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EC: 'एसआईआर कराने का निर्देश देना, चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण', सुप्रीम कोर्ट में आयोग का जवाब
Sat, 13 Sep 2025 01:19 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 13 Sep 2025 01:19 PM IST
सार
हलफनामे में कहा गया है कि 'मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन की निगरानी करने की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियां चुनाव आयोग के पास हैं। देश भर में नियमित अंतराल पर एसआईआर करने का कोई भी निर्देश चुनाव आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण होगा।'
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
चुनाव आयोग ने उच्चतम न्यायालय से कहा है कि देश भर में नियमित अंतराल पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने का कोई भी निर्देश चुनाव आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करेगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर जवाबी हलफनामे में चुनाव आयोग ने कहा कि उसके पास मतदाता सूची में संशोधन की नीति का पूरा अधिकार है। जवाबी हलफनामे में कहा गया है कि बिहार को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूची में संशोधन करने का निर्देश दिया गया है।
हलफनामे में चुनाव आयोग ने कही ये बात
हलफनामे में कहा गया है कि 'मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन की निगरानी करने की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियां चुनाव आयोग के पास हैं। देश भर में नियमित अंतराल पर एसआईआर करने का कोई भी निर्देश चुनाव आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण होगा।' चुनाव आयोग का यह हलफनामा वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दायर किया गया है। अश्विनी कुमार ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग को पूरे भारत में नियमित अंतराल पर, खासकर चुनाव से पहले मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करने का निर्देश देने की मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल भारतीय नागरिक ही देश की राजनीति और नीति तय करें।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'पॉश अधिनियम के तहत शिकायत छह माह में दर्ज कराना जरूरी', अदालत ने खारिज की याचिका
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चुनाव आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत, संसद और हर राज्य के विधानमंडल के सभी चुनावों के लिए मतदाता सूची की तैयारी और संचालन का पुनरीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग के पास है। 8 सितंबर को शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर अभ्यास में पहचान प्रमाण के रूप में शामिल किया जाना चाहिए और चुनाव आयोग से 9 सितंबर तक निर्देश को लागू करने के लिए कहा था।
बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर हंगामा जारी
बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद हो गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करना है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य उन लोगों के नाम हटाकर मतदाता सूची को ठीक करना है जो या तो मर चुके हैं, या उनके पास फर्जी पहचान पत्र हैं या जो अवैध प्रवासी हैं। चुनाव आयोग की 24 जून की अधिसूचना के अनुसार, बिहार में अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली है। एसआईआर के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या, सर्वेक्षण से पहले 7.9 करोड़ थी, जो सर्वेक्षण के बाद घटकर 7.24 करोड़ रह गई।
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हलफनामे में चुनाव आयोग ने कही ये बात
हलफनामे में कहा गया है कि 'मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन की निगरानी करने की संवैधानिक और वैधानिक शक्तियां चुनाव आयोग के पास हैं। देश भर में नियमित अंतराल पर एसआईआर करने का कोई भी निर्देश चुनाव आयोग के विशेष अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण होगा।' चुनाव आयोग का यह हलफनामा वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दायर किया गया है। अश्विनी कुमार ने अपनी याचिका में चुनाव आयोग को पूरे भारत में नियमित अंतराल पर, खासकर चुनाव से पहले मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करने का निर्देश देने की मांग की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि केवल भारतीय नागरिक ही देश की राजनीति और नीति तय करें।
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चुनाव आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत, संसद और हर राज्य के विधानमंडल के सभी चुनावों के लिए मतदाता सूची की तैयारी और संचालन का पुनरीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग के पास है। 8 सितंबर को शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि आधार कार्ड को 12वें दस्तावेज के रूप में बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर अभ्यास में पहचान प्रमाण के रूप में शामिल किया जाना चाहिए और चुनाव आयोग से 9 सितंबर तक निर्देश को लागू करने के लिए कहा था।
बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर हंगामा जारी
बिहार में मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद हो गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों को उनके मताधिकार से वंचित करना है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य उन लोगों के नाम हटाकर मतदाता सूची को ठीक करना है जो या तो मर चुके हैं, या उनके पास फर्जी पहचान पत्र हैं या जो अवैध प्रवासी हैं। चुनाव आयोग की 24 जून की अधिसूचना के अनुसार, बिहार में अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली है। एसआईआर के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या, सर्वेक्षण से पहले 7.9 करोड़ थी, जो सर्वेक्षण के बाद घटकर 7.24 करोड़ रह गई।
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