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Arunachal Pradesh: नए साल पर ऑल वेदर डबल लेन सेला टनल की सौगात, सुरंग का काम 98 फीसदी पूरा, सेना को मदद
Fri, 22 Dec 2023 06:07 AM IST
जलज मिश्रा
एन. अर्जुन, ईटानगर
एन. अर्जुन, ईटानगर
Published by: जलज मिश्रा
Updated Fri, 22 Dec 2023 06:07 AM IST
सार
वर्तमान में भारतीय सेना और स्थानीय लोग सेला दर्रे से तवांग पहुंचने के लिए बालीपारा-चारीदुआर रोड का उपयोग कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी के कारण सेला दर्रे भयंकर बर्फ जम जाती है। इससे रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है।
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सुरंग निर्माण
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
दुनिया की सबसे ऊंचाई पर बन रही सबसे लंबी सेला टनल (13,000 फुट) का काम लगभग पूरा हो गया है। डबल लेन वाली यह ऑल वेदर टनल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामिंग और तवांग जिले को जोड़ेगा। एलएसी तक पहुंचने वाला यह एकमात्र रास्ता है। माइनस 20 डिग्री तापमान में रात-दिन काम जारी है। 647 करोड़ की लागत से बन रही सुरंग का 98% काम पूरा हो चुका है।
बॉर्डर रोड आर्गेनाजेशन (बीआरओ) की देखरेख में बन रही यह सुरंग पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक का बेहतर उदाहरण है। सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों से निर्मित इस सुरंग के बनने से जहां प्रदेश के लोगों की राह आसान होगी, वहीं भारतीय सेना की तवांग सेक्टर में ताकत बढ़ेगी और वह बेहद कम समय में अग्रिम मोर्चे तक पहुंचेगी। माना जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी नए साल पर इसे देशवासियों को समर्पित कर सकते हैं।
सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
वर्तमान में भारतीय सेना और स्थानीय लोग सेला दर्रे से तवांग पहुंचने के लिए बालीपारा-चारीदुआर रोड का उपयोग कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी के कारण सेला दर्रे भयंकर बर्फ जम जाती है। इससे रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। पूरा तवांग सेक्टर देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। ऐसे में सेना का तवांग पहुंचना मुिश्कल हो जाता है। सेला दर्रा सुरंग मौजूदा सड़क को बायपास करेगी और यह बैसाखी को नूरानंग से जोड़ेगी। इसके साथ ही सुरंग सेला-चारबेला रिज से कटती है, जो तवांग को पश्चिम कामेंग जिले से अलग करती है।
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13,500 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर दो लेन में बनी दुनिया की सबसे लंबी सुरंग
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बॉर्डर रोड आर्गेनाजेशन (बीआरओ) की देखरेख में बन रही यह सुरंग पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक का बेहतर उदाहरण है। सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों से निर्मित इस सुरंग के बनने से जहां प्रदेश के लोगों की राह आसान होगी, वहीं भारतीय सेना की तवांग सेक्टर में ताकत बढ़ेगी और वह बेहद कम समय में अग्रिम मोर्चे तक पहुंचेगी। माना जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी नए साल पर इसे देशवासियों को समर्पित कर सकते हैं।
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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
वर्तमान में भारतीय सेना और स्थानीय लोग सेला दर्रे से तवांग पहुंचने के लिए बालीपारा-चारीदुआर रोड का उपयोग कर रहे हैं। सर्दी के मौसम में अत्यधिक बर्फबारी के कारण सेला दर्रे भयंकर बर्फ जम जाती है। इससे रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। पूरा तवांग सेक्टर देश के बाकी हिस्सों से कट जाता है। ऐसे में सेना का तवांग पहुंचना मुिश्कल हो जाता है। सेला दर्रा सुरंग मौजूदा सड़क को बायपास करेगी और यह बैसाखी को नूरानंग से जोड़ेगी। इसके साथ ही सुरंग सेला-चारबेला रिज से कटती है, जो तवांग को पश्चिम कामेंग जिले से अलग करती है।
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13,500 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर दो लेन में बनी दुनिया की सबसे लंबी सुरंग
- प्रोजेक्ट की कुल लंबाई है 11.84 किमी है।
- 1,591 मीटर का ट्विन ट्यूब चैनल हो रहा है तैयार। दूसरी सुरंग 993 मीटर लंबी है।
- टनल-2 में ट्रैफिक के लिए एक बाई-लेन ट्यूब और एक एस्केप ट्यूब बनाया गया है। मुख्य सुरंग के साथ ही इतनी ही लंबाई की एक और सुरंग बनाई गई है, जो किसी आपातकालीन समय काम आएगी।
- प्रॉजेक्ट के तहत दो सड़कें (7 किलोमीटर और 1.3 किलोमीटर) भी बनाई गई हैं।
- टनल के उद्घाटन के साथ ही छह किलोमीटर की दूरी होगी कम।
- सेला दर्रा 317 किलोमीटर लंबी बालीपारा-चाहरद्वार-तवांग सड़क पर है।
- यह अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग को तवांग को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली एकमात्र सड़क है।
- सेना बहुत कम समय में अग्रिम चौकियों तक पहुंचेगी, चीन को दे सकेंगे माकूल जवाब।