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Doda Encounter: आतंकियों के भेष में हैं पाक सेना के पूर्व फौजी? आतंक की मुरझाती पौध को देने आए हैं खाद पानी
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आतंकवाद का खतरा
- फोटो :
एएनआई
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के डोडा में अभी भी आतंकियों से मुठभेड़ जारी है। 24 घंटों में डोडा जिले में आतंकियों और भारतीय सेना के जवानों के बीच दो बार मुठभेड़ हो चुकी है। डोडा जिले के देसा के जंगलों में सोमवार को शुरू हुई यह मुठभेड़ मंगलवार को बेहद बुरी खबर लेकर आई, जब एक कैप्टन सहित सेना के चार जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। पिछले तीन हफ्तों में डोडा जिले के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच यह तीसरी बड़ी मुठभेड़ थी। वहीं बुधवार सुबह से ही आतंकियों की तलाशी अभियान फिर से शुरू हो गया। जंगल में पहाड़ी, नदियों और नालों पर सुरक्षाबलों की कड़ी निगरानी है। सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक आतंकियों की खोजबीन में गया सेना के 15 जवानों का गश्ती दल जब तलाशी अभियान के बाद वापस लौट रहा था, तभी उन पर घात लगाकर हमला किया गया। उन्होंने अंदेशा जताया है कि इस हमले में पाकिस्तान के पूर्व एसएसजी कमांडो शामिल हैं।आतंकियों ने थर्मल स्कोप का किया इस्तेमाल
सैन्य सूत्रों ने बताया कि हम हमले में शहीद हुए चारों जवान खोजी दल का नेतृत्व कर रहे थे। उन सभी के चेहरे पर गोली लगी थी। उनके चेहरे कवर नहीं थे। सभी ने लेटेस्ट बुलेट-प्रूफ जैकेट और हेलमेट पहने हुए थे। जवानों पर दो तरफ से घात लगाकर हमला किया गया। वहीं, आतंकवादियों ने जिस जगह को चुना, वहां पेड़ों की कोई छाया नहीं थी, वह खुली जगह थी। आतंकवादियों ने असाल्ट राइफल्स में थर्मल स्कोप का इस्तेमाल करके हेडशॉट से एक-एक करके सैनिकों को निशाना बनाया। सूत्रों ने बताया कि अब तक तीन बातें सामने आई हैं- जम्मू क्षेत्र के घने जंगलों में छिपे आतंकवादी विदेशी मूल के हैं; उन्हें छिपने, घात लगाने और सैनिकों के चेहरों को निशाना बनाने जैसी सैन्य रणनीतियां सिखाई गई हैं। उन्होंने अंदेशा जताया है कि आतंकियों के भेष में ये पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप के पूर्व कमांडो हो सकते हैं।
आतंकियों के पास बेहद ऊंचे दर्जे की ट्रेनिंग
एक अधिकारी ने बताया कि घने जंगलों में छिपे ये आतंकी 'फिदायीन' नहीं हैं, जो सेना या सुरक्षा बलों से भिड़ते हैं। ये आतंकी जिस तरह से जंगलों में छिपने की रणनीति में माहिर हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि उन्हें बेहद ऊंचे दर्जे की ट्रेनिंग दी गई है। इस तरह की ट्रेनिंग में आमतौर पर सिखाया जाता है कि बाहरी दुनिया से संपर्क किए बिना कैसे कई दिनों तक खुद को जीवित रखा जाए। सूत्र बताते हैं कि ये हमले कुछ-कुछ कारगिल युद्ध की याद दिलाते हैं। जब मुट्ठीभर पाकिस्तानी सेना चोटियों पर बैठी हुई थी और 90 डिग्री की मुश्किल, चट्टानी पहाड़ियों पर चढ़ते हुए हमारे जवान दुश्मन की गोलियों का निशाना बन रहे थे। सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान की आईएसआई ने भारत के खिलाफ एक प्रकार की लो इंटेंसिटी वार छेड़ दी है।
ये आम आतंकी नहीं हैं
