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भारत-चीन का शांतिपूर्ण तरीके से मुद्दे सुलझाने पर जोर, पीएम मोदी ने दिया कूटनीतिक सबक

Fri, 05 Jun 2020 11:06 PM IST
Rohit Ojha शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: Rohit Ojha Updated Fri, 05 Jun 2020 11:06 PM IST
सार

  • संयुक्त सचिव स्तरीय वार्ता में दिया द्विपक्षीय रिश्ते पर जोर
  • शनिवार को सुबह लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और चीन के मेजर जनरल लियू लिन करेंगे बात
  • चीन ने बदला अपना सैन्य कमांडर, पीएम मोदी ने दिया कूटनीतिक सबक

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Diplomatic initiative between India and China emphasis on resolving issues in a peaceful manner
भारत चीन

विस्तार

शनिवार की सुबह मोल्डो में भारत और चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच में होने वाली वार्ता से पहले पड़ोसी देश ने अहम कदम उठाए हैं। वार्ता से ठीक पहले चीन ने अपना सैन्य कमांडर बदल दिया। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की वेस्टर्न थियेटर कमांड लेफ्टिनेंट जनर शू किलिंग को सीमा बलों का नया कमांडर नियुक्त किया है। इसके ठीक कुछ समय बाद दूसरी अच्छी खबर आई है। 

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भारतीय विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) नवीन श्रीवास्तव और चीनी विदेश मंत्रालय में महानिदेश वू च्यांगाओ के बीच में वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए वार्ता हुई। संयुक्त सचिव स्तर के दोनों अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच में द्विपक्षीय रिश्तों, शांति, स्थायित्व और समन्वय की बहाली पर जोर दिया है।
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नवीन श्रीवास्तव और च्यांगाओ के बीच में हुई वार्ता को काफी अहम माना जा रहा है। इसके अलावा भारतीय सेना के अधिकारी चीन की वेस्टर्न थियेटर कमान द्वारा अपना कमांडर बदलने को भी काफी अहमियत दे रहे हैं।
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इन संकेतों को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच में होने वाली वार्ता के क्रम में सकारात्मक माना जा रहा है। श्रीवास्तव और च्यांगाओ ने लद्दाख में पैदा हुई ताजा स्थिति पर चर्चा की है। दोनों अधिकारियों ने दोनों देशों के शिखर नेताओं के बेहतर संबंध का हवाला देते हुए शांति की स्थापना, स्थाई और संतुलित रिश्ते को समय की जरूरत बताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया कूटनीतिक सबक

भारत-चीन रिश्ते के इतिहास में यह एक दुर्लभ समय कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच में लद्दाख में जारी तनाव को लेकर वार्ता की कोई सूचना नहीं है। विदेश मंत्री जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने द्वारा भी अपने चीन के समकक्षों से चर्चा की भी खबर नहीं है, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने अमेरिका ने क्रमश: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर से चर्चा की। इस चर्चा में चीन की घुसपैठ का मुद्दा भी उठा। पिछले 20 साल में भी इस तरह की कूटनीतिक पहल शायद ही हुई हो। 1962 के बाद भारत ने अधिकारिक रूप से चीन के साथ मुद्दे का निबटारा द्विपक्षीय स्तर पर ही किया है। इसमें किसी तीसरे देश के साथ चर्चा का जिक्र सुनने में नहीं आया।



इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी की अपने समकक्ष ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री से भी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए द्विपक्षीय चर्चा हुई। भारत की शीर्ष नेतृत्व जापान के भी संपर्क में है। गौरतलब है कि भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का एक फोरम (2+2) है। चारों देश मिलकर संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास भी करते हैं। चीन इस क्वाड्रीलेट्रल फोरम से चिढ़ता भी है। माना जा रहा है कि भारत के इस रुख से चीन को खूब मिर्ची लगी है। इसे चीन के लिए कूटनीतिक डोज भी माना जा रहा है।
 

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