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दिवाली के जश्न ने सांस पर डाला पहरा, प्रदूषण स्तर ज्यादातर शहरों में दोगुना
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
Updated Fri, 09 Nov 2018 03:31 PM IST
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प्रदूषण
- फोटो : अमर उजाला
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दीपावली से कुछ सप्ताह पहले ही देश की सर्वोच्च अदालत ने पटाखे जलाने को लेकर कुछ दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके अनुसार, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रात 8 बजे से लेकर 10 बजे तक, दो घंटे की अवधि में पटाखे जलाए जा सकते थे। वहीं देश के अन्य हिस्सों में राज्य सरकारों को यह तय करना था कि वो स्वयं दो घंटे का समय तय करें, जब पटाखे जलाए जाएंगे।
इस निर्देश का मकसद था प्रदूषण से जूझ रहे देश को छोटी ही सही, पर राहत दिलाना। लेकिन ऐसा हो न सका। दिवाली की रात दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए पटाखे जलाए गए। नतीजा दिखाई दिया 8 अक्तूबर की सुबह, जब अधिकांश शहर धुएं के धुंध से ढंक गए।
अदालती आदेश तो यह भी था कि निर्देशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त पुलिसिया कार्रवाई होनी चाहिए। दिल्ली में लगभग 400 लोगों पर इस वजह से मामले भी दर्ज किए गए। हैदराबाद में 200 और चेन्नई में 120 लोगों को तय समय सीमा के बाद पटाखे जलाने की वजह से गिरफ्तार किया और कई लोगों पर जुर्माना भी लगाया।
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तमिलनाडु और पुडुचेरी को छोड़कर लगभग सभी राज्यों में रात 8 बजे से लेकर 10 बजे तक ही पटाखा जलाना वैध था जबकि इन दोनो राज्यों में सुबह चार बजे से पांच बजे तक और रात में 9 बजे से 10 बजे तक की इजाजत मिली थी। इन सब के बीच निगरानी विभागों के मुताबिक कोलकाता, गुवाहाटी, अहमदाबाद, आगरा, हैदराबाद और चेन्नई में दिवाली के बाद प्रदूषण स्तर समान्य से दोगुना दर्ज किया गया। उपग्रह से मिली तस्वीर में भी दिवाली के बाद पहले के मुताबिक बेतहाशा स्मॉग देखा गया है।
प्रदूषण निगरानी विभाग के मुताबिक दिवाली के बाद प्रदूषण को 4 श्रेणी में बांटा गया है।
1 खतरनाक
2 बहुत खराब
3 खराब
4 मध्यम
5 संतोषजनक
6 अच्छा
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इस निर्देश का मकसद था प्रदूषण से जूझ रहे देश को छोटी ही सही, पर राहत दिलाना। लेकिन ऐसा हो न सका। दिवाली की रात दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए पटाखे जलाए गए। नतीजा दिखाई दिया 8 अक्तूबर की सुबह, जब अधिकांश शहर धुएं के धुंध से ढंक गए।
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अदालती आदेश तो यह भी था कि निर्देशों की अवहेलना करने वालों पर सख्त पुलिसिया कार्रवाई होनी चाहिए। दिल्ली में लगभग 400 लोगों पर इस वजह से मामले भी दर्ज किए गए। हैदराबाद में 200 और चेन्नई में 120 लोगों को तय समय सीमा के बाद पटाखे जलाने की वजह से गिरफ्तार किया और कई लोगों पर जुर्माना भी लगाया।
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तमिलनाडु और पुडुचेरी को छोड़कर लगभग सभी राज्यों में रात 8 बजे से लेकर 10 बजे तक ही पटाखा जलाना वैध था जबकि इन दोनो राज्यों में सुबह चार बजे से पांच बजे तक और रात में 9 बजे से 10 बजे तक की इजाजत मिली थी। इन सब के बीच निगरानी विभागों के मुताबिक कोलकाता, गुवाहाटी, अहमदाबाद, आगरा, हैदराबाद और चेन्नई में दिवाली के बाद प्रदूषण स्तर समान्य से दोगुना दर्ज किया गया। उपग्रह से मिली तस्वीर में भी दिवाली के बाद पहले के मुताबिक बेतहाशा स्मॉग देखा गया है।
प्रदूषण निगरानी विभाग के मुताबिक दिवाली के बाद प्रदूषण को 4 श्रेणी में बांटा गया है।
1 खतरनाक
2 बहुत खराब
3 खराब
4 मध्यम
5 संतोषजनक
6 अच्छा
delhi pollution
- फोटो : ani
इन श्रेणियों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को छू रहे शहरों में पहले स्थान पर नोएडा एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 432 के साथ, दूसरे स्थान पर एक्यूआई 427 के सात बिहार की राजधानी पटना है। तीसरे पायदान पर नोएडा से सटा गाजियाबाद शहर है जिसका एक्यूआई 422 दर्ज किया गया है। इन शहरों के बाद बुलंदशहर (418) और लखनऊ (412) खतरनाक स्तर के प्रदूषण को झेल रहा है।
बहुत खराब श्रेणी में देश की राजधानी दिल्ली एक्यूआई 390 के साथ पहले स्थान पर है, जिसके बाद आगरा (355), कोलकाता (354), अहमदाबाद (352) और सिंगरौली (318) के स्तर को छूकर दमघोंटू वातावरण वाले शहर बन चुके हैं।
इसके बाद खराब श्रेणी में महानगरों में से एक ही शहर है जो थोड़ी राहत देती है, लेकिन यहां भी प्रदूषण की स्थिति लोगों का जीना मुहाल कर रही है। वहीं मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में जयपुर, बंगलुरू, अलवर, हैदराबाद और महानगर चेन्नई आता है। वहीं सिर्फ दो शहर सकारात्मक स्थिति में दिखते हैं जिनमें तिरुवनंतपुरम सतोषजनक की श्रेणी में और केरल अच्छे यानि स्वस्थ श्रेणी में दर्ज किए गये हैं।
क्या है धुंध की वजह
बहुत खराब श्रेणी में देश की राजधानी दिल्ली एक्यूआई 390 के साथ पहले स्थान पर है, जिसके बाद आगरा (355), कोलकाता (354), अहमदाबाद (352) और सिंगरौली (318) के स्तर को छूकर दमघोंटू वातावरण वाले शहर बन चुके हैं।
इसके बाद खराब श्रेणी में महानगरों में से एक ही शहर है जो थोड़ी राहत देती है, लेकिन यहां भी प्रदूषण की स्थिति लोगों का जीना मुहाल कर रही है। वहीं मध्यम प्रदूषण की श्रेणी में जयपुर, बंगलुरू, अलवर, हैदराबाद और महानगर चेन्नई आता है। वहीं सिर्फ दो शहर सकारात्मक स्थिति में दिखते हैं जिनमें तिरुवनंतपुरम सतोषजनक की श्रेणी में और केरल अच्छे यानि स्वस्थ श्रेणी में दर्ज किए गये हैं।
क्या है धुंध की वजह
उत्तर भारत के अधिकांश शहरों में ठंड की दस्तक हो चुकी है। साथ ही इन इलाकों में हवा की रफ्तार पांच किलोमीटर प्रतिघंटा से कम होने की वजह से धूलकण और प्रदूषक कुदरती रूप से नहीं हट रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण कम करना ही एकमात्र उपाय बचता है।