फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Drug for Coronavirus, this is the process of making it, Corornavirus cases in india

कोरोना वायरस की दवा ढूंढ रही पूरी दुनिया, यह है उसे बनाने की प्रक्रिया

Tue, 17 Mar 2020 11:06 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Tue, 17 Mar 2020 11:06 PM IST
विज्ञापन
Drug for Coronavirus, this is the process of making it, Corornavirus cases in india
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोनावायरस की दवा बनाने के लिए दुनियाभर में कोशिशें चल रही हैं। इस बीच अमेरिका में जेनिफर हॉलर नामक एक महिला को इंजेक्शन लगाकर बनाई जा रही दवा का मानव परीक्षण किया गया है। इससे पहले इस्राइल की सरकार ने दावा किया था कि कुछ ही हफ्तों में वह कोरोना से लड़ने वाली दवा तैयार कर लेगी और बाजार में उपलब्ध करा देगी। परंतु बड़ा सवाल यह है कि आखिर दवा कैसे बनाई जाती है, दवा बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या है?

विज्ञापन


क्या है दावे

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए दवा बनने में करीब दो साल तक का समय लग सकता है। इस वायरस की दवा खोजने के लिए दुनियाभर में युद्धस्तर पर शोधकार्य जारी हैं। पिछले दिनों इस्राइल के द येरूशलम पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसके देश की सरकार जल्द ही दवा बना लेगी।
विज्ञापन


इस रिपोर्ट में इस्राइल के द गैलिली रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक के हवाले से कहा गया था कि वह पिछले चार साल से इंफेक्शस ब्रोंकाइटिस वायरस (आईबीवी) की दवा बनाने के लिए शोध कर रहे थे। ब्रोन्कियल बीमारी मुर्गियों में होती है। इसकी दवा तैयार कर ली गई है। वेटनरी इंस्टीट्यूट में प्री-क्लीनिकल ट्रायल के बाद इसे सरकार ने भी पास कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोरोना के इलाज में कारगर

इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. चेन कट्ज ने बताया था कि उनकी बनाई दवा विशेष प्रकार के वायरस के इलाज में कारगर है। इसमें ऐसे प्रोटीन हैं जो मांसपेशी के ऊतकों में एंटीजेन का निर्माण करते हैं। इससे शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार होता है। 

उन्होंने कहा था कि आईबीवी की दवा तैयार करने में सफलता हासिल होने के क्रम में कोरोना वायरस पर परीक्षण शुरू किए गए। कोरोना के डीएनए की जांच से पता चला कि यह मुर्गियों में मिलने वाले वायरस से काफी हद तक समानता रखने वाला है। ऐसे में तैयार दवा को अब नए क्रम में रखकर तकनीक परीक्षण कर कोरोनावायरस की दवा तैयार की जा रही है। डॉ. चेन ने कहा कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह भी तैयार हो जाएगी और वैज्ञानिक ही इसे बड़े पैमाने पर तैयार करेंगे।

क्या है दवा बनाने की प्रक्रिया?

  • फूड एवं ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के मुताबिक किसी दवा को बनाने और स्वीकृत होने में सालों का वक्त लग जाता है।
  • दवा के स्वीकृत होने से पहले उसे प्रयोगशाला में कई परीक्षणों से गुजरना होता है। इस प्रक्रिया में प्रयोगशाला में फेज वन में सबसे पहले क्लीनिकल ट्रायल होते हैं। इस दौरान अलग-अलग तरह के रसायनों को मिलाकर दवा के तौर पर इस्तेमाल कर जांचा जाता है कि वह फॉर्मूला कारगर है या नहीं।
  • इसके बाद फेज टू में जब फॉर्मूला बनकर तैयार हो जाता है तो उसे टेस्ट के लिए पहले जानवरों पर इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान फॉर्मूले के पूरी तरह कारगर होने की दर देखी जाती है। साथ ही दवा से होने वाले दुष्प्रभावों को जांचा जाता है।
  • जानवरों पर परीक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि इसका इस्तेमाल इंसानों के लिए सुरक्षित रहेगा या नहीं। इसके बाद फेज थ्री में फिजीशियन और वैज्ञानिक दवा पर हुए रिसर्च की समीक्षा करते हैं, फिर इन पर सूचनाओं के लेबल लगाए जाते हैं कि दवा का इस्तेमाल कैसे करना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed