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कोरोना से जंग: देश में वैक्सीन की कमी थी, सरकार ने समझदारी से लिया यह फैसला और बचा लीं लाखों डोज

Wed, 26 May 2021 01:49 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 26 May 2021 01:49 PM IST
सार

टीकाकरण की राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह के चेयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि हमारे पास वैक्सीन को लेकर निश्चित तौर पर एक संकट जरूर था। क्योंकि जो तैयारियां हुई थीं वह 30 करोड़ों लोगों के लिए हुई थीं। यह वे लोग थे जिनकी उम्र 45 साल से अधिक थी...

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Due to shortage of vaccine in India, central government taken smart decision to handle the crisis
वैक्सीन की डोज लेती युवती - फोटो : Amar Ujala (File)

विस्तार

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो फैसला लिया है कि 18 साल से 44 साल की उम्र के लोगों को भी टीका लगाया जाएगा तो जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ-पांव ही फूल गए। क्योंकि देश के पास इस उम्र के 60 करोड़ लोगों के लिए टीके तो उपलब्ध ही नहीं थे। ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक कमेटी ने बीच का रास्ता निकाला और तय किया कि अगर इसे लागू कर दिया जाए तो देश में लाखों लोगों को टीके की डोज देने में थोड़ा विलंब किया जा सकता है। उसके बाद एक नई गाइडलाइंस जारी हुई और तय हो गया कि जिन लोगों को कोविड हुआ है वह तीन महीने से पहले वैक्सीन नहीं लगवा सकते। इसी आदेश के साथ लाखों लोगों को वैक्सीन लगने का वक्त एक तीन महीने आगे बढ़ गया। अधिकारियों का कहना है इतने दिनों में वैक्सीन का प्रोडक्शन भी बढ़ता जाएगा और उनके पास स्टॉक ठीक हो जाएगा।

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देश में टीकाकरण की राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह के चेयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि हमारे पास वैक्सीन को लेकर निश्चित तौर पर एक संकट जरूर था। क्योंकि जो तैयारियां हुई थीं वह 30 करोड़ों लोगों के लिए हुई थीं। यह वे लोग थे जिनकी उम्र 45 साल से अधिक थी। वैज्ञानिकों के समूह ने तय किया था कि यह सबसे ज्यादा रिस्क जोन में हैं, इसलिए सबसे पहले इनको टीका लगाया जाए। हालांकि बीच में यह निर्देश आया कि 18 साल से 44 साल की उम्र के लोगों को भी एक मई से टीका लगाया जाना है लेकिन उस वक्त हमारे पास उतने टीके नहीं थे।

डॉक्टर एनके अरोड़ा का कहना है कि 'वैक्सीन प्रिजर्वेशन' के तहत हम लोगों को कुछ ऐसा करना था, जिससे मरीजों की जान भी जोखिम में ना पड़े और टीका बच जाए। डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि जिन लोगों को कोविड हो चुका है और वह रिकवर कर रहे हैं उनके अंदर प्राकृतिक तरीके से एंटीबॉडीज बन जाती है। ऐसे में अगर तीन महीने बाद उन लोगों को टीका लगाया जाएगा, तब भी वह लोग सुरक्षित रहेंगे। यह फैसला लिया गया कि जिन लोगों को कोविड हुआ है वे तीन महीने बाद ही टीका लगवा सकते हैं।

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हालांकि एक चर्चा यह भी बनी हुई है कि कोविशील्ड की डोज का जो समय अंतराल बढ़ाया गया है उससे भी वैक्सीन की डोज़ को बचाया जा रहा है। हालांकि इस मामले पर डॉक्टर एनके अरोड़ा पूरी तरीके से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से वैक्सीन की डोज देने के बाद शरीर में बनने वाली एंटीबॉडीज को देखा गया। उसके बाद ही इस नतीजे पर पहुंचा गया कि कोविशिल्ड वैक्सीन की पहली डोज़ के बाद 3-4 महीने का अंतराल ही जरूरी है। हालांकि तकनीकी रूप से ऐसा होने पर वैक्सीन की डोज निश्चित तौर पर बचेगी और जरूरतमंद को पहली डोज लग सकेगी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक देश में वैक्सीन उत्पादन की गति बहुत बढ़ा दी गई है। उनका कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने तय किया है कि पूरे देश की आबादी से ज्यादा वैक्सीन हमारे पास अगले कुछ वक्त में तैयार हो जानी चाहिए। ऐसी दशा में वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां लगातार काम कर रही हैं। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर हम अपने लक्ष्य को वक्त पर पा लेंगे और पूरे देश को कोरोना की जंग में वैक्सीन लगवाकर जीवन बचाएंगे।

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