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बंगाल में चहुंओर 'हरी आंधी' की चर्चा

Fri, 20 May 2016 06:01 PM IST
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, कोलकाता Updated Fri, 20 May 2016 06:01 PM IST
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 discussion on results of assembly election in west bengal

तृणमूल कांग्रेस के दफ्तर के बाहर समर्थकों का जनसैलाब था और ममता बनर्जी पार्टी की जीत के बाद औपचारिक रूप से पत्रकारों से रू-ब-रू हो रहीं थीं। इसी बीच वहां मौजूद एक वरिष्ठ पत्रकार ने उन्हें जीत की बधाई दी, तो ममता बनर्जी ने झट से उनसे कहा, "मुझे बधाई देने के लिए आपने अपने यहाँ से अनुमति ले ली थी ना ?"यह सब, एक भरे संवाददाता सम्मलेन में हो रहा था, जिसका कई चैनलों पर सीधा प्रसारण हो रहा था। यह पत्रकार थे कोलकाता से प्रकाशित होने वाले सबसे बडे क्षेत्रीय अखबार आनंद बाजार पत्रिका के संवादददाता।

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ममता बनर्जी और उनके बीच हो रहा संवाद, बाहर से आए पत्रकारों की समझ से दूर था। मगर, संवाददाता सम्मलेन में मौजूद कोलकाता के पत्रकारों के बीच इस संवाद के बाद ठहाके लगने लगे। दरअसल आनंद बाजार पत्रिका और ममता बनर्जी के बीच गलतफहमियाँ एक लम्बे अर्से से चली आ रही हैं और आनंद बाजार पत्रिका पर तृणमूल कांग्रेस और खासतौर पर ममता बनर्जी के खिलाफ मुहिम चलाने का आरोप लगने लगा।शुक्रवार की सुबह सबको आनंद बाजार पत्रिका का इंतजार था, क्योंकि लोगों को यह जानने की दिलचस्पी थी कि आखिर वो अखबार क्या लिखता है, जिसने पश्चिम बंगाल के विधानसभा के चुनावों में भविष्यवाणी की थी कि इस बार ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए डगर काफी कठिन होगी।
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बहरहाल शुक्रवार को जब स्टैंड पर अखबार आया, तो वो चाय की दुकानों के अड्डे पर चर्चा का विषय बन गया।आनंद बाजार पत्रिका की आठ कॉलम की सुर्खियां थीं, "दीदी दू-शौ पार" यानी "दो सौ के पार दीदी।" ठीक उसी के नीचे की 'हेडलाइन' थी, "ममतार प्रोती आशा टोलेनी आम जोनोतार" यानी "ममता पर आम लोगों की उम्मीदें खत्म नहीं हुईं"। वाम दलों और कांग्रेस के जिस गठबंधन को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि वो ममता बनर्जी की मुश्किलें बढा सकते हैं, उस पर अखबार ने एक अलग रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक है, "बामेर धाकका, गढमील जोटेर ओंको" यानी "वाम दलों को धक्का, गठबंधन के अंक सब गड़बड़।"
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वहीं कोलकता से प्रकाशित बांग्ला दैनिक 'प्रोतिदिन' की सुर्खिया थीं, "इतिहाश गोड़लेन मोमोता" यानी 'ममता ने रचा इतिहास'। क्योंकि अकेले अपने बूते दोबारा सरकार बनाने वाली वो बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गई हैं। प्रोतिदिन ने आगे लिखा, "बांग्लाय शोबुझ झोर" यानी 'बंगाल में हरी आंधी'।दूसरे बांग्ला दैनिक 'बोरतोमान' ने लिखा, "सीपीएम प्राय शाफ" यानी 'सीपीएम प्रायः साफ़'.... "हारलेन जोटेर मुक्खो सुजोकान्तो" यानी 'जोट के मुखिया सूर्यकांत भी हारे'। अगर बात आनंद बाज़ार पत्रिका की जाए, तो तृणमूल के लोगों को अख़बार की सुर्ख़ियों से ज़्यादा निराशा नहीं हुई, क्योंकि उनका कहना है कि एक लबे अर्से से तृणमूल कांग्रेस के प्रति अख़बार का रूख ऐसा ही रहा है।



तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के मुताबिक़, जानकारों का कहना है कि यह मनमुटाव 'रॉयल कैलकटा गोल्फ़ क्लब' से शुरू हुआ, जिसके कप्तान आनंद बज़ार पत्रिका समूह के मुखिया हैं। आनंद बज़ार पत्रिका के कई प्रकाशन हैं, जैसे 'द टेलीग्राफ़' और कई अन्य बांग्ला पत्रिकाएं। इसके अलावा यह समूह, 'एबीपी न्यूज़' और 'स्टार आनन्दा' जैसे चैनल भी चलाता है। तृणमूल कांग्रेस के लोगों का कहना है कि गोल्फ़ क्लब सरकार से, उस सात एकड़ ज़मीन का हिस्सा मांग रहा था, जो 'वक़्फ़ बोर्ड' की संपत्ति थी। गोल्फ़ क्लब उस ज़मीन पर, एक सात सितारा खेल परिसर बनाना चाहता था। मगर सरकार ने इस ज़मीन को देने से इंकार कर दिया।




पार्टी के लोगों का कहना है कि यहीं से मनमुटाव की शुरआत हुई। उनका यह भी आरोप है कि वाम मोर्चा की सरकार के शासनकाल में इस प्रकाशन समूह से जुड़े लोगों को अमरीका की तर्ज़ पर, एक आधुनिक 'मॉडर्न आर्ट सेंटर' के लिए बड़ी राशि आवंटित भी की गयी थी, जिसे बाद में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने रद्द कर दिया। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कुछ और भी ज़मीन आवंटन के मामले हैं, जिसको लेकर दूरियां बढ़ती चली गईं और समूह ने हमेशा अपने प्रकाशनों के माध्यम से ममता बनर्जी की आलोचना शुरू कर दी। पार्टी का यहां तक आरोप है कि लेफ़्ट फ़्रंट और कांग्रेस के बीच हुए 'अस्वाभाविक' गठजोड़ में भी समूह की भूमिका रही है। मगर इन आरोपों की कोई पुष्टि नहीं हो पाई है।

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