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नशे की खेप: ‘एनसीबी’ कैसे पकड़े 21000 हजार करोड़ रुपये की हेरोइन, 'सिपाही' से 'डीजी' तक के पद पड़े हैं खाली

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 22 Sep 2021 04:45 PM IST
सार

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, आखिर क्या कारण है कि पिछले 18 महीने में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का कोई पूर्णकालिक महानिदेशक नहीं बनाया जा सका। ये सबसे महत्वपूर्ण विभाग है, जो मादक पदार्थों पर निगरानी रखता है। डेढ़ साल तक कोई पूर्णकालिक महानिदेशक न होना, सवाल खड़े करता है...

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Drug Smuggling in India: Many posts are vacant in Narcotics control bureau from DG to Sepoy
नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो - फोटो : PTI (File Photo)

विस्तार

गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई 21 हजार करोड़ रुपये की 'हेरोइन' ने खलबली मचा रखी है। अफगानिस्तान से ईरान के बंदरगाह होते हुए गुजरात पहुंची 'नशे' की खेप को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पकड़ लिया। कई लोगों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। वैसे यह काम तो नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) का है। उसे गुजरात में 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़नी चाहिए थी। सामान्य जांच के दौरान 'डीआरआई' ने मामला पकड़ लिया।

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कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा कहते हैं कि मुंबई में सिनेमा जगत के सितारों के यहां छापे मारकर दस ग्राम-बीस ग्राम नशा बरामद कर सुर्खियां बटोरने वाली 'एनसीबी' को स्थायी डीजी क्यों नहीं मिल रहा। एनसीबी में सिपाही, ड्राइवर, इंटेलिजेंस अफसर, डीडीजी, डीडी/जेडडी से लेकर डीजी' तक के पद खाली पड़े हैं। 18 माह से ब्यूरो में स्थायी डीजी नहीं है। केंद्र में दर्जनों 'आईपीएस' डीजी और एडीजी रैंक की इम्पैनल सूची में शामिल हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी, यशोवर्धन आजाद कहते हैं, जब आईपीएस मौजूद हैं तो सरकार ने डेढ़ साल से इतने अहम पद को खाली क्यों रखा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसका जवाब देना चाहिए। आखिर केंद्र सरकार, इस पद के लिए 'पसंदीदा' आईपीएस ही क्यों चाहती है। मौजूदा डीजी स्तर के आईपीएस को मौका दिया जाए।
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एनसीबी में डीजी सहित अधिकांश पदों को प्रतिनियुक्ति के जरिए भरा जाता है। हैरानी की बात है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनसीबी ने नौ सितंबर को अपनी वेबसाइट पर डीजी का पद भरने के लिए सर्कुलर जारी किया था। उसमें डीजी के पद के लिए तमाम योग्यताओं की जानकारी दी गई। आयु सीमा भी 58 साल रखी गई। इतना ही नहीं, अब डीजी के पद को पे-मेट्रिक्स 16/17 में अपग्रेड कर दिया गया है। इसके बावजूद कोई आईपीएस यहां नहीं आना चाहता। खास बात ये है कि 11 जून व 16 जून को भी केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ऐसा ही सर्कुलर जारी किया गया था। उसके बाद भी गृह मंत्रालय को पसंदीदा आईपीएस नहीं मिल सका। अब इस पद को भरने के लिए आवेदन देने की अंतिम तिथि को अक्तूबर तक बढ़ा दी गई। सूत्रों का कहना है कि अधिकांश आईपीएस, इस पद के लिए आवेदन ही नहीं करना चाहते। वजह, एनसीबी में सदैव स्टाफ की तंगी चलती रहती है। नशे के सौदागारों से निपटने के लिए कई जरूरी तकनीक उपकरण भी विभाग के पास नहीं हैं। रेड के दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप रहता है।
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डीजी पद के लिए आवेदन देने वाले आईपीएस के पास विशेषकर आर्थिक अपराध के मामलों में जांच पड़ताल का आठ साल का अनुभव होना चाहिए। पिछले 18 माह से डीजी के पद को किसी दूसरे बल में तैनात आईपीएस, अतिरिक्त कार्यभार के तौर पर संभालते रहे हैं। राकेश अस्थाना के दिल्ली पुलिस आयुक्त बनने के बाद 29 जुलाई 2021 को एनडीआरएफ के डीजी एसएन प्रधान को एनसीबी डीजी का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। एनसीबी में वित्त से जुड़े मामलों की जांच के लिए वित्तीय विश्लेषक और एक्सपर्ट कंसलटेंट का पद खाली पड़ा है। डिप्टी डायरेक्टर 'डीडीजी' का पद भरने के लिए जनवरी 2021 में सर्कुलर जारी किया गया था। जोनल डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति करने के लिए 16 अप्रैल को बाकायदा रोजगार समाचार में विज्ञापन दिया गया। जेडडी के लिए चार साल के अनुभव की योग्यता रखी गई है। असिटेंट डायरेक्टर के पद के लिए चार सितंबर 2020 को वैकेंसी निकाली गई थी। वह पद भी खाली पड़ा है। एनसीबी में डीजी के पद को छोड़कर नीचे के पदों के लिए पांच से सात साल की प्रतिनियिुक्ति अवधि रखी गई है।

