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ट्रायल का परिणाम: कोविशील्ड की पहली डोज डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ 61 फीसदी प्रभावी

Thu, 17 Jun 2021 12:26 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 17 Jun 2021 12:26 AM IST
सार

कोरोना वैक्सीन की दोनों खुराकों के बीच जो 12 से 16 हफ्तों का अंतर बढ़ाया गया है वो देश में किए गए ट्रायल के हिसाब से सही है। 

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dr. arora said first dose of Covishield is 61 per cent effective against corona delta variant
कोविशील्ड - फोटो : twitter@serum institute

विस्तार

देश में कोरोना की दूसरी लहर अब धीमी पड़ गई है। लेकिन वायरस अभी भी खत्म नहीं हुआ है। वैक्सीन की प्रक्रिया भी चल रही है। कोविशील्ड की खुराकों के अंतराल को लेकर बहस जारी है। डॉ. एन के अरोरा का कहना है कि देश में ट्रायल के बाद ही वैक्सीन की खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाया गया है।

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डॉ. एन के अरोरा केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरपर्सन हैं। उन्होंने बताया कि वैक्सीन की दोनों खुराकों के बीच जो 12 से 16 हफ्तों का गैप बढ़ाया गया है वो देश में किए गए ट्रायल के हिसाब सही है। डॉ. अरोरा के मुताबिक आंकड़ों के हिसाब से देखा गया है कि डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कोविशील्ड की पहली डोज 61 फीसदी प्रभावी है।
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एक न्यूज चैनल से बातचीत में डॉ. अरोरा ने कहा कि जब सरकार ने टीककरण कार्यक्रम की शुरुआत की थी उस वक्त दोनों खुराकों के बीच का गैप चार हफ्तों का था। वो भी ट्रायल के नतीजों के हिसाब से तय किया गया था, हमें पता चला था कि चार हफ्तों के अंतराल में इम्युन रिस्पॉन्स काफी अच्छा है।
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हालांकि, उस वक्त ब्रिटेन ने पहले ही इस गैप को बढ़ाकर 12 हफ्तों का कर दिया था। ये वो समय था जब यूके अल्फा वेरिएंट से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा था। दिसंबर- जनवरी उनके लिए काफी कठिन वक्त रहा है।

आगे डॉ. अरोरा ने बताया कि डेट के रिव्यू करने के बाद ही खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाया गया। पहले चार हफ्ते के अंतराल पर ही काम कर रहे थे। लेकिन डब्ल्यूएचओ ने दिए सुझावों के बाद ही छह से आठ हफ्ते का अंतराल बढ़ाया गया।

डॉ. अरोरा ने आगे कहा कि अप्रैल में पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने सुझाया कि 12 हफ्ते के अंतराल देने पर वैक्सीन 65 फीसदी से 80 फीसदी तक प्रभावी रहती है। ये वो समय था जब भारत डेल्टा वेरिएंट के प्रकोप से जूझ रहा था। 

डॉ. अरोरा ने बताया कि सीएमसी वेल्लोर ने अहम आंकड़ों और डेल्टा संक्रमण के दौरान हजारों केस को ध्यान में रखते हुए ये दिखाया कि कोविशील्ड की पहली डोज इस वेरिएंट के लिए 61 फीसदी और दोनों डोज के साथ 65 फीसदी प्रभावी है।


एनके अरोड़ा के मुताबिक अगर ऐसा पता चलता है कि टीके की खुराकों में अंतराल पर वर्तमान फैसला सही है तो हम इसे ही जारी रखेंगे। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग की एजेंसी ‘पब्लिक हैल्थ इंग्लैंड’ ने अप्रैल के अंतिम हफ्ते में आंकड़े जारी कर बताया था कि टीके की खुराक के बीच 12 हफ्ते का अंतराल होने पर इसकी प्रभावशीलता 65 से 88 फीसदी के बीच रहती है।

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