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नहीं चाहते कि किसी का खून हमारे हाथों पर पड़े, आप कानूनों पर रोक लगाएंगे या हम लगाएं: सुप्रीम कोर्ट

Tue, 12 Jan 2021 02:28 AM IST
Amit Mandal अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 12 Jan 2021 02:28 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से वार्ता बार-बार बेनतीजा रहने पर केंद्र को लगाई कड़ी फटकार, फैसला आज
  • सीजेआई बोबडे ने कहा, सरकार जिस तरह से इस मामले को देख रही, उससे हम बेहद निराश

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Don't want anyone's blood to fall on our hands, will you stop the laws or we should impose: Supreme Court
गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तीनों कृषि कानूनों के विरोध में 48 दिन से विरोध कर रहे किसानों से बातचीत बार-बार बेनतीजा रहने पर केंद्र को कड़ी फटकार लगाई। कानूनों के अमल पर रोक लगाने के संकेत देते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा, हम नहीं चाहते कि किसी के खून के छींटे हमारे हाथों पर पडे़। हमें बताएं कि क्या आप कानूनों के अमल पर रोक लगाएंगे? अन्यथा यह काम हम करेंगे। इसे ठंडे बस्ते में डालने में क्या दिक्कत है? इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने आंदोलनकारी किसानों और सरकार के बीच जारी गतिरोध को दूर करने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई में एक समिति बनाने का भी प्रस्ताव दिया है। मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। 

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केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जब यह कहा कि किसान यूनियनों ने सरकार के कई प्रस्तावों को नकार दिया है, तो मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा, सरकार जिस तरह से इस मामले को देख रही है, उससे हम बेहद निराश हैं। वेणुगोपाल ने कहा, अगले दौर की बातचीत 15 जनवरी को होनी है। इस पर पीठ ने कहा, आखिर क्या बातचीत होगी जब राज्य ही इसके खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। पीठ ने यह भी कहा, अगर सरकार को अपनी जिम्मेदारी का जरा भी अहसास है तो उसे कृषि कानूनों को फिलहाल लागू नहीं करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि आखिर सरकार गतिरोध खत्म होने तक तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगाने के लिए क्यों नहीं तैयार है? लोग आत्महत्या कर रहे हैं। किसान कड़ाके की ठंड से जूझ रहे हैं और कोरोना वायरस के संक्रमण का भी डर है। उनके खानपान का ध्यान कौन रख रहा है? शीर्ष अदालत डीएमके सांसद तिरुचि शिवा, राजद सांसद मनोज झा सहित कई अन्य लोगों द्वारा कृषि कानूनों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं और आंदोलनकारी किसानों को सड़कों से हटाने की मांग वाली याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही थी।
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किसानों से कहा: बुजुर्गों-महिलाओं से जाने को कहें, ये सीजेआई का आग्रह
सुप्रीम कोर्ट ने किसानों से कहा, बुजुर्ग लोग और महिलाएं सड़कों पर हैं। बुजुर्गों को किसान आंदोलन में क्यों शामिल किया गया है? किसानों की ओर से एक और वरिष्ठ वकील एचएस फुलका से कहा, आप आंदोलन कर रहे बुजुर्गों और महिलाओं को प्रदर्शन स्थल से वापस जाने के लिए कहे। जस्टिस बोबडे ने कहा, उन्हें कहा जाए कि भारत के प्रधान न्यायाधीश ने उनसे आग्रह किया है।
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एक भी अर्जी नहीं आई, जो कहती हो कि कानून अच्छे हैं
सीजेआई ने कहा, हमारे पास अब तक एक भी ऐसी अर्जी नहीं आई, जो कहती हो कि कृषि कानून अच्छे हैं। अगर ऐसा है तो किसान यूनियनों को कमेटी के सामने कहने दें कि कृषि कानून अच्छे हैं।

प्रदर्शनों को रोकने के लिए आदेश नहीं देंगे
जब वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि कोर्ट जब कानूनों पर रोक लगाने की बात कह रहा है तो उसे प्रदर्शनों पर भी रोक लगाना चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा, कोर्ट नागरिकों के प्रदर्शनों को रोकने के लिए ऐसा कोई आदेश नहीं देगा।

अफसोस कि सरकार हल नहीं निकाल पाई
 हमें अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि केंद्र सरकार इस समस्या के समाधान निकालने में सक्षम नहीं है। आपने बिना पर्याप्त मशवरे के ऐसा कानून बनाया, जिसका नतीजा विरोध प्रदर्शन के रूप में रहा। कई राज्य विरोध में उतर आए हैं। इसलिए अब आपको इस आंदोलन का समाधान निकालना ही होगा।-सीजेआई एसए बोबडे

सरकार बोली, किसी ने नहीं कहा कि यह असांविधानिक
वहीं, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा, कृषि कानूनों पर रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि यह ठीक नहीं होगा। किसी भी पक्षकार ने यह नहीं कहा है कि तीनों कानून असांविधानिक है। कई राज्य व किसान यूनियनों ने प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया है। जवाब में पीठ ने कहा, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सरकार समस्या को दूर करने में असफल रही है। कृषि कानूनों के कारण हड़ताल हुए और आपको इस परेशानी का समाधान करना है।

गणतंत्र दिवस पर रैली न होने का दें भरोसा तो दवे बोले, मैं सभी किसानों का वकील नहीं
सुनवाई के दौरान किसान यूनियनों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने राज्यसभा में ध्वनि मत से कृषि कानूनों को पारित किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने मौखिक रूप से यह भी कहा, गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली निकालने की योजना नहीं है। मगर, जब पीठ ने ऐसा भरोसा देने के लिए कहा तो दवे ने कहा कि वह सभी किसान यूनियन के वकील नहीं है ऐसे में वह सभी किसान यूनियनों की ओर से कैसे आश्वस्त कर सकते हैं।


किसान नेताओं ने कहा, सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति के समक्ष पेश नहीं होंगे
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद 40 किसान संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने कहा, अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई समिति बनाती है तो हम उसके समक्ष हम पेश नहीं होना चाहेंगेे। संयुक्त किसान मोर्च ने बयान जारी कर कहा, मंगलवार को सुनवाई नहीं होनी है और सिर्फ फैसला आएगा। कुल मिलाकर हम इससे बेहद निराश हैं। वहीं इससे पहले किसान नेताओं ने कहा, अगर सरकार या सुप्रीम कोर्ट कृषि कानूनों के अमल पर रोक लगाता है तो हमारा आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने एकसुर से कहा, कानूनों के अमल पर रोक समस्या का समाधान नहीं है। हरियाणा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत करते हैं। मगर, कोई भी रोक एक निश्चित समय के लिए ही होता है। किसान चाहते हैं कि तीनों कानून पूरी तरह वापस हो। वहीं, भारतीय किसान संघ (मानसा) के अध्यक्ष भोग सिंह मानसा ने कहा, कानूनों पर रोक समाधान नहीं है। वहीं, पंजाब किसान यूनियन के अध्यक्ष रुल्दू सिंह मानसा ने कहा, प्रदर्शन तभी खत्म होगा, जब हम यह लड़ाई जीतेंगे।
 

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