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सेना की बढ़ी ताकत: लगातार पांच घंटे उड़ने वाले स्वदेशी ड्रोन दिव्यास्त्र का सफल परीक्षण, 500KM मारक क्षमता
Tue, 02 Jun 2026 06:36 AM IST
Pavan
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Tue, 02 Jun 2026 06:36 AM IST
सार
Divyastra Drone: जोधपुर के रेगिस्तान में 53 डिग्री तापमान और तेज हवाओं के बीच स्वदेशी ड्रोन दिव्यास्त्र एमके-1 का सफल परीक्षण हुआ। ड्रोन ने लक्ष्य पर सटीक हमला और लाइव निगरानी क्षमता का प्रदर्शन किया। 500 किमी रेंज और पांच घंटे उड़ान क्षमता वाला यह ड्रोन जल्द सेना में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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स्वदेशी ड्रोन दिव्यास्त्र का सफल परीक्षण
- फोटो : X @KAWAUAVPVTLTD
विस्तार
जोधपुर के रेगिस्तान में भीषण गर्मी के बीच स्वदेशी रूप से विकसित यूएवी प्लेटफॉर्म दिव्यास्त्र एमके-1 का परीक्षण सफल रहा। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में होवर-इट नाम की कंपनी के दिव्यास्त्र ड्रोन ने मिशन के सभी लक्ष्यों को हासिल किया।
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तेज हवा के बीच दिव्यास्त्र ने साबित की अपनी खासियत
इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत इसका कठिन माहौल रहा। ड्रोन निर्माता कंपनी हूवर-इट ने बताया कि रेगिस्तान में 53 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के बावजूद दिव्यास्त्र एमके-1 ने अपनी परिचालन विश्वसनीयता बनाए रखी। यह दर्शाता है कि यह ड्रोन सेना के लिए किसी भी मौसम में काम करने के लिए तैयार है। प्रदर्शन के दौरान ड्रोन ने अपनी आक्रामक क्षमता का भी लोहा मनवाया।
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80 किमी रफ्तार वाली तेज हवा में साधा निशाना
ड्रोन ने तय लक्ष्य पर एक टर्मिनल डाइव अटैक यानी ऊपर से सीधे नीचे आकर हमला करने की तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इसने स्वायत्त तरीके से लक्ष्य की पहचान की और बेहद सटीक हमला बोला। परीक्षण के दौरान ड्रोन के लाइव आईएसआर डाटा और टोही तस्वीरें सीधे ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भेजी गईं। वहां सेना के अधिकारियों इसकी बेहतरीन निगरानी और युद्धक्षेत्र का आकलन करने की क्षमता का खुद आकलन किया।
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दिव्यास्त्र एमके-1 की क्षमता
ड्रोन 500 किलोमीटर दूर तक वार कर सकता है। लगातार 5 घंटे उड़ान भर सकता है। इसमें दिन और रात में देखने के लिए हाईटेक कैमरे लगे हैं। यह निगरानी कार्यों के साथ अपने साथ भारी विस्फोटक भी ले जा सकता है। इसकी डिजाइन, मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और फ्लाइट-कंट्रोल आर्किटेक्चर पूरी तरह स्वदेश में निर्मित है। होवर-इट के संस्थापक सौरव भदौरिया ने बताया कि जोधपुर का सफल परीक्षण बड़ा मील का पत्थर है। आगामी दिनों में इसके पोखरण में उन्नत तकनीकी और व्यावहारिक परीक्षण होंगे, जिसके बाद यह सेना में शामिल होने के लिए तैयार हो पाएगा। हमारी कोशिश है कि हम सेना को सस्ते से सस्ता ड्रोन दे पाएं।
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तेज हवा के बीच दिव्यास्त्र ने साबित की अपनी खासियत
इस परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत इसका कठिन माहौल रहा। ड्रोन निर्माता कंपनी हूवर-इट ने बताया कि रेगिस्तान में 53 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के बावजूद दिव्यास्त्र एमके-1 ने अपनी परिचालन विश्वसनीयता बनाए रखी। यह दर्शाता है कि यह ड्रोन सेना के लिए किसी भी मौसम में काम करने के लिए तैयार है। प्रदर्शन के दौरान ड्रोन ने अपनी आक्रामक क्षमता का भी लोहा मनवाया।
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80 किमी रफ्तार वाली तेज हवा में साधा निशाना
ड्रोन ने तय लक्ष्य पर एक टर्मिनल डाइव अटैक यानी ऊपर से सीधे नीचे आकर हमला करने की तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। इसने स्वायत्त तरीके से लक्ष्य की पहचान की और बेहद सटीक हमला बोला। परीक्षण के दौरान ड्रोन के लाइव आईएसआर डाटा और टोही तस्वीरें सीधे ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भेजी गईं। वहां सेना के अधिकारियों इसकी बेहतरीन निगरानी और युद्धक्षेत्र का आकलन करने की क्षमता का खुद आकलन किया।
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दिव्यास्त्र एमके-1 की क्षमता
ड्रोन 500 किलोमीटर दूर तक वार कर सकता है। लगातार 5 घंटे उड़ान भर सकता है। इसमें दिन और रात में देखने के लिए हाईटेक कैमरे लगे हैं। यह निगरानी कार्यों के साथ अपने साथ भारी विस्फोटक भी ले जा सकता है। इसकी डिजाइन, मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स और फ्लाइट-कंट्रोल आर्किटेक्चर पूरी तरह स्वदेश में निर्मित है। होवर-इट के संस्थापक सौरव भदौरिया ने बताया कि जोधपुर का सफल परीक्षण बड़ा मील का पत्थर है। आगामी दिनों में इसके पोखरण में उन्नत तकनीकी और व्यावहारिक परीक्षण होंगे, जिसके बाद यह सेना में शामिल होने के लिए तैयार हो पाएगा। हमारी कोशिश है कि हम सेना को सस्ते से सस्ता ड्रोन दे पाएं।