाद नहीं है। मैं युवा पीढ़ी के सामने ऐतिहासिक स्थिति का जिक्र कर रहा हूं। जिसे मैंने ‘सड़क नहीं ली गई’ कहा था, वह सड़क उपलब्ध थी और उस सड़क को चिह्नित किया गया था।
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ईवीएम पर विदेश मंत्री का बयान
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की शुरुआत पारदर्शिता, दक्षता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह बदलाव न केवल आधुनिक लोकतंत्र के सिद्धांतों के साथ संरेखित होता है, बल्कि अधिक नागरिक जुड़ाव का मार्ग प्रशस्त करता है, खासकर युवाओं के बीच जो हमारी लोकतांत्रिक विरासत की जिम्मेदारियों को प्राप्त करेंगे।
हर नागरिक की आवाज मायने रखती
उन्होंने कहा, 'स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव कराने की भारत की प्रतिबद्धता इसकी लोकतांत्रिक मशीनरी के लचीलेपन और अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है। साथ ही यह दिखाती है कि कठिनाइयों के बीच भी हर नागरिक की आवाज मायने रखती है।'
#WATCH | At the 3rd Summit of Democracy, EAM Dr S Jaishankar says, "...The introduction of Electronic Voting Machines stands testament to our commitment to transparency, to efficiency and the sanctity of the democratic process. This shift not only aligns with the principles of… pic.twitter.com/GlFxpYGevI
— ANI (@ANI) March 20, 2024
लोकसभा चुनावों का बिगुल बजा
उन्होंने आगे कहा कि देश में लोकसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। 19 अप्रैल से सात चरणों में मतदान होगा। नतीजे चार जून को घोषित किए जाएंगे। 96.8 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं, 1.5 करोड़ चुनाव अधिकारियों और 12 लाख मतदान केंद्रों के साथ भारत का आगामी लोकसभा चुनाव आवाजाही के लिहाज से इस ग्रह का सबसे बड़ा निर्वाचन अभियान होगा।