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घर के बजट पर महंगाई की मार, यहां जानिए पेट्रोल-गैस की बढ़ी कीमतों के कारण कितना अतिरिक्त चुका रहे हैं आप

Wed, 03 Mar 2021 04:18 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 03 Mar 2021 04:18 PM IST
सार

  • एक जनवरी से एक मार्च 2021 के बीच गैस प्रति सिलिंडर 125 रुपये, पेट्रोल पर प्रति लीटर 7.46 रुपये और सब्जियों-दालों के दामों में 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई
  • निम्न-मध्यम परिवार पर 1200 से 1500 रुपये और उच्च मध्यम वर्ग पर 3000 से 3500 रुपये की महंगाई की मार बढ़ी

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Due to hike of Petrol Diesel and Gas Cylinder prices inflation rise which is affected on common men income
पेट्रोल-डीजल - फोटो : iStock

विस्तार

एक जनवरी से एक मार्च 2021 के बीच पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसके कारण सब्जियों, फलों, दालों और अनाजों के दामों में भी बीस से तीस फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इसका असर सीधे आम आदमी के घर के बजट पर पड़ रहा है। अनुमान है कि इन बढ़ती कीमतों से दिल्ली में रहने वाले एक सामान्य परिवार पर प्रति महीने 1200 से 1500 रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ा है। वहीं मध्यम आय वर्ग के लोगों पर भी तीन से 3500 हजार रुपये प्रति महीने तक का भार बढ़ा है।

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अभिनव शर्मा एक प्राइवेट कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का काम करते हैं। कंपनी के काम के लिए अलग-अलग दिनों में उन्हें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद या गुरुग्राम तक जाना पड़ता है। वे रोजाना लगभग सौ किलोमीटर मोटरसाइकिल चलाते हैं। एक औसत मोटरसाइकिल 40 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज देती है और इस प्रकार प्रतिदिन उनकी पेट्रोल की खपत 2.5 लीटर के लगभग रहती है।
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एक जनवरी 2021 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 83.71 रुपये प्रति लीटर थीं, जो आज 91.17 रुपये तक पहुंच चुकी हैं। पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 7.46 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस प्रकार प्रतिदिन 18 से 19 रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है। मासिक तौर पर यह 550-560 रुपये के करीब बैठता है। यानी मोटरसाइकिल से चलने वाले एक औसत परिवार को पेट्रोल पर प्रति महीने 500-550 रुपये अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है।
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गौरव त्यागी लक्ष्मी नगर में रीयल एस्टेट का बिजनेस करते हैं। उनकी इनोवा कार में एक बार में लगभग 60 लीटर पेट्रोल आता है। वे हर हफ्ते एक बार टंकी पूरी भराते हैं और लगभग पूरे हफ्ते उनका काम चल जाता है। पेट्रोल की कीमतों में 7.46 रुपये की बढ़ोतरी के हिसाब से उन्हें हर हफ्ते 450 रुपये अतिरिक्त चुकाना पड़ रहा है। प्रति माह यह 1800-2000 रुपये अतिरिक्त पड़ रहा है।

सब्जियों-दालों की कीमतों पर भी असर

पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर सब्जियों और अनाजों के दामों पर भी पड़ने लगा है। डीजल कीमतों में बढ़ोतरी से ट्रक माल भाड़े में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे महाराष्ट्र, पुणे, नागपुर, नासिक की मंडियों से आने वाली प्याज तीस रुपये प्रति किलो से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है। बाकी सब्जियों में भी 20 से 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। मसूर दाल की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तो तूर दाल की कीमतों में 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा असर खाद्य तेलों पर पड़ रहा है जिनकी कीमतों में 30 से 60 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। सब्जियों-दालों की बढ़ी कीमतों के कारण प्रति परिवार पर औसतन 500 रुपये प्रति माह तक का अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

गैस कीमतों में 125 रुपये तक की वृद्धि

एक जनवरी 2021 को दिल्ली में 14.2 किलो वाले नॉन-सब्सिडाइज्ड गैस सिलिंडर की कीमत 694 रुपये थी, जो आज बढ़कर 819 रुपये हो चुकी है। पति-पत्नी और दो बच्चों वाले एक औसत परिवार में प्रति महीने एक सिलंडर की खपत होती है। इस प्रकार गैस की बढ़ी कीमतों के कारण प्रत्येक परिवार पर 125 रुपये तक की मार पड़ी है।

औसतन कुल कितना पड़ा असर

गैस पर प्रति माह 125 रुपये, सब्जियों-दालों पर 500-550 रुपये और पेट्रोल पर लगभग 500 रुपये का अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। यह लगभग 1200 रुपये प्रति माह बैठता है। थोड़ा अतिरिक्त खर्च वाले परिवार में यह खर्च 1500 रुपये अतिरिक्त तक पड़ रहा है। वहीं, कार से चलने वाले एक मध्यम वर्गीय परिवार पर प्रति महीने तीन से 3500 रुपये अतिरिक्त का खर्च पड़ रहा है।

क्या कहती हैं गृहणियां

पेशे से एक शिक्षक गीता श्रीवास्तव का कहना है कि कोरोना काल में पति की नौकरी छूट गई थी। लगभग डेढ़ महीने पहले उनके पति को एक प्राइवेट कंपनी में काम मिला है। लेकिन अभी भी घर का बजट बिगड़ा हुआ है। इस महंगाई के कारण उनके घर की हालत खराब हो गई है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।

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