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बरसाती नाले में खोदते हैं गड्ढा : महाराष्ट्र के चंद्रपुर के सीमावर्ती गांवों में संकट, बीते 75 सालों से पानी के लिए लोग बेहाल

Sun, 15 May 2022 05:41 AM IST
योगेश साहू सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई।
सुरेन्द्र मिश्र, अमर उजाला, मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 15 May 2022 05:41 AM IST
सार

समस्या यह है कि जो नल योजना के तहत हैं, उसमें नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होती और कुएं सूख चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पानी की पाइपलाईन कई जगह लीकेज है। इतने अधिक लीके से इन गांवों तक पानी आते-आते बेहद दूषित हो जाता है।

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Digging a pit in rainy drain: crisis in the border villages of Chandrapur, Maharashtra, people are suffering for water for the last 75 years
प्रतीकात्मक तस्वीर।

विस्तार

देश आजादी का अमृत मोहत्सव मना रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के कुछ गांव ऐसें हैं जहां अब भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे है। आलम यह है कि भीषण तपती गर्मी में चंद्रपुर जिले के कई गांवों में लोग नाले में गड़्ढे खोदकर पानी निकालने के लिए मजबूर हैं। इन गड्ढों मे गंदा पानी होता है लेकिन उसे छानकर भरा जाता है। सालों से लोग पानी के लिए बेहाल हैं, लेकिन राज्य सरकार तकलीफ सुनने को तैयार नहीं है।

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चंद्रपुर जिले के ऐसे तीन गांव हैं जहां बरसाती नाले में गड्ढे खोदकर पानी निकाला जाता है। जिसे स्थानीय भाषा में चूहा बनाना कहते हैं। ये गांव हैं हेटी नांदगांव, टोले नांदगांव और चेक नांदगांव जो महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर स्थित हैं। करीब दो हजार की आबादी वाले इन गांवों में पानी की बड़ी-बड़ी टंकी बनी हैं। कुछ समय पहले प्रादेशिक सकमूर जापूर्ति योजना के अंतर्गत इन गांवों में पानी लाने का प्रयास किया गया था। इसके बाद कुछ घरों में नल लगाए गए हैं और कुछ घरों में कुएं भी हैं। फिरभी पानी का संकट बरकरार है।
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युवाओं का नहीं हो पा रहा विवाह
महाराष्ट्र और तेलंगाना राज्य की सीमा पर बसे इऩ गांवों में जलसंकट के कारण युवाओं के विवाह में भी बाधाएं उत्पन्न हो रही है। टोले नांदगांव के निवासी बताते हैं कि गांवों में पानी की किल्लत के चलते गांव के युवाओं के साथ कोई भी अपनी बेटी ब्याहना नहीं चाहता। क्योंकि कभी सुबह-सुबह तो कभी चिलचिलाती धूप में पानी की तलाश के लिए महिलाओं को ही जाना पड़ता है। आजादी के 75 सालों में जिले के नेताओं की अनदेखी और अफसरों की बेरूखी के कारण जलसंकट का स्थाई समाधान नहीं किया जा सका है।
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सूख गए कुएं, फटीं पाइप लाइनें
समस्या यह है कि जो नल योजना के तहत हैं, उसमें नियमित पानी की आपूर्ति नहीं होती और कुएं सूख चुके हैं। ग्रामीण बताते हैं कि पानी की पाइपलाईन कई जगह लीकेज है। इतने अधिक लीके से इन गांवों तक पानी आते-आते बेहद दूषित हो जाता है।

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