Gen Bipin Rawat: 'खुद में एक संस्था थे देश के पहले CDS जनरल रावत'; उप सेना प्रमुख सुब्रमणि ने दी श्रद्धांजलि
भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को इस दुनिया से गए आज तीन साल हो गए। इस मौके पर भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने उन्हें विद्वान सैनिक और भविष्य की कल्पना करने की असाधारण क्षमता वाले सैन्य सुधारक करार दिया।
विस्तार
आज से तीन साल पहले यानी साल 2021 में जब आज के दिन तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार दोपहर जब सेना के एमआई-17वी-5 हेलीकॉप्टर क्रैश होने की खबर आई तो पूरा देश सन्न रहा गया था। इस हेलिकॉप्टर में देश के चीफ आफ डिफेंस स्टाफ यानी सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत कई लोग सवार थे। शाम होते-होते वह खबर आई, जिसने हर भारतवासी की आंखें नम कर दीं, खबर थी रावत के निधन की। इस हादसे में उनकी पत्नी मधुलिका समेत 13 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को इस दुनिया से गए आज तीन साल हो गए। इस मौके पर भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने उन्हें विद्वान सैनिक और भविष्य की कल्पना करने की असाधारण क्षमता वाले सैन्य सुधारक करार दिया।
भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि तीन साल हो गए हैं जब हमने इस बहादुर देशभक्त, एक सक्षम सैन्य रणनीतिकार और एक बेहतरीन नेता को खो दिया। आज का कार्यक्रम देश के सबसे महान नेताओं और सैन्य पेशेवरों में से एक की शानदार विरासत को श्रद्धांजलि देने का है।
उन्होंने कहा कि जनरल रावत एक तेजतर्रार नेता थे, उनके पास एक सावधानीपूर्वक सोची-समझी नेतृत्व शैली थी जिसने उन्हें न केवल भारतीय सेना बल्कि पूरे देश के लिए खड़ा किया। सेना उप प्रमुख ने कहा कि चार दशकों से अधिक के उनके विशिष्ट करियर में जनरल रावत की उपलब्धियां सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के सभी पहलुओं में उल्लेखनीय हैं। उन्होंने कहा कि कर्तव्य के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता, तीक्ष्ण रणनीतिक सूझबूझ और असाधारण दूरदर्शिता के लिए जाने जाने वाले जनरल रावत एक सैनिक से कहीं बढ़कर थे। वे अपने आप में एक संस्था थे। चुनौतियों और जीत से भरा उनका सफर नेतृत्व में एक मास्टरक्लास है।
कार्यक्रम में बोलते हुए सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद ने भी उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि जब मुझे नौसेना मुख्यालय में विदेशी सहयोग और खुफिया के लिए नौसेना स्टाफ के आकलन प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया, तो उनके साथ बातचीत करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जनरल रावत हमेशा यथास्थिति को बदलने और परिचालन चुनौतियों को एक अलग मानसिकता के साथ देखने के लिए तैयार रहते थे।
गौरतलब है कि 8 दिसंबर, 2021 को जनरल रावत अपनी पत्नी मधुलिका रावत और 11 अन्य लोगों के साथ तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हो गए थे। उन्हें पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम और पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया था।
जनरल रावत के बारे में जानें
जनरल बिपिन रावत का जन्म 16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में हुआ था। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद से रिटायर हुए थे। उनकी मां का संबंध परमार वंश से था। जनरल रावत की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के कैंबरीन हॉल स्कूल और शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल से हुई। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खडक वासला से जुड़े। इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में प्रवेश लिया। यहां उन्हें ‘सोर्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। 2011 में उन्हें सैन्य-मीडिया सामरिक अध्ययन पर शोधकार्य के लिए चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ की ओर से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) से सम्मानित किया गया। वे फोर्ट लीवनवर्थ, अमेरिका में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंग्टन और हायर कमांड कोर्स के ग्रेजुएट भी रहे। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल और मैनेजमेंट तथा कंप्यूटर स्टडीज में भी डिप्लोमा किया।
गोरखा राइफल्स में कमीशन
जनरल रावत को दिसंबर 1978 में 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन मिला। खास बात यह है कि उनके पिता भी इसी यूनिट में अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनके पास कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में कामकाज का लंबा अनुभव था। 1986 में चीन से लगी सीमा पर इन्फेंट्री बटालियन के प्रमुख पद की जिम्मेदारी संभाली थी। चार दशकों की सेवा के दौरान ब्रिगेडियर, कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ सदर्न कमांड, मिलिट्री ऑपरेशन्स डायरेक्टोरेट में जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी समेत कई बड़े पदों पर रहे। संयुक्त राष्ट्र की पीस कीपिंग फोर्स का भी हिस्सा रहे और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बहुराष्ट्रीय सेना ब्रिगेड की कमान भी संभाली।
जनरल रावत ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने में भी अहम भूमिका निभाई थी। उनकी देखरेख में वर्ष 2015 में म्यांमार में क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन चलाया गया था। मणिपुर में 18 सैनिकों की शहादत से देश में उबाल था। जनरल रावत ने पलटवार की रणनीति बनाई। इस सर्जिकल स्ट्राइक में सेना ने एनएससीएन के कई उग्रवादियों को मार गिराया था। उरी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद उनके नेतृत्व सेना ने 29 सितंबर 2016 को पाकिस्तान स्थित आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था।