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क्या मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की गलती से भाजपा ने कुछ नहीं सीखा?
Tue, 09 Apr 2019 10:10 PM IST
Amit Digital
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Digital
Updated Tue, 09 Apr 2019 10:10 PM IST
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नरेंद्र मोदी, अमित शाह (फाइल)
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भाजपा ने सोमवार को अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। लेकिन कांग्रेस की गरीबों को 72 हजार रुपये की वार्षिक सहायता देने की तुलना में भाजपा के घोषणा पत्र में कोई बड़ा लोकलुभावना वायदा नहीं किया गया। इससे पार्टी के कुछ नेताओं को चिंता है कि इससे वे चुनाव प्रचार में पिछड़ सकते हैं और लोकसभा चुनाव का परिणाम भी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की तरह नकारात्मक हो सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता इस सवाल का हल खोजने में जुट गए हैं।
भाजपा नेता भी दोनों पार्टियों के घोषणा पत्रों के बीच के फर्क को अच्छी तरह महसूस कर रहे हैं। लेकिन उनका मानना है कि जनता कांग्रेस के दावे को उतनी आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। इस बीच पार्टी की रणनीति कांग्रेस के पुराने इतिहास को आगे रखकर यह साबित करने की कोशिश होगी कि कांग्रेस अपने वायदे पर कभी पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
इंदिरा सरकार से लेकर मनमोहन सरकार तक के आंकड़े उसके दावों की पुष्टि करते दिख सकते हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों की कर्जमाफी में हो रही अनियमितता को भी पार्टी इसके लिए आधार बना सकती है। पार्टी का मानना है कि जब उनके स्टार कैंपेनर नरेंद्र मोदी जनता के सामने यह बात रखेंगे तो जनता उनकी बात पर यकीन करेगी। भाजपा के दिग्गज नेताओं के भाषणों में इस तरह की बात अभी से दिखने लगी है। समय के साथ यह हमला और तेज हो सकता है।
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भाजपा को इस बात की भी उम्मीद है कि राष्ट्रवाद, 2022 तक 75 बिन्दुओं के काम और 2047 तक आजादी के 100 साल पर देश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य युवाओं को प्रेरित करेगी। लेकिन कांग्रेस के 22 लाख नौकरियों के मुकाबले भाजपा का राष्ट्रवाद उसे कितना आकर्षित कर पायेगा, यह देखने वाली बात होगी।
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस की किसान कर्ज माफी की घोषणा की असलियत सामने आ गई है। कुछ लोगों के 25 रूपये माफ हो रहे हैं तो कुछ लोगों के दो-चार सौ माफ किये जा रहे हैं, इसलिए जनता अब उनको सत्ता में लाकर पछता रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि लोकसभा में भाजपा पिछली बार की तरह बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी। देश के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह के परिणाम मिलने की उम्मीद है।
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भाजपा नेता भी दोनों पार्टियों के घोषणा पत्रों के बीच के फर्क को अच्छी तरह महसूस कर रहे हैं। लेकिन उनका मानना है कि जनता कांग्रेस के दावे को उतनी आसानी से स्वीकार नहीं करेगी। इस बीच पार्टी की रणनीति कांग्रेस के पुराने इतिहास को आगे रखकर यह साबित करने की कोशिश होगी कि कांग्रेस अपने वायदे पर कभी पूरी तरह खरी नहीं उतरती।
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इंदिरा सरकार से लेकर मनमोहन सरकार तक के आंकड़े उसके दावों की पुष्टि करते दिख सकते हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों की कर्जमाफी में हो रही अनियमितता को भी पार्टी इसके लिए आधार बना सकती है। पार्टी का मानना है कि जब उनके स्टार कैंपेनर नरेंद्र मोदी जनता के सामने यह बात रखेंगे तो जनता उनकी बात पर यकीन करेगी। भाजपा के दिग्गज नेताओं के भाषणों में इस तरह की बात अभी से दिखने लगी है। समय के साथ यह हमला और तेज हो सकता है।
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भाजपा को इस बात की भी उम्मीद है कि राष्ट्रवाद, 2022 तक 75 बिन्दुओं के काम और 2047 तक आजादी के 100 साल पर देश को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य युवाओं को प्रेरित करेगी। लेकिन कांग्रेस के 22 लाख नौकरियों के मुकाबले भाजपा का राष्ट्रवाद उसे कितना आकर्षित कर पायेगा, यह देखने वाली बात होगी।
क्या कहते हैं भाजपा नेता
बीजेपी उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे कहते हैं कि मध्यप्रदेश में पार्टी की हार नहीं हुई। महज कुछ सीटों पर कुल मिलकर दो हजार वोटों के अंतर से हुई तथ्यात्मक हार है, लेकिन हमने अपना आधार वोट बैंक नहीं खोया है। हम उसी के बल पर लोकसभा में बेहतर परिणाम हासिल करेंगे।भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस की किसान कर्ज माफी की घोषणा की असलियत सामने आ गई है। कुछ लोगों के 25 रूपये माफ हो रहे हैं तो कुछ लोगों के दो-चार सौ माफ किये जा रहे हैं, इसलिए जनता अब उनको सत्ता में लाकर पछता रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि लोकसभा में भाजपा पिछली बार की तरह बड़ी जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी। देश के अन्य हिस्सों से भी इसी तरह के परिणाम मिलने की उम्मीद है।