{"_id":"640de46372a6f79d080c30cc","slug":"doctors-advised-prevention-instead-of-fearing-h3n2-virus-news-in-hindi-2023-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"H3N2: डेढ़ दशक पहले एच और एन वायरस ने डराया था, हर साल बदलता है स्वरूप, अब डरने की नहीं बचाव की जरूरत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
H3N2: डेढ़ दशक पहले एच और एन वायरस ने डराया था, हर साल बदलता है स्वरूप, अब डरने की नहीं बचाव की जरूरत
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
H3N2 Influenza
- फोटो :
Agency (File Photo)
विस्तार
देश में एच3एन2 वायरस के फैलने पर फिलहाल न तो डरने की जरूरत है और न ही बहुत ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता है। क्योंकि एच और एन इनफ्लुएंजा वायरस की मौजूदगी ने डेढ़ दशक पहले स्वाइन फ्लू के रूप में सबसे ज्यादा दहशत फैलाई थी। उसके बाद हर साल वायरस का म्यूटेशन होता रहा। यह सीजनल म्यूटेशन है और गर्मी के साथ-साथ इस वायरस का असर भी खत्म हो जाता है। इसलिए बेहतर है कि ऐसे वायरस से बचाव किया जाए ना कि बेवजह डरा जाए। आईसीएमआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और देश के प्रमुख महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पांडा ने अमर उजाला डॉट कॉम से यह जानकारी साझा की।
ये कोई पहला वायरस नहीं
डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं एच और एन वायरस कोई पहला वायरस नहीं है जिसके चलते संक्रमण फैला हो। वह कहते हैं कि यह वायरस पिछले कई सालों से मौजूद है। वक्त के साथ इसका हर साल म्यूटेशन होता है। कभी यह वायरस खतरनाक हो जाते हैं तो कभी सामान्य फ्लू की तरह अपना व्यवहार करते हैं। डॉक्टर पांडा का कहना है कि क्योंकि हाल में ही देश ने कोविड जैसी महामारी का प्रकोप झेला है इसलिए इनफ्लुएंजा वायरस को लेकर लोगों में डर बना हुआ है। जबकि इस वायरस से ना डरने की जरूरत है और ना ही बेवजह घबराने की जरूरत है। दरअसल यह सीजनल वायरस की तरह ही असर करता है। इस बार भी एच और एन वायरस मानसून के बाद सक्रिय हुए हैं। जो कि गर्मी के आते आते अपना असर कम करने लगते हैं।
लोगों को डरने की जरूरत नहीं
डॉक्टर पांडा कहते हैं कि बीते कुछ समय से जिस तरीके से H3N2 वायरस को लेकर लोगों में डर बन रहा है उसकी आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि यह वायरस हमारी शासन प्रणाली पर असर डालता है इसलिए मास्क लगाकर रहना ज्यादा बेहतर है। वायरोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ राकेश सचदेवा कहते हैं कि इनफ्लुएंजा वायरस कोविड से पूरी तरीके से अलग है। क्योंकि लोगों में पुरानी बीमारी का भय इतना ज्यादा है इस वजह से ऐसे वायरस को लेकर लोगों में डर बन रहा है। जबकि इस वायरस से डरने की वजह बचाव करना बेहतर तरीका है।
ना बरतें लापरवाही
2008-9 में आए स्वाइन फ्लू के बाद से इस वायरस ने हर साल अपना स्वरूप बदल कर लोगों पर असर डालना शुरू किया। उनका कहना है कि डेढ़ दशक पहले स्वाइन फ्लू की दस्तक से जो लोगों में भय था वह अब इस वायरस को लेकर ना के बराबर है। चिकित्सकों का कहना है कि यह वायरस बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर ही असर करता है। डॉक्टर राकेश कहते हैं कि कोई भी इनफ्लुएंजा वायरस लापरवाही बरतने पर जरूर खतरनाक हो सकता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने की थी समीक्षा बैठक
वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार दिसंबर से मौसमी इन्फ्लूएंजा के मरीज आ रहे हैं। एच3एन2 संक्रमण का प्रसार भी बढ़ता दिखाई दिया है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि मार्च के अंत तक संक्रमण के प्रसार में कमी आ सकती है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि देश में एच3एन2 के बढ़ते मामलों को लेकर पिछले सप्ताह समीक्षा बैठक भी की थी। राज्यों को अलर्ट रहने और स्थिति की बारीकी से निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी की गई थी। उन्होंने इस दौरान कहां की केंद्र सरकार स्थिति से निपटने के लिए राज्यों के साथ काम कर रही है और स्वास्थ्य उपायों के लिए तत्पर है।