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DRDO: डीआरडीओ ने विकसित किया अनमैन्ड एरियल व्हीकल, चीन के खिलाफ बढ़ेगी सेना की ताकत
Fri, 06 Jan 2023 08:16 PM IST
नितिन गौतम
नई दिल्ली
नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 06 Jan 2023 08:16 PM IST
सार
DRDO: सीमा पर चीन से तनातनी के बीच डीआरडीओ ने एक ऐसा यूएवी विकसित किया है, जिसकी मदद से 5 से 25 किलो भार का सामान आसानी से हिमालय के ऊंचे इलाकों में पहुंचाया जा सकेगा। इस यूएवी की मदद से दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी भी की जा सकेगी।
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DRDO UAV
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
भारत और चीन (India China Tension) की सेनाएं लंबे समय से सीमा पर तैनात हैं और दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। इस तनातनी के बीच भारत के लिए अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल डिफेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गेनाइजेशन यानी कि डीआरडीओ (DRDO) ने अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) विकसित करने में सफलता हासिल कर ली है। इस यूएवी के विकसित होने से भारतीय सेना (Indian army) को हिमालय क्षेत्र में लॉजिस्टिक ऑपरेशन चलाने में बड़ी मदद मिलेगी। यह अनमैन्ड एरियल व्हीकल 5 किलो भार लेकर उड़ान भर सकता है और साथ ही जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी भी कर सकता है।
बीते दिनों नागपुर में आयोजित हुई 108वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में इस यूएवी को प्रदर्शित किया गया था। फिलहाल डीआरडीओ ने इस मल्टी कॉप्टर पेलोड के सिक्किम में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर सफल ट्रायल किए हैं। दो और ट्रायल के बाद इस यूएवी को आर्म्ड फोर्सेस में शामिल कर लिया जाएगा। डीआरडीओ के अधिकारी महेश साहू ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ द्वारा विकसित यह यूएवी 5 से लेकर 25 किलो क्षमता का भार लेकर उड़ान भर सकता है। इस क्षमता को बढ़ाकर 30 किलो किए जाने पर काम चल रहा है।
इस यूएवी की विशेषता की बात करें तो यह 5 किलोमीटर दूर से तय जगह पर अपने आप पेलोड रिलीज कर सकता है और अपनी तय लोकेशन पर वापस आ सकता है। यह बिना किसी मानवीय क्षति के दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी भी कर सकता है। इस पेलोड का इस्तेमाल ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्र में जवानों के लिए दवाई पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। साथ ही यह यूएवी लैंडिंग एक्यूरेसी के साथ ही ग्राउंड व्हीकल फॉलो मोड और मॉड्यूलर डिजाइन से लैस है, जिससे युद्ध के दौरान यह यूएवी काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
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रेट साइबोर्ग बना रही यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी की टीम
डीआरडीओ की यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी की एक टीम खुफिया निगरानी और सुरक्षा बलों के रिकवरी ऑपरेशन में मदद के लिए रेट साइबोर्ग बना रही है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी के निदेशक पी. शिवप्रसाद ने यहां विश्व विज्ञान कांग्रेस के एक सत्र को संबोधित किया। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने कहा रेट साइबोर्ग के सिर पर कैमरे लगे होंगे और इलेक्ट्रॉनिक कमांड का उपयोग करके उन्हें निर्देशित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, यह पहली बार है जब भारत इस तरह की तकनीक विकसित करने में लगा है। कुछ अन्य देशों के पास यह पहले से ही है। यह खुफिया निगरानी और रिकवरी ऑपरेशन में सशस्त्र बलों की मदद करेगा। पहेल चरण के परीक्षण में रेट को कमांड के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा। दूसरे चरण में वैज्ञानिक वास्तव में रेट साइबोर्ग को ढूंढने के लिए सिर पर लगे कैमरे में छवियों को फीड कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल 26/11 जैसे आतंकी हमले जैसी स्थिति में हो सकता है, जहां होटल में 200 से अधिक कमरे थे।
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बीते दिनों नागपुर में आयोजित हुई 108वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में इस यूएवी को प्रदर्शित किया गया था। फिलहाल डीआरडीओ ने इस मल्टी कॉप्टर पेलोड के सिक्किम में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर सफल ट्रायल किए हैं। दो और ट्रायल के बाद इस यूएवी को आर्म्ड फोर्सेस में शामिल कर लिया जाएगा। डीआरडीओ के अधिकारी महेश साहू ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ द्वारा विकसित यह यूएवी 5 से लेकर 25 किलो क्षमता का भार लेकर उड़ान भर सकता है। इस क्षमता को बढ़ाकर 30 किलो किए जाने पर काम चल रहा है।
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इस यूएवी की विशेषता की बात करें तो यह 5 किलोमीटर दूर से तय जगह पर अपने आप पेलोड रिलीज कर सकता है और अपनी तय लोकेशन पर वापस आ सकता है। यह बिना किसी मानवीय क्षति के दुश्मन के ठिकानों पर बमबारी भी कर सकता है। इस पेलोड का इस्तेमाल ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्र में जवानों के लिए दवाई पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है। साथ ही यह यूएवी लैंडिंग एक्यूरेसी के साथ ही ग्राउंड व्हीकल फॉलो मोड और मॉड्यूलर डिजाइन से लैस है, जिससे युद्ध के दौरान यह यूएवी काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
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रेट साइबोर्ग बना रही यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी की टीम
डीआरडीओ की यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी की एक टीम खुफिया निगरानी और सुरक्षा बलों के रिकवरी ऑपरेशन में मदद के लिए रेट साइबोर्ग बना रही है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
यंग साइंटिस्ट लेबोरेटरी के निदेशक पी. शिवप्रसाद ने यहां विश्व विज्ञान कांग्रेस के एक सत्र को संबोधित किया। इसके बाद गुरुवार को उन्होंने कहा रेट साइबोर्ग के सिर पर कैमरे लगे होंगे और इलेक्ट्रॉनिक कमांड का उपयोग करके उन्हें निर्देशित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, यह पहली बार है जब भारत इस तरह की तकनीक विकसित करने में लगा है। कुछ अन्य देशों के पास यह पहले से ही है। यह खुफिया निगरानी और रिकवरी ऑपरेशन में सशस्त्र बलों की मदद करेगा। पहेल चरण के परीक्षण में रेट को कमांड के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा। दूसरे चरण में वैज्ञानिक वास्तव में रेट साइबोर्ग को ढूंढने के लिए सिर पर लगे कैमरे में छवियों को फीड कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल 26/11 जैसे आतंकी हमले जैसी स्थिति में हो सकता है, जहां होटल में 200 से अधिक कमरे थे।