EAC-PM: 112 में से 5 आकांक्षी जिले तेजी से कर रहे विकास, सरकारी योजनाओं में पूर्वोत्तर का प्रदर्शन बेहतर
EAC-PM की रिपोर्ट में देश के सभी राज्यों और जिलों में हुई सामाजिक प्रगति का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसमें बुनियादी मानवीय जरूरतें, रहन सहन और अवसर सहित कई बिंदुओं का अध्ययन किया हुआ है...
विस्तार
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के मार्गदर्शन में इंस्टीट्यूट फॉर कंपटीटिवनेस मंगलवार को भारत के राज्यों और जिलों के लिए सामाजिक प्रगति सूचकांक जारी किया। इस विस्तृत रिपोर्ट को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष विवेक देवराय, वित्त मंत्रालय के प्रमुख आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल, इंस्टीट्यूट फॉर कंपटीटिवनेस के अध्यक्ष डॉ. अमित कपूर और सोशल प्रोग्रेस इम्पेरेटिव के सीईओ माइकल ग्रीन ने जारी किया।
इस रिपोर्ट में देश के सभी राज्यों और जिलों में हुई सामाजिक प्रगति का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसमें बुनियादी मानवीय जरूरतें, रहन सहन और अवसर सहित कई बिंदुओं का अध्ययन किया हुआ है। इनमें राज्यों को 89 और जिलों को 49 फैक्टर पर अध्ययन के बाद विस्तार से रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में बुनियादी मानवीय जरूरतों में बुनियादी चिकित्सा देखभाल, जल और स्वच्छता, व्यक्तिगत सुरक्षा और आश्रय के मामले में राज्यों और जिलों के प्रदर्शन का किया गया है। रहन का आयाम बेहतर तरीकों के आधार का आयाम बुनियादी ज्ञान तक पहुंच, सूचना तथा संचार तक पहुंच, स्वास्थ्य तथा कल्याण और पर्यावरण गुणवत्ता के घटकों में देश द्वारा की गई प्रगति का मूल्यांकन करता है। जबकि अवसर का आयाम व्यक्तिगत अधिकारों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद, समावेशिता और उन्नत शिक्षा तक पहुंच के पहलुओं पर केंद्रित है।
इस रिपोर्ट में सामने आया कि लक्षद्वीप, पुडुचेरी, सिक्किम, गोवा राज्य सभी ने इन पहलुओं में अच्छा काम किया है। जबकि असम, बिहार और झारखंड का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। देश के 112 आकांक्षी जिलों में से 27 जिले ऐसे हैं, जिनका प्रदर्शन बहुत ही अच्छा है। इसमें मिजोरम का मामित, मणिपुर के चंदेल, चंबा हिमाचल प्रदेश और पंजाब का मोंगा जिला शामिल है। इसके मुकाबले बिहार के 13 और झारखंड 19 आकांक्षी जिलों का प्रदर्शन सबसे खराब आंका गया है।
इसके अलावा यह रिपोर्ट में यह भी बताया कि पर्सनल सेफ्टी के मामले में नागालैंड, लद्दाख और पुडुचेरी सबसे आगे हैं। जबकि सबसे खराब में हरियाणा, ओडिशा और असम में यह सबसे खराब हैं। सरकारी योजना के जरिए घर मिलने के मामले में असम, बिहार और झारखंड सबसे पीछे है। तेलंगाना और तमिलनाडु का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। पानी और स्वच्छता के मामले में पंजाब, गोवा और हरियाणा का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। जबकि झारखंड, लद्दाख और ओडिशा का प्रदर्शन सबसे खराब है।
पोषण और स्वास्थ्य के मामले में केरल, लक्षद्वीप और सिक्किम का प्रदर्शन अन्य राज्यों से अच्छा हैं। जबकि बिहार, झारखंड और ओडिशा का प्रदर्शन खराब है। स्वास्थ्य की योजनाओं में राजस्थान, लद्दाख का प्रदर्शन अच्छा है। पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चल रही योजनाओं में मिजोरम, नागालैंड, मेघालय का प्रदर्शन बेहतर है।