सूखे और दाल की कीमतों ने बढ़ाई केंद्र सरकार की चिंता
देश के 33 करोड़ लोगों पर पड़ रही सूखे की मार और आम आदमी की थाली से गायब हो रहे दाल को लेकर केंद्र सरकार बेहद चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सरकार ने इन दोनों ही मुद्दों पर गहरा मंथन किया।
दाल की बढ़ती कीमतों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने राज्यों से जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। तो सूखे के संकट का वह स्थाई समाधान निकालने में जुटी है। लेकिन इन दोनों ही मामलों पर सरकार के हाथ राज्यों की वजह से तंग हैं। सूखे की समस्या हो या दाल की बढ़ती कीमतें दोनों ही मामलों में राज्यों की बेरूखी से केंद्र सरकार बेबस नजर आ रही है।
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का कहना है कि सूखे पर कैबिनेट में मंथन के बावजूद सरकार ने कुछ बड़ा ऐलान इसलिए नहीं किया है कि मामला न्यायालय में है। सरकार के रणनीतिकारों को लगता है कि कहीं कोर्ट न उसे लपेट दें। 23 अप्रैल को सूखे पर न्यायालय के रूख को सुनने के बाद सरकार अपने पत्ते खोलेगी। तो दाल के मामले पर भी सरकार इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकती है।
खाद्य एवं नागरीक आपूर्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दाल की कीमतें रोकने के लिए जो भी कदम हो सकते थे सरकार ने उठा लिए हैं। राज्यों का सहयोग नहीं मिल रहा है। उक्त अधिकारी का कहना है कि दाल की मांग पूरी करने के लिए सरकार ने पिछली बार विदेशों से 5000 टन दाल का आयात किया था। उसमें से 500 टन अब भी एमएमटीसी के पास पड़ा है।
दाल उठाने में राज्य रूची नहीं दिखा रहे हैं। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्र ने बीते दिनों राज्यों के मुख्यसचिवों से बात की तब जाकर 4500 मिट्रिक टन दाल केंद्र से उठ सकी है। इसमें भी आंध्रप्रदेश और तमिलनाडू सरीखे राज्यों ने विशेष रूचि दिखाई।
केंद्र ने राज्यों से अब भी दाल की खपत का अनुमान बताने को कहा है। लेकिन राज्यों ने बेरूखी दिखाई है। बावजूद उसके केंद्र सरकार ने आम आदमी की राहत के लिए सीधे मंडियों से 50000 टन दाल उठा रखा है। तो 25000 हजार टन आयात के जरिए जुटाने के प्रयास किए है। नीजि कंपनियों ने भी 500000 टन दाल आयात किए हैं। राज्यों के जरिए केंद्र से दाल न उठाने के वजह पर उक्त अधिकारी ने कहा कि एक तो मामला सियासी है।
तो दूसरी वजह है कि राज्यों के पास वितरण का नेटवर्क नहीं है। पिछले वर्ष केंद्र सरकार ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में मदर डेयरी और केंद्रीय भंडार के जरिए दाल बांटा। अगर राज्य चाहें तो पीडीएस के जरिए आम आदमी तक सस्ता दाल पहुंचा सकते हैं।
सूखे से निपटने के मामले में भी राज्यों की स्थिति कुछ ऐसी ही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि सूखे की मार झेल रहे राज्यों का आलम है की उन्होंने पेयजल की व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (एनआरडीडब्ल्यूपी) के तहत भेजे गए रकम को खर्च नहीं किया है।
12 राज्यों के पास बीते वर्ष का 1720.17 करोड़ अब भी बकाया है। इसमें उन राज्यों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा हैं जहां कि सूखे की मार बड़ी है। उत्तरप्रदेश ने इस योजना का 332.72 करोड़, महाराष्ट्र ने 322.73 करोड़, कर्नाटक ने 199.83 करोड़, बिहार ने 123.22 करोड़ और हरियाणा ने 81.6 करोड़ खर्च नहीं किए हैं।
दाल की बढ़ती कीमतों और सूखे की मार पर कैबिनेट में सरकार के मंथन बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी स्वीकार किया है कि दाल की कीमतें पिछले वर्ष से कम हैं। लेकिन अब भी महंगी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष दाल की कीमतें ठंडी हैं। बावजूद उसके दाम उंचे हैं। जावड़ेकर ने कहा कि दाल की कीमतों को लेकर सरकार निगरानी कर रही है।
राज्य सरकारों से भी कहा गया है कि वो दाल जमाखोंरो के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। पिछली सरकार ने दाल उत्पादन बढ़ाने को लेकर कुछ नहीं किया। हमारी सरकार ने योजना बनाई है। जिससे दाल का उत्पादन बढ़ेगा। इसके अलावा सरकार ने दाल का आयात कर इसकी कीमत को कम रखने का प्रयास किया है।
तो सूखे की समस्या पर जावडेकर ने कहा है कि सरकार तत्काल और दिर्घअवधि दोनों ही तरह के कदम उठा रही है। ताकि लोगों को राहत मिलने के साथ-साथ इसका स्थाई समाधान निकल सके। सूखे से प्रभावित इलाकों में जरूरी चीजों को सरकार वहां पहुंचा रही है।
भारत में दाल की स्थिति
देश में लगभग 185 लाख टन दाल का उत्पादन होता है। जबकि घरेलू खपत 220 लाख टन के आसपास है। मांग पूरी करने के लिए हर साल 35-37 लाख टन दाल आयात करना पड़ता है। खाद्य एवं नगारीक आपूर्ति मंत्रालय का आंकड़ा भी दर्शाता है कि दाल की कीमतें बढ़ी हैं।
सरकार के अनुसार खुदरा बाजार में दाल का प्रति किलो आज का भाव उड़द177, तूर 163, मूंग 123, मसूर 105 और चना 85 रूपये किलो। जबकि पिछले महीने की दर उड़द 172, तूर 160, मूंग 122, मसूर 98 और चना 75 रूपए किलो था।
वैसे दाल के थोक कारोबारी भी सभी दालों में तेजी का रुख बता रहे है। थोक भाव में अरहर 145-150 रुपये प्रति किलोग्राम, उड़द 175 रुपये प्रति किलोग्राम, मसूर 80 रुपये प्रति किलोग्राम तो चना 57 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर हैं। उड़द दाल के खुदरा भाव 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक जाने की आशंका है।
सूखे से निपटने के लिए सरकार के प्लान
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा की 38,500 करोड़ में 19,555 करोड़ राशि राज्यों को दे दी है। देश में 5 लाख कुएं खुदवाने का निर्णय, तालाब और पोखरों की होगी खुदाई, नदी जोड़ो अभियान होगा तेज, पीएम सिंचाई योजना के तहत अगले 5 साल में 50000 करोड़ खर्च की योजना, खेती के लिए उन्नत बीज एवं तकनीक पर जोर