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9/11 के 25 साल बाद फिर उठे सवाल: ट्रंप बोले-सऊदी भूमिका वाले रिकॉर्ड जारी करने पर करेंगे विचार; क्या है मामला?
Mon, 14 Sep 2026 05:29 AM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, वाशिंगटन।
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 14 Sep 2026 05:29 AM IST
सार
डोनाल्ड ट्रंप ने 9/11 हमलों से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की पीड़ित परिवारों की मांग पर विचार करने की बात कही है। परिवार इन दस्तावेजों से सऊदी अरब की कथित भूमिका पर और जानकारी सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं। इसी बीच सार्वजनिक किए गए सीआईए दस्तावेजों से पता चला है कि 9/11 से पहले ओसामा बिन लादेन संभावित निशाने वाले देशों में भारत को भी शामिल करना चाहता था। हालांकि, भारत को लेकर किसी खास हमले या ठिकाने की योजना का जिक्र नहीं है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9/11 आतंकी हमलों से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग पर विचार करने की बात कही है। इन दस्तावेजों से हमलों में सऊदी अरब की कथित भूमिका पर रोशनी पड़ सकती है। 9/11 पीड़ितों के परिवार लंबे समय से इन रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। आयरलैंड से अमेरिका लौटने से पहले रविवार को ट्रंप ने कहा कि वह वाशिंगटन पहुंचने के बाद इस मामले को देखेंगे।
परिवार आखिर क्या जानना चाहते हैं?
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि सऊदी अरब में प्रभाव रखने वाले कुछ कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं ने 9/11 हमले के लिए जिम्मेदार अपहरणकर्ताओं की मदद की थी। 19 अपहरणकर्ताओं में से 15 सऊदी नागरिक थे। हालांकि, सऊदी सरकार हमलों में किसी भी तरह की भूमिका से लगातार इनकार करती रही है। परिवारों की मांग है कि संबंधित गोपनीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि हमले में सऊदी भूमिका को लेकर उठे सवालों पर और जानकारी सामने आ सके।
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25 साल बाद भी क्यों जारी है लड़ाई?
9/11 पीड़ितों के रिश्तेदार सऊदी अरब के खिलाफ लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में हुए स्मरण कार्यक्रम में पीड़ित परिवार की सदस्य टेरी स्ट्राडा ने भी ट्रंप से इस मामले में कदम उठाने की अपील की। स्ट्राडा ने अपने पति टॉम स्ट्राडा को 9/11 में खोया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने सऊदी अरब की रक्षा करने को चुना, जबकि उन्हें पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए था।
यह भी पढ़ें: एक देश, दो हिस्से और तीन दशक की हिंसा: ट्रंप ने फिर क्यों उठाया आयरलैंड को एक करने का मुद्दा? विवाद की कहानी
भारत का कनेक्शन क्या है?
9/11 के 25 साल पूरे होने के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से जुड़े कई पुराने खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें 28 अगस्त 1998 के एक प्रेसिडेंशियल ब्रीफ में भारत का भी जिक्र है। दस्तावेज के मुताबिक, बिन लादेन कई देशों में हमले कराना चाहता था, जिनमें भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया शामिल थे। हालांकि, भारत के किसी खास ठिकाने, हमले की तारीख या किसी सटीक ऑपरेशनल प्लान की जानकारी इस दस्तावेज में नहीं दी गई है।
इन खुलासों से क्या तस्वीर बनती है?
सीआईए के दस्तावेज यह दिखाते हैं कि 9/11 से पहले ही ओसामा बिन लादेन और अलकायदा की गतिविधियों को लेकर अमेरिका के पास खुफिया जानकारी थी। भारत का नाम भी संभावित निशाने वाले देशों में आया था। वहीं, अब 9/11 पीड़ित परिवार चाहते हैं कि हमलों से जुड़े बचे हुए रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाएं। ट्रंप ने फिलहाल रिकॉर्ड जारी करने का फैसला नहीं किया है, बल्कि परिवारों की मांग पर विचार करने की बात कही है।
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परिवार आखिर क्या जानना चाहते हैं?
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि सऊदी अरब में प्रभाव रखने वाले कुछ कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं ने 9/11 हमले के लिए जिम्मेदार अपहरणकर्ताओं की मदद की थी। 19 अपहरणकर्ताओं में से 15 सऊदी नागरिक थे। हालांकि, सऊदी सरकार हमलों में किसी भी तरह की भूमिका से लगातार इनकार करती रही है। परिवारों की मांग है कि संबंधित गोपनीय रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं, ताकि हमले में सऊदी भूमिका को लेकर उठे सवालों पर और जानकारी सामने आ सके।
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25 साल बाद भी क्यों जारी है लड़ाई?
9/11 पीड़ितों के रिश्तेदार सऊदी अरब के खिलाफ लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में हुए स्मरण कार्यक्रम में पीड़ित परिवार की सदस्य टेरी स्ट्राडा ने भी ट्रंप से इस मामले में कदम उठाने की अपील की। स्ट्राडा ने अपने पति टॉम स्ट्राडा को 9/11 में खोया था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने सऊदी अरब की रक्षा करने को चुना, जबकि उन्हें पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए था।
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भारत का कनेक्शन क्या है?
9/11 के 25 साल पूरे होने के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने ओसामा बिन लादेन और अलकायदा से जुड़े कई पुराने खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें 28 अगस्त 1998 के एक प्रेसिडेंशियल ब्रीफ में भारत का भी जिक्र है। दस्तावेज के मुताबिक, बिन लादेन कई देशों में हमले कराना चाहता था, जिनमें भारत के अलावा पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया शामिल थे। हालांकि, भारत के किसी खास ठिकाने, हमले की तारीख या किसी सटीक ऑपरेशनल प्लान की जानकारी इस दस्तावेज में नहीं दी गई है।
इन खुलासों से क्या तस्वीर बनती है?
सीआईए के दस्तावेज यह दिखाते हैं कि 9/11 से पहले ही ओसामा बिन लादेन और अलकायदा की गतिविधियों को लेकर अमेरिका के पास खुफिया जानकारी थी। भारत का नाम भी संभावित निशाने वाले देशों में आया था। वहीं, अब 9/11 पीड़ित परिवार चाहते हैं कि हमलों से जुड़े बचे हुए रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाएं। ट्रंप ने फिलहाल रिकॉर्ड जारी करने का फैसला नहीं किया है, बल्कि परिवारों की मांग पर विचार करने की बात कही है।