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कभी नहीं कहा कि सभी कैदियों की आवश्यक रिहाई हो: सुप्रीम कोर्ट

Mon, 13 Apr 2020 11:17 PM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Mon, 13 Apr 2020 11:17 PM IST
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During the Corona virus, the Supreme Court cleared up confusion on the order of release of all prisoners
सुप्रीम कोर्ट

सभी कैदियों की आवश्यक रिहाई के आदेश को लेकर फैले भ्रम को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि उसने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के जेलों में बंद कैदियों को आवश्यक रूप से रिहा करने के आदेश नहीं दिए हैं। कोर्ट ने यह साफ किया कि न्यायालय के पहले के आदेश का मतलब कोरोना वायरस को देखते हुए जेलों में कैदियों की संख्या को रोकना था।

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शीर्ष अदालत ने कहा कि इसके पहले के आदेश का उद्देश्य यह तय करना था कि राज्य और संघ शासित क्षेत्र अपनी-अपनी जेलों में हालातों का आकलन करें। इसके बाद कुछ कैदियों को रिहा कर दिया जाए।
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इस दौरान प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एम एम शांतानागौडर की पीठ ने कहा कि उनके आदेशों का पूरा पालन होना चाहिए। इसके साथ ही यह आदेश सभी सुधार गृहों, हिरासत केंद्रों और सुरक्षा गृहों पर भी लागू होना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि हम साफ करते हैं कि हमने राज्यों, केंद्र शासित क्षेत्रों को अपनी जेलों से आवश्यक रूप से कैदियों को रिहा करने के आदेश नहीं दिए। पहले दिए गए आदेश का उद्देश्य यह था कि राज्य और केंद्र शासित क्षेत्र अपनी जेलों में स्थिति का आकलन करें। ऐसे में कोरोना वायरस महामारी के तेजी से फैल रहे संक्रमण को देखते हुए कुछ कैदियों को रिहा कर दिया जाए और इसके लिए जिन कैदियो को रिहा किया जाए उनकी श्रेणी तय की जाए। 


शीर्ष न्यायालय ने कहा कि 23 मार्च के आदेश में उसने राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों को उच्चस्तरीय समितियों का गठन करने के निर्देश दिए। इससे यह फैसला लिया जा सकेगा कि महामारी के दौरान कौन से कैदी अंतरिम जमानत या पैरोल पर रिहा होंगे।
 

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