S Jaishankar: 'उनके लिए 'दलगत राजनीति' देश की प्रगति से ज्यादा महत्वपूर्ण', जयशंकर ने विपक्ष पर साधा निशाना
S Jaishankar: संसद में बाधित करने को लेकर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 'दुख की बात है कि विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में मेरे बयान को बार-बार व्यवधान डाला। जाहिर है, उनके लिए दलगत राजनीति राष्ट्रीय प्रगति से अधिक महत्वपूर्ण थी।'
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में विदेश नीति पर अपने बयान के दौरान विपक्ष के विरोध पर निशाना साधते हुए शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का विवरण दिया गया है। उन्होंने ट्विटर पर जारी अपने वीडियो बयान में कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले कुछ महीने में प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा हुआ और कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इन मुद्दों पर जितनी गंभीरता से बहस और चर्चा की जरूरत है, विपक्ष ने सदन में वह गुंजाइश नहीं छोड़ी। उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि विपक्ष ने दोनों ही सदनों में उनके भाषण के दौरान व्यवधान पैदा किए।
उन्होंने कहा, 'दुख की बात है कि विपक्ष ने संसद के दोनों सदनों में मेरे बयान को बार-बार बाधित किया। जाहिर है, उनके लिए दलगत राजनीति राष्ट्रीय प्रगति से अधिक महत्वपूर्ण थी।' संसद के दोनों सदनों में गुरुवार को विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया क्योंकि जयशंकर ने विदेश नीति की उपलब्धियां गिनाईं और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की भारत यात्राओं के साथ-साथ मुर्मू और मोदी की विदेश यात्राओं का विवरण साझा किया।
विदेश मंत्री ने कहा, 'कई स्तरों पर इन प्रयासों के जरिए हम एक अस्थिर और अनिश्चित दुनिया में अपने राष्ट्रीय उद्देश्यों और हितों को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं।' उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति उन मुद्दों पर केंद्रित है जो जनता के कल्याण और आम नागरिक के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
जयशंकर ने कहा, 'यह विदेश में हिरासत में लिए गए हमारे मछुआरे हो सकते हैं या संघर्ष वाले इलाकों में फंसे लोग हो सकते हैं। यह विदेश में छात्रों और पेशेवरों के लिए बेहतर वीजा सुविधाएं या काम करने की स्थिति हो सकती है या यह महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, चाहे वह इंजन प्रौद्योगिकी हो या सेमीकंडक्टर, ड्रोन या फिनटेक, में प्रगति के जरिए हमारे देश के भविष्य के बारे में हो सकती है। ये नए भारत के निर्माण का समय है।' जयशंकर ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन मामलों पर उस गंभीरता के साथ चर्चा और बहस नहीं होने दी गई, जिसके वे हकदार हैं।