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2050 तक प्रदूषण की वजह से दुनियाभर में होगी 90 लाख लोगों की मौत: रिपोर्ट

Thu, 14 Mar 2019 10:34 AM IST
sapna singla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: sapna singla Updated Thu, 14 Mar 2019 10:34 AM IST
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due to water and air pollution million peoples will die prematurely by 2050
प्रदूषण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI

वायु और जल प्रदूषण के कारण सालाना दुनियाभर के 90 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ सकती है। यह बात संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की बुधवार को आई एक रिपोर्ट से सामने आई है। यूएन चाहता है कि इसपर तुरंत कार्रवाई हो ताकि मानवता को पर्यावरणीय क्षरण के विनाशकारी परिणाम से बचाया जा सके। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है यदि एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के शहरों ने पर्यावरण संरक्षण के उपाय नहीं किए तो उसके यहां कई लाख लोगों की अकाल मृत्यु होगी। अकेले जल प्रदूषण के कारण 2050 तक सबसे ज्यादा मौते होंगी।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि ताजे पानी की व्यवस्था में प्रदूषकों के कारण एंटी-माइक्रोबियल प्रतिरोध दिखाई देगा। इससे न केवल इंसानों की मौत होगी बल्कि यह अंत:स्त्रावी (इंडोक्राइन), महिला और पुरुष की फर्टिलिटी (मां-बाप बनने की क्षमता) और बच्चे के मानसिक विकास को भी बाधित कर सकता है। इस रिपोर्ट को 70 देशों से ज्यादा के 250 वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने पेश किया, जिसमें भा़रत भी शामिल है।
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वायु और जल प्रदूषण के प्रभाव पर अपने निष्कर्षों को साझा करने के अलावा रिपोर्ट में भोज्य पदार्थों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। रिपोर्ट से पता चला है कि अमीर देश खाने को सबसे ज्यादा बर्बाद करते हैं जबकि गरीब देश अपने लोगों का पेट भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रिपोर्ट का कहना है कि वर्तमान में वैश्विक भोज्य पदार्थों का एक-तिहाई हिस्सा बर्बाद किया जाता है। जिसमें से औद्योगिक देशों का हिस्सा 56 प्रतिशत है।
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विकसित और विकासशील देशों में होने वाले भोज्य पदार्थों की बर्बादी को घटाने से 2050 में पृथ्वी पर अनुमानित 9-10 लाख लोगों को खिलाने के लिए खाद्य उत्पादन को 50 फीसदी तक बढ़ाने की आवश्यकता को कम करेगा। रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया कि मीट उत्पादन के लिए इस समय 77 प्रतिशत खेती योग्य जमीन का इस्तेमाल होता है और इससे ताजे पानी की सबसे ज्यादा खपत होती है। 


संयुक्त राष्ट्र ने मीट का इस्तेमाल कम करने की सलाह दी है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के कार्यकारी निदेशक जोयेस सुया ने कहा, 'यह रिपोर्ट मानवता के लिए एक दृष्टिकोण है। हम इस समय दो राहों पर खड़े हैं। हम अपने वर्तमान पथ पर आगे बढ़ते रहेंगे जो मानव जाति के लिए एक अंधकारमय भविष्य का कारण बनेगा या फिर हम दूसरे मार्ग को अपनाएंगे। इस बात का फैसला हमारे राजनेताओं को अभी करना होगा।'

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