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बालरोग विशेषज्ञों की सलाह: बच्चों में कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा नहीं, स्कूल खोलने की तैयारी करे सरकार

Tue, 20 Jul 2021 07:28 PM IST
संजीव कुमार झा अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 20 Jul 2021 07:28 PM IST
सार

बाल विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष से घरों में कैद बच्चों में मानसिक और शारीरिक समस्याएं बढ़ रही हैं। सरकार को सकारात्मक ढंग से उचित माहौल बनाकर स्कूल खोलने की तैयारी करनी चाहिए।

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Dr praveen makhija says The risk of corona infection in children is not high so the government should prepare to open the school
डॉ. प्रवीण मखीजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालरोग चिकित्सकों की अमेरिकी संस्था अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने दो साल से ऊपर के सभी बच्चों को स्कूल भेजे जाने के समय मास्क पहनना अनिवार्य किए जाने की सलाह दी है। संस्था ने कहा है कि अगर बच्चे को वैक्सीन की दोनों खुराक लग चुकी है तो भी उन्हें स्कूल जाने के समय मास्क पहनना अनिवार्य किया जाना चाहिए। वहीं, भारतीय बालरोग विशेषज्ञों ने कहा है कि बच्चे घरो में कैद हैं जिससे उनमें मानसिक परेशानियां बढ़ रही हैं। सरकार को उचित माहौल बनाकर स्कूल खोलने की तैयारी करनी चाहिए।

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मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में बालरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण मखीजा ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर में बहुत सीमित संख्या में ही बच्चे संक्रमित हुए। अगर कोरोना की तीसरी लहर आती है तो भी बच्चों के एक सीमित संख्या में ही संक्रमित होने की संभावना है। लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष से घरों में कैद बच्चों में मानसिक और शारीरिक समस्याएं बढ़ रही हैं। सरकार को सकारात्मक ढंग से उचित माहौल बनाकर स्कूल खोलने की तैयारी करनी चाहिए।
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डॉ. मखीजा के अनुसार पिछले डेढ़ साल से घरों में कैद बच्चों में शारीरिक और मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों के स्मार्ट फोन और लैपटॉप पर ज्यादा समय गुजारने से उनमें दृष्टि से संबंधित समस्याएं भी बढ़ रही हैं। स्मार्ट फोन का एडिक्शन बढ़ने से उनमें मनोवैज्ञानिक तौर पर गुस्सा और झुंझलाहट बढ़ने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों में इसका नकारात्मक असर भविष्य में भी देखना पड़ सकता है। उन्हें इसके नुकसान से बचाने के लिए जल्द से जल्द स्कूल खोलने पर विचार करना चाहिए। अपने सहपाठियों के बीच रहकर वे इन समस्याओं से तेजी से उबर सकेंगे।   
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बच्चे घर से बाहर निकल रहे
इस समय भी, जबकि स्कूल बंद हैं, बच्चे अपने माता-पिता के साथ बाहर निकल ही रहे हैं। वे बाजार, माल्स और घूमने की जगहों पर आ-जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को केवल स्कूल जाने से रोकना किसी भी तरह से तार्किक नहीं है। सरकार को स्कूल खोलने पर विचार करना चाहिए।

 कैसा हो स्कूल मॉडल
डॉ. प्रवीण मखीजा ने कहा कि अभी हमारे देश में लगभग 41.18 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। यह हमारी कुल आबादी की एक तिहाई से भी कम है। जहां तक संक्रमण से बचने के लिए सावधानी की बात है, बच्चों को घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनना अनिवार्य करना चाहिए। इससे वे कोरोना से ही नहीं, किसी अन्य किसी भी संभावित प्रदूषण से बचे रहेंगे।


 स्कूलों में पढ़ाई के लिए कमरे हवादार होना चाहिए। बच्चों के बीच शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए अल्टरनेट कक्षाएं लगाने, हफ्ते में दो या तीन दिन की कक्षाएं लगाने और कक्षाओं का लंबा समय करने की बजाय कुछ घंटे के लिए स्कूल खोलने पर विचार किया जाना चाहिए।

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