पूर्व मेजर जनरल यश मोर कहते हैं कि अगर ये सिर्फ आतंकी होते, तो गोलियों की आवाज सुन कर भाग खड़े होते। वे इतनी देर तक सेना का सामना नहीं कर सकते। ये आम आतंकी नहीं हैं। ये बहुत हद तक पाकिस्तानी सेना के रिटायर्ड फौजी हो सकते हैं। खुद मौजूदा सेनाध्यक्ष और तत्कालीन सेना की नॉर्दन कमांड के आर्मी कमांडर रह चुके जनरल उपेंद्र द्विवेदी भी पिछले साल नवंबर में मान चुके हैं कि जम्मू-कश्मीर में मारे गए कई विदेशी आतंकियों की पुष्ठभूमि की जांच के दौरा यह जानकारी मिली है कि वे सेना में काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि आतंकी संगठनों को जम्मू कश्मीर में स्थानीय आतंकी नही मिल रहे हैं। ऐसे में वह विदेशी आतंकियों को भेजने की कोशिशें कर रहा है।
आतंक की मुरझाती पौध को खाद-पानी देने की कोशिश
सूत्रों ने बताया कि ये कथित आतंकवादी बहुत हद तक पाकिस्तानी सेना के भाड़े के सैनिक हो सकते हैं, जो आतंक की मुरझाती पौध को खाद-पानी देने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि पाकिस्तानी साइड में भी इसी तरह के जंगल हैं और उन्हें इस तरह के इलाकों में काम करने अनुभव है। सूत्र बताते हैं कि जम्मू क्षेत्र का इलाका नदी और पहाड़ी नालों वाला है और एलओसी पर पाकिस्तान से सटी सीमा पर कई छोटी नदियां हैं, जो मानसून में उफान पर होती हैं, जिससे उन्हें घुसपैठ का मौका मिलता है। इसके अलावा जम्मू डिविजन में कई पहाड़ियां ऐसी हैं कि वहां छिपने के लिए तमाम जगहें हैं। इलाके इतने घने हैं कि वहां ड्रोन के कैमरे भी उन जगहों को नहीं भेद सकते।
20-25 विदेशी आतंकवादियों का समूह
एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को डोडा में घेराबंदी और तलाशी का अभियान जो शुरू किया गया था, वह एक विशेष खुफिया इनपुट पर आधारित था। पिछले तीन हफ्तों में डोडा जिले के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच यह तीसरी बड़ी मुठभेड़ थी। उन्होंने अनुमान जताया कि इस इलाके के 30-40 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लगभग 20-25 विदेशी आतंकवादी हैं, जो एक या कई समूहों में बंट गया है और रह-रह कर हमले कर रहे हैं। उनके पास अमेरिकी एम-4 असाल्ट राइफल जैसे आधुनिक हथियार हैं। उन्हें इस इलाके की भौगोलिक स्थिति का अच्छा-खासा अंदाजा है और वे हमले करने के लिए घने जंगल और झाड़ियों का फायदा उठा रहे हैं।
16 कोर के खड़े होने का समय
सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. मोहन भंडारी कहते हैं कि अब 16 कोर के खड़े होने का समय है। बहुत हो गया। अब भारतीय सशस्त्र बलों के लिए कड़ी चुनौती है। उन्हें आतंकियों के ठिकानों पर पर जोरदार हमला करना होगा। उन्हें लगातार ऐसा करते रहना होगा, जब तक आतंकियों का नामोनिशन न मिट जाए। उन्हें हमलों की रणनीति ऐसी बनानी होगी, ताकि नियंत्रण रेखा पर दुश्मन की चौकियों और आतंकवादियों के लॉन्चिंग पैड पूरी तरह से समाप्त हो जाएं।
2021 से अब तक मारे गए 62 आतंकवादी
सूत्रों ने बताया कि जेके पुलिस ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में मुठभेड़ में डोडा से हिजबुल मुजाहिदीन के आखिरी जीवित आतंकवादी मसूद को मार गिराया था, उसके बाद जम्मू डिविजन के रामबन, डोडा और किश्तवाड़ जिलों से मिलकर बनी चिनाब घाटी को 29 जून, 2020 को पुलिस रिकॉर्ड में आतंकवाद मुक्त घोषित किया गया था। 2021 से अब तक मारे गए 62 आतंकवादियों में से पुंछ और राजौरी में 21-21 आतंकवादी मारे गए। उनमें से ज्यादातर सुरक्षाबलों का निशाना उस समय बने, जब वे घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। वहीं, साल 2021 से अब तक पुंछ, राजौरी, कठुआ, रियासी, डोडा और उधमपुर जिलों में आतंकी हमलों में कम से कम 51 सुरक्षाकर्मियों की शहादत हो चुकी है। इस साल कश्मीर घाटी में पांच आतंकवादी घटनाओं और दो सुरक्षाकर्मियों की मौत की तुलना में जम्मू में छह ऐसे हमले हुए हैं, जिनमें 12 सुरक्षाकर्मी मारे गए। 2021, 2022 और 2023 में घाटी में दर्ज घटनाओं की संख्या क्रमशः 126, 103 और 29 रही।