नशे के सौदागरों का पता लगाने एवं इंटेलिजेंस जुटाने के लिए सर्विलांस असिस्टेंट के दो पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। 18 अगस्त को दो पद भरने के लिए सर्कुलर जारी किया गया। इसके अतिरिक्त स्टेनो ग्रेड वन, ग्रुप सी के तहत आने वाले 21 सिपाही के पद भी सात-आठ माह से खाली पड़े हैं। खास बात ये है कि इन पदों के लिए आयु सीमा भी 56 साल रखी गई है। स्टाफ कार चालक के सात पद खाली हैं। स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर और 93 जूनियर इंटेलिजेंस अफसरों के पद खाली पड़े हैं। जुलाई 2021 से 10 इंटेलिजेंस अफसरों के पद नहीं भरे जा सके हैं। यहां बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 19 अगस्त को एडीजी रैंक में 14 आईपीएस को इम्पैनलमेंट सूची में शामिल किया था। छह सितंबर को दो आईपीएस मुकुल गोयल और वीके भावरा को केंद्र में डीजी या उसके समकक्ष इम्पैनल किया गया। 11 फरवरी को 29 आईपीएस को डीजी एवं उसके समकक्ष पदों के लिए इम्पैनल किया था। इसी साल चार फरवरी को 13 आईपीएस को एडीजी या उसके समकक्ष पदों के लिए इम्पैनल किया गया था। पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद कहते हैं, जब इतनी संख्या में योग्य आईपीएस मौजूद हैं तो सरकार को उनमें से किसी अधिकारी को डीजी नियुक्त करना चाहिए था। ये सरकार की गलती है। स्थायी डीजी न होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर असर पड़ता है।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, आखिर क्या कारण है कि पिछले 18 महीने में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का कोई पूर्णकालिक महानिदेशक नहीं बनाया जा सका। ये सबसे महत्वपूर्ण विभाग है, जो मादक पदार्थों पर निगरानी रखता है। डेढ़ साल तक कोई पूर्णकालिक महानिदेशक न होना, सवाल खड़े करता है। क्या केंद्र सरकार ने नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को अपनी खुदरा राजनीति का माध्यम बना दिया है। रणदीप सुरजेवाला ने इस बाबत बुधवार को पीएम मोदी से सवाल पूछे हैं। 1,75,000 करोड़ रुपये की 25,000 किलो ड्रग्स कहां गई, नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, डीआरआई, ईडी, सीबीआई, आईबी, क्या सोए पड़े हैं या फिर उन्हें मोदी जी के विपक्षियों से बदला लेने से फुर्सत नहीं है। क्या यह सीधे-सीधे देश के युवाओं को नशे में धकेलने का षड़यंत्र नहीं। क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं, क्योंकि यह इस ड्रग्स के तार तालिबान और अफगानिस्तान से जुड़े हैं। क्या ड्रग माफिया को सरकार में बैठे किसी सफेदपोश का और सरकारी एजेंसियों का संरक्षण प्राप्त है। अडानी मुंद्रा पोर्ट की जांच क्यों नहीं की गई। क्या प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार, देश की सुरक्षा में फेल नहीं हो गए हैं। क्या ऐसे में पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज का कमीशन बना कर जांच नहीं होनी चाहिए।

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