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जलवायु परिवर्तन: आसमान में हवाई जहाजों को लगेंगे तेज झटके, यात्रियों की सुरक्षा होगी प्रभावित
Sun, 14 Sep 2025 04:39 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 14 Sep 2025 04:39 AM IST
सार
शोध में दावा किया गया है कि जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ेगा, 35,000 फीट की ऊंचाई पर बहने वाली जेट स्ट्रीम और अस्थिर हो जाएंगी और इसकी वजह से एअर टर्बुलेंस के कारण तेज झटके लगेंगे। इस अस्थिरता से विमान की ऊंचाई अचानक बदल सकती है, जिससे यात्रियों को जोरदार झटके लगते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन के चलते हवाई जहाजों को गंभीर टर्बुलेंस (अशांत हवाओं के झटके) का सामना पहले से कहीं ज्यादा करना पड़ेगा। इससे यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित होगी और एयरलाइंस को अपने परिचालन ढांचे और तकनीक में बड़े बदलाव करने होंगे।
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यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग (ब्रिटेन) के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन जर्नल ऑफ द एटमॉस्फेरिक साइंसेज में प्रकाशित हुआ है। शोध में दावा किया गया है कि जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ेगा, 35,000 फीट की ऊंचाई पर बहने वाली जेट स्ट्रीम और अस्थिर हो जाएंगी और इसकी वजह से एअर टर्बुलेंस के कारण तेज झटके लगेंगे। इस अस्थिरता से विमान की ऊंचाई अचानक बदल सकती है, जिससे यात्रियों को जोरदार झटके लगते हैं। कई बार यात्री सीट से ऊपर उछल सकते हैं और गंभीर चोटें लग सकती हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि सबसे गंभीर परिदृश्य में 2050 तक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन दोगुना होने की आशंका है और 2100 तक औसत वैश्विक तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इसका असर उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्धों में उड़ने वाले विमानों पर पड़ेगा और यात्रियों को कई बार बेहद असामान्य झटकों का सामना करना पड़ेगा।
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नई तकनीक अपनाने की जरूरत
अध्ययन करने वाले प्रोफेसर पॉल विलियम्स का कहना है कि हाल के वर्षों में टर्बुलेंस के कारण यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं और कुछ मामलों में मौतें भी हुई हैं। पायलटों को अधिक समय तक सीटबेल्ट संकेत चालू रखने और उड़ानों के दौरान केबिन सर्विस रोकनी पड़ सकती है। एयरलाइंस को अब नई तकनीक अपनाने की जरूरत है जो टर्बुलेंस को पहले से पहचान सके।
गंभीर टर्बुलेंस की परिभाषा
जब विमान का ऊपर-नीचे झटका शरीर पर 1.5 जी-फोर्स से अधिक दबाव डालता है तो उसे गंभीर टर्बुलेंस माना जाता है। यह ताकत इतनी ज्यादा होती है कि बिना सीटबेल्ट वाला यात्री सीट से ऊपर उछल सकता है। मौतें भले ही कम होती हैं, लेकिन गंभीर चोटें यह बताती हैं कि विमानों की सुरक्षा के लिए अब इंजीनियरिंग आधारित समाधान जरूरी हैं। जी-फोर्स किसी वस्तु या शरीर पर लगने वाले गुरुत्वाकर्षण बल का माप है। सामान्य स्थिति में जब हम जमीन पर खड़े होते हैं, तब हम 1जी का गुरुत्वाकर्षण बल अनुभव करते हैं।
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वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) पहले ही एयरलाइंस को चेतावनी दे चुका है कि उड़ानों में टर्बुलेंस की घटनाएं बढ़ रही हैं। अब यह संस्था एयरलाइंस को टर्बुलेंस मैपिंग टेक्नोलॉजी और पायलट प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान देने की सलाह दे सकती है। यूरोपियन यूनियन एवियशन सेफ्टी एजेंसी (ईएएसए) ने अपने हालिया दिशा-निर्देशों में कहा है कि बदलते मौसम पैटर्न को देखते हुए विमानों की डिजाइन और सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने की जरूरत है।