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Drug Flow: पाकिस्तान-अफगानिस्तान रूट से बढ़ रही नशीले पदार्थ की तस्करी, देश में आतंकी फंडिंग का खतरा गहराया

Fri, 17 Apr 2026 02:18 PM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Fri, 17 Apr 2026 02:18 PM IST
सार

भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर चिंता बढ़ गई है, खासकर पाकिस्तान-अफगानिस्तान के गोल्डन क्रिसेंट से आने वाले ड्रग्स के कारण, जो कुल तस्करी का करीब 65% हैं और इन्हें आतंकी फंडिंग से जोड़ा जा रहा है। आइए विस्तार से जानते हैं। 

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Drug trafficking is increasing through the Pakistan-Afghanistan route, raising the threat of terrorist funding
नशीले पदार्थ की तस्करी - फोटो : IANS

विस्तार

भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। ताजा इनपुट के अनुसार, पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र यानी गोल्डन क्रिसेंट से होने वाली तस्करी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिसे आतंकवादी गतिविधियों की फंडिंग से जोड़कर देखा जा रहा है।

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गोल्डन क्रिसेंट बना बड़ा खतरा

गोल्डन क्रिसेंट से आने वाले ड्रग्स का नेटवर्क भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, देश में आने वाले कुल नशीले पदार्थों में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी इसी क्षेत्र की है। इस इलाके से मुख्य रूप से चरस और मेथामफेटामाइन जैसे ड्रग्स भारत में तस्करी के जरिए पहुंचाए जा रहे हैं। पाकिस्तान स्थित नेटवर्क इन गतिविधियों को तेज कर रहे हैं, ताकि भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटाया जा सके।

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दक्षिण भारत तक फैल रहा नेटवर्क

  • पहले तस्करी का फोकस उत्तर भारत तक सीमित था, लेकिन अब इसका विस्तार दक्षिण भारत तक हो चुका है।
  • ड्रग्स पहले गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में पहुंचाए जाते हैं, इसके बाद इन्हें केरल और तमिलनाडु तक भेजा जाता है।
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इसके बाद अतिरिक्त मात्रा को मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों तक भी पहुंचाया जाता है, जिससे यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल रहा है।

गोल्डन ट्रायंगल भी सक्रिय

गोल्डन ट्रयंगल (म्यांमार, लाओस, थाईलैंड) से संचालित नेटवर्क पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय हैं। एजेंसियों का कहना है कि दोनों नेटवर्क गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्रायंगल- आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

तस्करी के नए तरीके

तस्कर अब पारंपरिक तरीकों के अलावा नई रणनीतियां अपना रहे हैं-

  • हाई-स्पीड मोटर बोट्स और छोटी मछली पकड़ने वाली नावें का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • कमर्शियल शिपिंग कंटेनर के जरिए बड़ी खेप भेजी जा रही है। 
  • इन तरीकों से तस्करी का दायरा और मात्रा दोनों बढ़ाने की कोशिश हो रही है।

एजेंसियों की सख्ती और समन्वय

इन बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो, राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठनऔर भारतीय नौसेना के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई है। उसमें यह निम्न निर्णय लिए गए;

  • समुद्री निगरानी और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा।
  • मल्टी-एजेंसी ऑपरेशन के जरिए नेटवर्क को तोड़ा जाएगा।

 

सरकार का कड़ा रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ड्रग-फ्री बनाने का लक्ष्य स्पष्ट किया है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने सभी विभागों को 2029 तक रोडमैप तैयार करने और समयबद्ध समीक्षा तंत्र लागू करने के निर्देश दिए हैं। अगले तीन वर्षों में देशव्यापी अभियान चलाने की भी योजना है।

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