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Dhankhar: अनुच्छेद 136 के इस्तेमाल पर उपराष्ट्रपति चिंतित, कहा- इससे मध्यस्थता प्रक्रिया को हो रहा नुकसान

Sat, 01 Mar 2025 05:14 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Sat, 01 Mar 2025 05:14 PM IST
सार

दिल्ली में मध्यस्थता पर एक सम्मेलन के दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अनुच्छेद 136 के उपयोग से मध्यस्थता प्रक्रिया पर पड़ रहे प्रभाव पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि विशेष अनुमति याचिका को पहले संकीर्ण दरार माना जाता था, लेकिन इससे अब मध्यस्थता प्रक्रिया को नुकसान पहुंच रहा है। 
 

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Dhankhar: Vice President worried over use of Article 136, said- it is causing harm to the arbitration process
जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति - फोटो : X / @VPIndia

विस्तार

दिल्ली में मध्यस्थता पर एक सम्मेलन के दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अनुच्छेद 136 के उपयोग से मध्यस्थता प्रक्रिया पर पड़ रहे प्रभाव पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि विशेष अनुमति याचिका को पहले संकीर्ण दरार माना जाता था, लेकिन इससे अब मध्यस्थता प्रक्रिया को नुकसान पहुंच रहा है। संविधान का अनुच्छेद 136 सर्वोच्च न्यायालय को किसी भी निर्णय या आदेश के खिलाफ अपील करने की विशेष अनुमति देता है। इसे विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) कहा जाता है।

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उन्होंने मध्यस्थता मामलों के डोमेन विशेषज्ञों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। धनखड़ ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का उपयोग वाणिज्यिक विवादों से जुड़े जटिल मामलों को संभालने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले अनुच्छेद 136 के उपयोग को एक दरार माना जाता था। लेकिन अब इस दीवार को ध्वस्त कर दिया गया है। इसमें एक मजिस्ट्रेट को क्या करना है, एक सत्र न्यायाधीश को क्या करना है, एक जिला न्यायाधीश को क्या करना है, एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को क्या करना है?
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीवार गिर जाने से मध्यस्थता प्रक्रिया को नुकसान पहुंच रहा है। मैं देश के चिंतित नागरिक के रूप में सुझाव दे रहा हूं कि जिस मुद्दे पर आप चर्चा कर रहे हैं, वह सूक्ष्म, लघु उद्योगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वे सरल, आसान मध्यस्थता प्रक्रिया चाहते हैं।
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मध्यस्थता में डोमेन विशेषज्ञों की भागीदारी की जरूरत पर उपराष्ट्रपति ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की टिप्पणी को दोहराया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता प्रक्रिया पुराने लोगों का क्लब बन गई है। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि पूर्व सीजेआई ने मध्यस्थता प्रक्रिया में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की भागीदारी का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि मुझे एक पल के लिए भी गलत नहीं समझा जाना चाहिए। इस देश के सेवानिवृत्त न्यायाधीश मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए संपत्ति हैं, लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां मध्यस्थ न्यायाधिकरण को समुद्र विज्ञान, विमानन, बुनियादी ढांचे के क्षेत्र के विशेषज्ञों के जरिये पूरक बनाने की आवश्यकता है। धनखड़ ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र बनने के करीब नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता की बात करें तो हम उन लोगों के दिमाग में नहीं हैं जो हमारे साथ वाणिज्यिक संबंध रखते हैं।


संस्कृति और शिक्षा का हिस्सा बने सनातन
मुंबई में कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि सनातन को हमारी संस्कृति और शिक्षा का हिस्सा बनना होगा क्योंकि यह समावेशिता का प्रतीक है। हमें सनातन से अच्छी तरह से जुड़े रहना चाहिए।

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