Parliament: राहुल के बयान पर चर्चा से जुड़ी खरगे की आपत्ति को धनखड़ ने किया खारिज, कांग्रेस ने किया पलटवार
सत्तारूढ़ भाजपा ने फिर से मांग की कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राज्यसभा आना चाहिए और हाल ही में ब्रिटेन में 'लोकतंत्र खतरे में' वाली अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। हालांकि, कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जो व्यक्ति राज्यसभा का सांसद नहीं है, उसे सदन में नहीं बुलाया जा सकता।
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राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के उस 'व्यवस्था के प्रश्न' को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उस समय लोकसभा सांसद रहे राहुल गांधी पर चर्चा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि उच्च सदन में चर्चा के दायरे से बाहर कोई मुद्दा या व्यक्ति नहीं हो सकता।
ब्रेक के बाद संसद का बजट सत्र फिर से शुरू होने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा ने फिर से मांग की कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राज्यसभा आना चाहिए और हाल ही में ब्रिटेन में 'लोकतंत्र खतरे में' वाली अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। हालांकि, कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जो व्यक्ति राज्यसभा का सांसद नहीं है, उसे सदन में नहीं बुलाया जा सकता है और लोकसभा के सांसद के बारे में कोई चर्चा नहीं हो सकती है। धनखड़ ने कहा, सदन के नेता पीयूष गोयल द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रमाणित रिकॉर्ड से पता चलता है कि विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता द्वारा विदेश में दिए गए बयान पर माफी की उनकी मांग तथ्यात्मक रूप से आधारित है।'
उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे द्वारा उठाई गई आपत्ति पर अपना फैसला सुनाया। हालांकि, धनखड़ ने न तो स्पष्ट रूप से भाजपा की इस मांग का जिक्र किया कि गांधी को माफी मांगने के लिए राज्यसभा आना चाहिए और न ही यह संकेत दिया कि इसकी अनुमति है या नहीं। उन्होंने कहा, 'इस महत्वपूर्ण पहलू पर गंभीरता से विचार करने के बाद मेरा मत है कि राज्यसभा में चर्चा के दायरे से बाहर कोई मुद्दा या व्यक्ति नहीं हो सकता और यह विशेष रूप से सदन और सभापति के नियमन के अधीन है। उन्होंने खरगे द्वारा दिए उदाहरणों को खारिज करते हुए कहा कि उनका इस मुद्दे पर कोई प्रभाव नहीं है।
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उन्होंने कहा कि 13 मार्च को खरगे ने सदन के नेता पीयूष गोयल के दावों का जवाब देते हुए व्यवस्था का प्रश्न उठाया कि राज्यसभा में किसी सदस्य पर या उसके बारे में कोई चर्चा नहीं हो सकती है जो लोकसभा या कोई भी व्यक्ति जो राज्यसभा का सदस्य नहीं है। गोयल ने विदेश में विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता (राहुल गांधी) द्वारा भारत के लोकतंत्र पर हमला करने, भारत की संसद का अपमान करने के लिए माफी की मांग की थी।
पीठासीन अधिकारी निष्पक्ष होने चाहिए, सत्तापक्ष के साथ वफादारी नहीं दिखा सकते: कांग्रेस
कांग्रेस ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ द्वारा नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा उठाए गए व्यवस्था के प्रश्न को खारिज किए जाने के बाद बुधवार को कहा कि पीठासीन अधिकारियों से निष्पक्ष और तटस्थ होने की अपेक्षा की जाती है तथा वे सत्तापक्ष के साथ अपनी वफादारी नहीं दिखा सकते।
पार्टी महासचिव और राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक (व्हिप) जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘विधायिका के पीठासीन अधिकारियों से निष्पक्ष और तटस्थ होने की अपेक्षा की जाती है। वे सत्ताधारी दल के प्रति अपने पूर्वाग्रह या अपनी वफादारी प्रदर्शित नहीं कर सकते। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सम्मान प्राप्त करना चाहिए, कभी खत्म न होने वाले उपदेश देकर नहीं।’’
उल्लेखनीय है कि सभापति धनखड़ ने राज्यसभा में खरगे द्वारा उठाये गये व्यवस्था के प्रश्न को खारिज कर दिया। व्यवस्था के प्रश्न के तहत खरगे ने आसन से राज्यसभा की कार्यवाही में से सदन के नेता पीयूष गोयल के वक्तव्य के उन अंशों को हटाने की मांग की थी जिसमें राहुल गांधी का नाम लिये बिना उनसे माफी मांगने को कहा गया था। खरगे ने कहा था कि गांधी चूंकि दूसरे सदन के सदस्य हैं, इसलिए उनका परोक्ष रूप से भी उल्लेख नहीं हो सकता है।
धनखड़ ने अपनी व्यवस्था में कहा कि सदन के नेता पीयूष गोयल ने अपने वक्तव्य में किसी का भी नाम नहीं लिया था, इसलिए खरगे की आपत्ति निराधार है। सभापति द्वारा व्यवस्था सुनाये जाने के बाद सदन में हंगामा फिर तेज हो गया। हंगामा थमते नहीं देख उन्होंने बैठक को दोपहर दो बजकर 18 मिनट पर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।