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तैयारी: जानलेवा वायरस की सूची में पहली बार डिजीज एक्स शामिल, विशेषज्ञों की सिफारिश पर WHO ने साझा की जानकारी
Sat, 07 Sep 2024 04:55 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 07 Sep 2024 04:55 AM IST
सार
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि यह उच्च जोखिम वाले रोगजनक जानवरों से इन्सानों में पहुंच रहे हैं और महामारी का कारण बन सकते हैं। इनकी निगरानी से लेकर जांच, इलाज और टीका तक सभी पहलुओं पर देशों को अभी से काम करना चाहिए, ताकि कोरोना जैसी स्वास्थ्य आपातकाल में लोगों को बचाया जा सके।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Istock
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विस्तार
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने वैश्विक स्तर पर जानलेवा वायरस की एक सूची जारी की है। इसमें कोरोना, निपाह, इबोला, लासा बुखार, रिफ्ट वैली और जीका वायरस के अलावा पहली बार डिजीज एक्स को भी शामिल किया है। इस बीमारी का स्त्रोत अभी तक अज्ञात है, लेकिन डब्ल्यूएचओ का मानना है कि भविष्य में इस संक्रमण की वजह से वैश्विक महामारी का सामना करना पड़ सकता है।
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डब्ल्यूएचओ ने जानकारी दी है कि नवीन रोगजनकों की उत्पत्ति के लिए हाल ही में वैज्ञानिक सलाहकार समूह (एसएजीओ) गठित किया गया, जिसमें दुनियाभर से करीब एक दर्जन से ज्यादा वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल हैं। भारत की ओर से इस टीम में आईसीएमआर के पूर्व संक्रामक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रमन आर गंगाखेड़कर हैं। एसएजीओ की सिफारिश पर सबसे ज्यादा जानलेवा रोगजनकों की सूची तैयार की है। इनमें विषाणु, जीवाणु, कवक, परजीवी शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि यह उच्च जोखिम वाले रोगजनक जानवरों से इन्सानों में पहुंच रहे हैं और महामारी का कारण बन सकते हैं। इनकी निगरानी से लेकर जांच, इलाज और टीका तक सभी पहलुओं पर देशों को अभी से काम करना चाहिए, ताकि कोरोना जैसी स्वास्थ्य आपातकाल में लोगों को बचाया जा सके।
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2018 में पहली बार पता चला, पर अब तक नहीं खुला रहस्य
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 2018 में पहली बार डिजीज एक्स सामने आने के बाद अब तक इसका रहस्य नहीं सुलझा है। वैश्विक स्तर पर इसे अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। कुछ देशों में इसे काल्पनिक रोगजनक तक कहा जा रहा है, जबकि डिजीज एक्स एक प्लेसहोल्डर अवधारणा है जो एक महामारी रोगजनक को संदर्भित करता है। इसे अभी तक चिह्नित नहीं किया है, लेकिन दुनियाभर में अभी ऐसे कई रोगजनक हैं जो ऐसी महामारी पैदा करने की क्षमता रखते हैं।
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डब्ल्यूएचओ का कहना है कि पहले से तैयारी करने से स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जा सकता है। 2020 में जब कोरोना महामारी सामने आई तब बायोएनटेक व मॉडर्ना कंपनी ने महज कुछ समय में ही कोरोना का पहला टीका खोज लिया। यह इसलिए मुमकिन हो पाया, क्योंकि इनके पास कोरोना परिवार से जुड़े मार्स वायरस को लेकर काफी जानकारी मौजूद थी।
भारत के पास अब पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत तंत्र
डॉ. गंगाखेड़कर का कहना है कि इन घातक रोगजनकों से लड़ने के लिए भारत के पास अब पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत तंत्र स्थापित हुआ है। जिला से लेकर राज्य और केंद्र स्तर तक निगरानी तंत्र और प्रयोगशालाओं का काफी विकास हुआ है। साथ ही वैज्ञानिक शोध स्तर पर भी भारत सरकार काफी प्रयास कर रही है। हाल ही में राष्ट्रीय एकल स्वास्थ्य योजना के तहत जंगल, वन्यजीव, इन्सान और पर्यावरण सभी की निगरानी के लिए सरकार ने अपने कई मंत्रालयों की संयुक्त टीमें भी बनाई हैं। हालांकि, इन प्रयासों का आगे भी जारी रहना बहुत जरूरी है।