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Air Incidents: विमान हादसे के बाद हवाई सेवा पर DGCA सख्त, उड़ान संचालन को लेकर दिशा-निर्देशों में किया संशोधन

Sun, 22 Jun 2025 07:14 PM IST
राहुल कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sun, 22 Jun 2025 07:14 PM IST
सार

 डीजीसीए ने प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में उड़ान संचालन को लेकर दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। नियामक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि "सुरक्षा को समयबद्धता से ऊपर रखा जाए" और पायलटों को अनिश्चित मौसम की स्थिति में उड़ानों को डायवर्ट करने या लौटाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

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DGCA revised operational guidelines for operators during adverse weather conditions
डीजीसीए - फोटो : ANI

विस्तार

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने प्रतिकूल मौसम के दौरान एयरलाइन के लिए अपने परिचालन दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। इनमें इस बात पर बल दिया गया है कि सुरक्षा को ‘समय-सारिणी के पालन’ से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा पायलटों को अप्रत्याशित परिस्थितियों में उड़ानों का मार्ग बदलने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

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अनुसूचित और गैर-अनुसूचित एयरलाइन कंपनियों को परिचालन परिपत्र जारी करते हुए डीजीसीए ने कहा कि पायलटों को दृश्य संकेतों की उपकरणों से जांच करनी चाहिए, ताकि सटीक दृष्टिकोण और लैंडिंग आकलन सुनिश्चित हो सके, तथा बारिश में या गीली हवाई पट्टी पर रात्रि परिचालन के दौरान होने वाले दृश्य भ्रम से निपटा जा सके। यह सर्कुलर हाल ही में केदारनाथ क्षेत्र में हुई हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं और श्रीनगर जा रही एक इंडिगो फ्लाइट में गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद आया है।
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परिचालन संबंधी अनिश्चितता पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का हवाला देते हुए डीजीसीए ने उड़ान चालक दल को अत्यधिक सतर्कता बनाए रखने की सलाह दी है, ‘जिसमें समय-सारिणी के पालन पर सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। 
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मुख्य बिंदु:

  • डीजीसीए ने रविवार को एक बयान में कहा, “कैप्टन को मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार मार्ग परिवर्तन या वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।”
  • निर्देशों में कहा गया है कि चालक दल के सदस्यों से प्रतिकूल मौसम के कारण मार्ग बदलने, वापसी या मार्ग बदलने पर विचार करने की अपेक्षा की जाती है, जिसमें गंभीर कंपन, हवा का झोंका, बर्फ जमना, अवरोधक तूफान या अचानक दृश्यता में गिरावट शामिल है।
  • इसके अलावा, एयरलाइन कंपनियों और पायलटों को निर्णय लेने के लिए रूढ़िवादी दृष्टिकोण अपनाने के साथ-साथ मौसम से बचने की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
  • पायलटों को पहले से ही विचलन की योजना बनाने और संवहनीय गतिविधि से कम से कम 20 एनएम (नॉटिकल माइल्स) की दूरी बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।


नियामक ने पायलट मौसम रिपोर्ट के महत्व के साथ-साथ प्रतिकूल मौसम की स्थिति और कंपन के दौरान यात्रियों, चालक दल के सदस्य और हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) के साथ संवाद करने पर जोर दिया। बयान के अनुसार इसमें समय पर ब्रीफिंग, यात्रियों के लिए अग्रिम घोषणाएं, तथा बेहतर समन्वय और परिस्थितिजन्य जागरूकता के लिए एटीसी को कंपन की सूचना देना शामिल है। 

आइस क्रिस्टल आइसिंग जैसी जटिल स्थितियों का पहली बार उल्लेख किया गया है। इसमें पायलटों को सलाह दी गई है कि वे वैश्विक नियमों के अनुरूप ऐसे क्षेत्रों में चढ़ने या उतरने के बजाय क्षितिज रूप से नेविगेट करें। मौसम से बचाव की योजना पहले से तैयार रखने को कहा गया है। यात्री, क्रू और एटीसी से संवाद बनाए रखने, समय पर सूचना देने, और टर्बुलेंस की रिपोर्ट साझा करने की महत्ता पर जोर दिया गया है।

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