DoPT Reforms: प्रधानमंत्री या मंत्री को सीधे भेजी शिकायत तो नपेंगे कर्मी, सांसद की सिफारिश पड़ेगी महंगी
DoPT Reforms: डीओपीटी के मुताबिक, ऐसे कर्मियों जो अपना प्रतिवेदन तत्कालीन बॉस को न भेजकर, सीधे प्रधानमंत्री, मंत्री एवं अन्य अथॉरिटी के पास भेजते हैं। डीओपीटी ने अब ऐसे कर्मियों को चेताया है कि उन्होंने इस तरह के तरीक़ों की मदद ली, तो उनके ख़िलाफ सेवा नियमों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी...
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केंद्र सरकार के अनेक मंत्रालयों और विभागों में अपनी किसी शिकायत का निवारण कराने के लिए कर्मचारी, तय नियमों का उल्लंघन करते हैं। वे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार न चल कर, अपना प्रतिवेदन सीधे उच्च अधिकारी के पास भेज देते हैं। वे कर्मचारी, विभागीय प्रक्रिया को बाईपास करते हैं। डीओपीटी के मुताबिक, ऐसे कर्मियों की संख्या भी अच्छी खासी है, जो अपना प्रतिवेदन तत्कालीन बॉस को न भेजकर, सीधे प्रधानमंत्री, मंत्री एवं अन्य अथॉरिटी के पास भेजते हैं। उन कर्मियों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जो अपने प्रतिवेदन को संसद सदस्य की सिफ़ारिश के साथ भेजते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि सांसद के सिफ़ारिशी पत्र से उनका काम बन जाएगा। डीओपीटी ने अब ऐसे कर्मियों को चेताया है कि उन्होंने इस तरह के तरीक़ों की मदद ली, तो उनके ख़िलाफ सेवा नियमों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डीओपीटी के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी को उसके वेतन या भत्तों के गैर-भुगतान को लेकर कोई शिकायत है, तो ऐसे मामले तेजी से निपटाए जाएंगे। इस संबंध में कर्मचारी ने कोई प्रतिवेदन दिया है और उस पर एक महीने तक कोई एक्शन नहीं लिया जाता, तो वह कर्मी पद सोपान के मुताबिक, अपने बड़े अफसर के पास शिकायत ले जा सकता है। सीनियर अफसर को बिना कोई देरी किए उस शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेना होगा। अगर किसी मामले में सुपीरियर अथॉरिटी के खिलाफ कोई प्रतिवेदन है, तो उसमें कहा गया है कि ऐसे प्रतिवेदन उसी सूरत में दिए जाते हैं, जब मौजूदा वैधानिक नियमों या आदेशों में इस तरह की अपील करने का कोई प्रावधान न हो। ऐसे केसों का भी शीघ्रता से समाधान किया जाए।
बड़े अधिकारी को ऐसा प्रतिवेदन तभी दिया जाए, जब तक उसके पास मौजूद पहले वाले प्रतिवादन का निपटारा न हो गया हो। सभी अपील और पिटीशन का निपटारा भी समय पर किया जाए। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में यह भी देखने में आया है कि इस तरह की शिकायतों के हल के लिए कर्मचारी तय विभागीय संचार प्रक्रिया का पालन नहीं करते। वे सीधे ही उच्च अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास करते हैं। विभिन्न स्तरों पर निर्धारित प्रक्रिया को बाईपास करने का चलन बढ़ता जा रहा है। अनेक सरकारी कर्मचारी विभाग की प्रक्रिया को बाईपास कर सीधे ही उच्च अधिकारियों को अपना प्रतिवेदन भेज देते हैं।
यह समस्या बड़े विभागों में ज्यादा देखने को मिलती है। जूनियर कर्मचारी जो लिपिकीय स्तर पर होते हैं, वे अपना प्रतिवेदन मंत्री प्रधानमंत्री एवं दूसरे पदाधिकारियों को प्रेषित कर देते हैं। सर्विस यूनियन भी यही तरीका अपनाने लगी हैं। वे भी पीएम व मंत्रियों को सीधे ही प्रतिवेदन भेजने लगे हैं। इनमें से कई प्रतिवेदन ऐसे होते हैं, जो संसद सदस्य के द्वारा फॉरवर्ड किए होते हैं। हालांकि ये प्रक्रिया रूल 20 ऑफ सीसीएस (कंडक्ट) रूल्स 1964 का उल्लंघन है।
डीओपीटी में ऐसे प्रतिवेदन भारी संख्या में प्राप्त हो रहे हैं। इनमें सरकारी कर्मी/अफसरों के अलावा आर्मी और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से आने वाले प्रतिवेदन भी शामिल हैं। अब निर्धारित नियमों को बाईपास कर उच्च स्तर पर सीधे ही प्रतिवेदन भेजने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। इनमें संचार के सभी तरीके, जिनमें ईमेल और लोक शिकायत पोर्टल आदि भी शामिल हैं। अगर कोई इनके द्वारा भी तय प्रक्रिया का उल्लंघन कर शिकायत उच्च स्तर पर भेजता है तो उसे भी विभागीय कार्रवाई के दायरे में ले लिया जाएगा।
कुछ मामलों में ये भी देखा गया है कि सरकारी कर्मचारी के संबंधी द्वारा भी प्रतिवेदन भेजा जाता है। हालांकि ये प्रक्रिया भी तय मानकों के अनुरुप नहीं है। ये तरीका पूरी तरह अवांछनीय माना जाता है। अधिकारियों से कहा गया है कि अगर किसी के रिश्तेदार द्वारा कोई प्रतिवेदन भेजा जाता है, तो उसे नोटिस में नहीं लिया जाए। यह केवल उन्हीं मामलों में स्वीकार किया जाएगा, जहां किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु या दिव्यांगता से जुड़ा केस होगा। यहां भी उन स्थितियों पर गौर किया जाएगा, जिनमें कर्मचारी खुद से प्रतिवेदन भेजने की हालत में न हो।