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संविधान विवाद का हल ढूंढने के लिए नेपाल ने मांगा भारत का साथ
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Sat, 20 Aug 2016 02:56 AM IST
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सुषमा-राजनाथ से मिले नेपाल के उप प्रधानमंत्री
- फोटो : pti
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नेपाल ने अपने नए संविधान पर जारी विवाद का हल निकालने के लिए भारत का साथ मांगा है। गुरूवार को भारत यात्रा पर आए उप प्रधानमंत्री बिमलेंद्र निधि ने इस क्रम में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से अलग-अलग मुलाकात की। मुलाकात के दौरान निधि ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रंचड और राष्ट्रपति विद्या देवी भंडाली की संभावित भारत यात्रा पर भी चर्चा की। निधि संभवत: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को नेपाल आने का निमंत्रण देंगे।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में पहली बार नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रचंड ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा में भारत पर चीन को तरजीह दी थी। हालांकि उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री ओली ने भी चीन से अपनी जगजाहिर करीबी के बावजूद पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को तरजीह दी थी। निधि की इस भारत यात्रा के दौरान प्रचंड के साथ-साथ नेपाल की राष्ट्रपति की भारत यात्रा के संदर्भ में बातचीत हुई।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक निधि ने विदेश मंत्री से मुलाकात में जहां नेपाल के संविधान पर जारी विवाद का सर्वमान्य हल ढूंढने की इच्छा जताई। इस दौरान विवाद का सर्वमान्य हल ढूंढने में भारत का साथ मांगा। वहीं गृह मंत्री के साथ चर्चा में भारत से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर बातचीत की। निधि के समक्ष भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह नए संविधान में सभी वर्गों की समान भागीदारी का पक्षधर है।
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गौरतलब है कि ओली के कार्यकाल के दौरान नए संविधान पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी चरम पर पहुंच गई थी। इस दौरान नेपाल ने पहली बार भारत के खिलाफ न सिर्फ संयुक्त राष्टï्र का दरवाजा खटखटाया था, बल्कि चीन से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति का गंभीर प्रयास भी किया था।
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गौरतलब है कि वर्ष 2008 में पहली बार नेपाल का प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रचंड ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा में भारत पर चीन को तरजीह दी थी। हालांकि उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री ओली ने भी चीन से अपनी जगजाहिर करीबी के बावजूद पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को तरजीह दी थी। निधि की इस भारत यात्रा के दौरान प्रचंड के साथ-साथ नेपाल की राष्ट्रपति की भारत यात्रा के संदर्भ में बातचीत हुई।
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सरकारी सूत्रों के मुताबिक निधि ने विदेश मंत्री से मुलाकात में जहां नेपाल के संविधान पर जारी विवाद का सर्वमान्य हल ढूंढने की इच्छा जताई। इस दौरान विवाद का सर्वमान्य हल ढूंढने में भारत का साथ मांगा। वहीं गृह मंत्री के साथ चर्चा में भारत से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर बातचीत की। निधि के समक्ष भारत ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह नए संविधान में सभी वर्गों की समान भागीदारी का पक्षधर है।
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गौरतलब है कि ओली के कार्यकाल के दौरान नए संविधान पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनातनी चरम पर पहुंच गई थी। इस दौरान नेपाल ने पहली बार भारत के खिलाफ न सिर्फ संयुक्त राष्टï्र का दरवाजा खटखटाया था, बल्कि चीन से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति का गंभीर प्रयास भी किया था।