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मंजिल के करीब पहुंचकर उद्धव के हाथ लगी सिर्फ नाकामी

Sat, 23 Nov 2019 11:45 AM IST
अनिल पांडेय शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sat, 23 Nov 2019 11:45 AM IST
सार

  • एनसीपी विधायक दल के नेता के तौर पर अजीत पवार ने दिया समर्थन
  • राजभवन ने राष्ट्रपति से ली राष्ट्रपति शासन हटाने की मंजूरी
  • पर्दे के पीछे भाजपा अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने चलाया आपरेशन महाराष्ट्र

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Devendra Fadnavis takes oath of Maharashtra CM, President Rule revoked
महाराष्ट्र में नई सरकार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उद्धव ठाकरे ने पिता और शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की बनाई हर दहलीज को लांघा। किंग मेकर रहने वाली शिवसेना से बेगर किंग शिवसेना प्रमुख बने। राज्य का मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हो गए और अंत में हाथ में कुछ नहीं आया। महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने उद्धव ठाकरे को लेकर इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। पाटील का कहना है कि सत्ता के लिए शिवसेना सबकुछ करने को तैयार हो गई थी।

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शिवसेना को स्थापित करने के बाद बाल ठाकरे अपने निवास मातोश्री से विशेष स्थिति में ही निकलते थे। अपने आवास पर ही उन्होंने प्रधानमंत्री समेत राजनीतिक दलों के प्रमुखों से भेंट की थी। इतना ही नहीं, ठाकरे परिवार ने कभी चुनाव नहीं लड़ा। उनके परिवार से कोई विधायक, सांसद नहीं बना लेकिन राज्य में कई बार सरकार बनाई। शिवसैनिकों को मुख्यमंत्री बनाया। यह पहली बार हुआ है जब उद्धव ठाकरे के पुत्र आदित्य ठाकरे ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते। उद्धव ठाकरे सरकार बनाने के लिए मातोश्री से बाहर निकले और कांग्रेस, एनसीपी के नेताओं से भेंट की।
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इतना ही नहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार की घोषणा के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हो गए। शिवसेना सांसद संजय राऊत ने भी इसकी पुष्टि की। वह कांग्रेस और भाजपा की शर्त पर एनडीए छोड़कर बाहर आए। उद्धव ठाकरे ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम, समन्वय समिति पर भी सहमति दी और अंत में मुख्यमंत्री भी नहीं बन पाए।

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ऐसे बनी भाजपा की सरकार

माना जा रहा है कि भाजपा लगातार अजित पवार के संपर्क में थी। अजित को एनसीपी ने विधायक दल का नेता चुन लिया था। वैधानिक तौर पर भाजपा इस तकनीकी आवश्यकता को समझ रही थी। बताते हैं भाजपा का खेल पर्दे के पीछे और एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस का राजनीतिक खेल स्क्रीन पर चल रहा था। सूत्र बताते हैं प्रधानमंत्री से शरद पवार के मिलकर लौटने के बाद भाजपा ने तेजी से इस खेल को आगे बढ़ाया।


अजीत पवार के जरिए पार्टी सभी अंदरूनी गतिविधियों पर नजर रखती रही। अजीत पवार पर महाराष्ट्र सहकारी बैंक घाटाला समेत अन्य आरोप हैं। बताते है शिवसेना और उद्धव ठाकरे के पूरी तरह से एक्सपोज होने के बाद भाजपा ने रातों रात पूरा परिदृश्य बदल दिया।


एनसीपी के विधायक दल के नेता अजित पवार ने भाजपा के समर्थन में चिट्ठी दे दी और राज्यपाल के सामने भाजपा को सरकार बनाने, शपथ लेने के लिए आमंत्रित करने का रास्ता साफ हो गया। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति से राष्ट्रपति शासन हटाने की मंजूरी ली और उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री, अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपत दिला दी।

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